शिवा नमस्काराथा मंत्र  Shiva Namaskaratha Mantra

 

ॐ नमो हिरण्यबाहवे हिरण्यवर्णाय हिरण्यरूपाय हिरण्यपतए अंबिका पतए उमा पतए पशूपतए नमो नमः
 
ईशान सर्वविद्यानाम् ईश्वर सर्व भूतानाम् ब्रह्मादीपते ब्रह्मनोदिपते ब्रह्मा शिवो अस्तु सदा शिवोहम

 
 
तत्पुरुषाय विद्महे वागविशुद्धाय धिमहे तन्नो शिव प्रचोदयात्
महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धिमहे तन्नों शिव प्रचोदयात्
 
नमस्ते अस्तु भगवान विश्वेश्वराय महादेवाय त्र्यंबकाय त्रिपुरान्तकाय त्रिकाग्नी कालाय कालाग्नी रुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजयाय सर्वेश्वराय सदशिवाय श्रीमान महादेवाय नमः
 
 
श्रीमान महादेवाय नमः
 
शांति शांति शांति
 
शिवा नमस्काराथा मंत्र  ( SHIVA NAMASKARATHA MANTRA )

 

*****************************ॐ नमः शिवाय ।****************************************
 

 


ओम नमो हिरण्यबाहवे मंत्र

भगवान शिव नमस्कार मंत्र शिव का आशीर्वाद पाने के लिए शिव मन्त्रों में से यह एक है। यह शिव मंत्र बहुत ही खूबसूरत तरीके से इसकी रचना की गयी है इसको पढ़ने मात्र से मन्न प्रफुल्लित हो जाता है और शांति प्राप्त होती है |

यह महान शिव मंत्र है जो तीनो लोकों के स्वामी,सर्वज्ञ महादेव, इस सृष्टि के संहारक के रूप की महिमा करता है। यह मंत्र भगवान शिव का भी प्रिय जाना जाता है और इसके पठन से शिव कृपा प्राप्त होती है। इस मंत्र को शुरुआत “ॐ नमो हिरण्यबाहेव” से होती है, जिसका मतलब है कि मैं उन्हें नमन करता हूं जिसके पास सुनहरे हाथ हैं।

यह मंत्र ॐ नमः शिवाय या रुद्राष्टकम जैसे महादेव को सम्मान देने के लिए भी है। इस मंत्र में शिव गायत्री मंत्र के कई श्लोक हैं। इस मंत्र में शिव के नीलकंठ नाम का उल्लेख है जो यह कि महादेव का कंठ नीला कियूं है। देवताओं और असुरों ने मिलकर जब समुद्र मंथन किया था तब समुद्र से हलाहल विष निकला था, सृष्टि को बचाने के भगवान शिव ने इस विष को पिया और अपने कंठ में धारण कर लिया | विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया इस कारण शिव का एक नाम नीलकंठ भी है |

एक अन्य नाम “त्रिपुरंतकाया” है जो इंगित करता है कि महादेव ने त्रिपुरासुर द्वारा बनाए गए तीन शहरों पर जीत हासिल की।


Namaskaratha mantra meaning in hindi

मैं दिव्य सार, शाश्वत प्रकृति में भरोसा करता हूं, मैं अमर, शाश्वत भगवान, माता पार्वती के पति, और, जंगली जानवरों के भगवान, मैं अपने आप को आपके अधीन करता हूं।

ज्ञान के भगवान, सभी के भगवान, ब्राह्मण के भगवान, सर्वोच्च ज्ञान के भगवान, सार्वभौमिक आत्मा, मैं शिव हूं, मैं शाश्वत शिव हूं।

हम परम बुद्धि को जानते हैं, हम शुद्ध ज्ञान का ध्यान करते हैं, शिव को प्रबुद्ध कर सकते हैं, हम महान देवता को जानते हैं, रुद्र के रूप का ध्यान करते हैं, शिव हमें प्रबुद्ध कर सकते हैं, मैं सभी के दिव्य भगवान, तीसरे नेत्र से, तीनों लोकों के महान देवताओं को नमन करता हूं। , तीनों अग्नि के वाहक, रुद्र की अग्नि को लेकर, राख के साथ छिड़का हुआ नीला, जो मृत्यु पर विजय प्राप्त करता है, सभी प्राणियों के भगवान, शाश्वत शिव, मैं महान महान देवता को आत्मसमर्पण करता हूं।


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शिवा नमस्काराथा मंत्र के लाभ

  • शिवा नमस्काराथा मंत्र बहुत लाभकारी मंत्र है
  • शिवा नमस्काराथा मंत्र बहुत शक्तिशाली मंत्र है
  • यह मंत्र का जाप करने से नकरात्मकता ख़तम होती है
  • इस मंत्र का जाप करने से मन में कोई भी बुरे विचार नहीं आते
  • शिवा नमस्काराथा मंत्र का जाप करने से हर तरह की बीमारी से निजात मिलता है
  • इस मंत्र का जाप करने से बहुत शांति मिलती है

  1. शिवा नमस्काराथा का क्या मतलब होता है?

    शिवा नमस्काराथा शब्द का मतलब होता है की आपको शिव मेरा नमस्कार है

  2. शिवा नमस्काराथा मंत्र का जाप कब करना चाहिए?

    शिवा नमस्काराथा मंत्र का जाप सावन महीने और शिवरात्रि में करना शुभ होता है



शिवा नमस्काराथा मंत्र पीडीऍफ़

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