गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र | Gajendra Moksha Stotram

गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र || Gajendra Moksha Stotram || Gajendra Moksha Stotra श्रीशुक उवाच   ” एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो ह्रदि ।   जजाप परमं जाप्यं प्राक्जन्मन्यनुशिक्षितम् ॥ ” १ ॥     गजेन्द्र उवाच   ” ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम् ।   पुरुषायादिबीजाय परेशायाभीधीमहि ॥ ” २ ॥     यस्मिन्निदं यतश्चेदं … Read more