Makar Sankranti 2021 || (मकर संक्रान्ति) 2021

Makar Sankranti 2021:  जानें इस साल कब मनेगी मकर सक्रांति, क्या है वजह और मान्यताएं ?

Makar Sankranti 2021 Shubh Muhurat : मकर संक्रान्ति 2021 मुहूर्त

  • पुण्य काल मुहूर्त :   08:03:07 से 12:30:00 तक
  • अवधि :   4 घंटे 26 मिनट
  • महापुण्य काल मुहूर्त :   08:03:07 से 08:27:07 तक
  • अवधि :   0 घंटे 24 मिनट
  • संक्रांति पल :   08:03:07


सनातन धर्म में सूर्य आराधना का महापर्व मकर संक्रांति लोक मंगल को समर्पित है। 

मकर संक्रांति 14 जनवरी 2021 को मनायी जाएगी। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। 
मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है। सूर्य का उत्तरायण होना बेहद शुभ माना जाता है। 
मकर संक्रांति सूर्यदेव के मकर राशि में गोचर करने पर मनाई जाती है। 
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन को नई फल और नई ऋतु के आगमन के लिए मनाया जाता है।
मकर संक्रांति सूर्यदेव के मकर राशि में गोचर करने पर मनाई जाती है। 
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन को नई फल और नई ऋतु के आगमन के लिए मनाया जाता है। 
मकर संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही महत्व हैं। माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव के घर जाते हैं। सूर्यदेव इस दिन मकर राशि में जाते है। 
शनिदेव को मकर और कुंभ राशि का स्वामी माना जाता है। इस कारण से यह दिन पिता और पुत्र के अनोखे मिलन का दर्शाता है।
इस विषय से जुड़ा एक काफी प्रसिद्ध श्लोक है, जो इस दिन के महत्व को समझाने कार्य करता है।
“माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम।
स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥”
इस श्लोक का अर्थ है कि “जो भी व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन शुद्ध घी और कंबल का दान करता है, वह अपनी मृत्यु पश्चात जीवन-मरण के इस बंधन से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति करता है”।


दीर्घायु, आरोग्य, धन-धान्य, ऐश्वर्य समेत सर्व मंगल के कारक प्रत्यक्ष देव सूर्य धनु से मकर राशि में सुबह 8:29 AM बजे प्रवेश कर जाएंगे। 

इससे भी पहले सूर्योदय के साथ ही मकर संक्रांति जन्य पुण्य काल शुरू हो जाएगा, जो सूर्यास्त तक रहेगा। 





makar sakranti
Makar sankranti


स्नान दान, पूजन विधान


आध्यात्मिक नगरी वाराणसी के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य के अनुसार तिथि विशेष पर गंगा, प्रयागराज संगम समेत नदी, सरोवर, कुंड आदि में स्नान के साथ सूर्य को अर्घय देने और दान का विशेष महत्व है। 

स्नानोपरांत सूर्य सहस्त्रनाम, आदित्य हृदय स्त्रोत, सूर्य चालीसा, सूर्य मंत्रादि का पाठ कर सूर्य की आराधना करनी चाहिए। 

साथ ही गुड़, तिल, कंबल, खिचड़ी, चावल आदि पुरोहितों या गरीबों को प्रदान करना चाहिए। 

वायु पुराण में मकर संक्रांति पर तांबूल दान का भी विशेष महत्व बताया गया है।

उत्तरायण सूर्यदेव


ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति का शाब्दिक अर्थ सूर्य या किसी भी ग्रह का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश या संक्रमण बताया गया है। मकर संक्रांति पर्व भगवान सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने का संधि काल है। 

उत्तरायण में पृथ्वी वासियों पर सूर्य का प्रभाव तो दक्षिणायन में चंद्रमा का प्रभाव अधिक होता है। 

सूर्यदेव छह माह उत्तरायण (मकर से मिथुन राशि तक) व छह माह दक्षिणायन (कर्क से धनु राशि तक) रहते हैं। 

उत्तरायण देवगण का दिन तो दक्षिणायन रात्रि मानी जाती है। ज्योतिष के अनुसार किसी की कुंडली में आठों ग्रह प्रतिकूल हों तो उत्तरायण सूर्य आराधना मात्र से सभी मनोनुकूल हो जाते हैं।




खरमास का समापन, शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य

सूर्यदेव के 15 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश के साथ ही एक मास से चले आ रहे खरमास का समापन हो जाएगा। 

इसी दिन से शादी-विवाह समेत मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। 

सूर्य के उत्तरायण काल ही शुभ कार्य के जाते हैं। सूर्य जब मकर, कुंभ, वृष, मीन, मेष और मिथुन राशि में रहता है, तब उसे उत्तरायण कहा जाता है। 

इसके अलावा सूर्य जब सिंह, कन्या, कर्क, तुला, वृश्चिक और धनु राशि में रहता है, तब उसे दक्षिणायन कहते हैं। इस वजह से इसका राशियों पर भी गहरा असर पड़ता है।


मकर संक्रांति में ‘मकर’ शब्द मकर राशि को इंगित करता है जबकि ‘संक्रांति’ का अर्थ संक्रमण अर्थात प्रवेश करना है। 

मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। एक राशि को छोड़कर दूसरे में प्रवेश करने की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते हैं। 



वसंत का आगमन


कुछ लोग इसे वसंत के आगमन के तौर पर भी देखते हैं, जिसका मतलब होता है फसलों की कटाई और पेड़-पौधों के पल्लवित होने की शुरूआत। 

इसलिए देश के अलग-अलग राज्यों में इस त्योहार को विभिन्न नामों से मनाया जाता है।

मकर संक्रांति को क्यों कहा जाता है पतंग महोत्सव पर्व-

यह पर्व ‘पतंग महोत्सव’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग छतों पर खड़े होकर पतंग उड़ाते हैं। 

हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना मुख्य वजह बताई जाती है। 

सर्दी के इस मौसम में सूर्य का प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्द्धक और त्वचा और हड्डियों के लिए बेहद लाभदायक होता है। 



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