श्री सरस्वती स्तोत्र  || Saraswati Stotra

श्वेतपद्मासना देवी श्वेतपुष्पोपशोभिता।
 
श्वेताम्बरधरा नित्या श्वेतगन्धानुलेपना॥१॥
 
 
श्वेताक्षसूत्रहस्ता च श्वेतचन्दनचर्चिता।
 
श्वेतवीणाधरा शुभ्रा श्वेतालङ्कारभूषिता ॥२॥
 
 
वन्दिता सिद्धगन्धर्वैरर्चिता सुरदानवैः।
 
पूजिता मुनिभिस्सर्वैः ऋषिभिः स्तूयते सदा॥३॥
 
 
स्तोत्रेणानेन तां देवीं जगद्धात्रीं सरस्वतीम्।
 
ये स्मरन्ति त्रिसन्ध्यायां सर्वां विद्यां लभन्ति ते ॥४॥
 
Maa Saraswati Stotra

Maa Saraswati Stotra

 


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