Venkateswara Ashtottara Shatanama Stotram | Venkateswara Stotra

 Sri Venkateswara Ashtottara Shatanama Stotram lyrics in Hindi श्री वेङ्कटेशः श्रीनिवासो लक्ष्मीपतिरनामयः   अमृतांशो जगद्वन्द्योगोविन्दश्शाश्वतः   प्रभुं शेषाद्रि निलयो देवः केशवो मधुसूदनः ।     अमृतोमाधवः कृष्णं श्रीहरिर्ज्ञानपञ्जर ॥ १॥     श्री वत्सवक्षसर्वेशो गोपालः पुरुषोत्तमः ।   गोपीश्वरः परञ्ज्योतिर्वैकुण्ठ पतिरव्ययः ॥ २॥     सुधातनर्यादवेन्द्रो नित्ययौवनरूपवान् ।   चतुर्वेदात्मको विष्णु रच्युतः पद्मिनीप्रियः ॥ ३॥ … Read more

ऋणमोचन अंगारक स्तोत्रम | Rin Mochan Angaraka Stotram

ऋणमोचन अंगारक स्तोत्रम || Rin Mochan Angaraka Stotram ॥ ऋणमोचन अङ्गारकस्तोत्रम् ॥   अथ ऋणग्रस्तस्य ऋणविमोचनार्थं अङ्गारकस्तोत्रम् ।   स्कन्द उवाच ।   ऋणग्रस्तनराणां तु ऋणमुक्तिः कथं भवेत् ।   ब्रह्मोवाच ।   वक्ष्येऽहं सर्वलोकानां हितार्थं हितकामदम् ।   अस्य श्री अङ्गारकमहामन्त्रस्य गौतम ऋषिः ।   अनुष्टुप्छन्दः । अङ्गारको देवता ।   मम ऋणविमोचनार्थे अङ्गारकमन्त्रजपे … Read more

Shri Ganga Stotram

श्री गंगा स्तोत्रम || Shri Ganga Stotram || Ganga Stotra देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरल तरंगे।   शंकर मौलिविहारिणि विमले मम मति रास्तां तव पद कमले ॥ १ ॥     भागीरथिसुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः ।   नाहं जाने तव महिमानं पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥ २ ॥     हरिपदपाद्यतरंगिणि गंगे हिमविधुमुक्ताधवलतरंगे । … Read more

श्री राम अवतार स्तोत्रम || Ram Avtar Stotram

श्री राम अवतार स्तोत्रम || Sri Ram Avtar Stotram भय प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशिल्या हितकारी | हरषित महतारी मुनि-मन हारी अदभुत रूप निहारी || लोचन अभिरामा तनु घनश्यामा निज आयुध भुजचारी | भूषण बन माला नयन  विशाला शोभा सिन्धु खरारी || कह दुई कर जोरी स्तुति तोरी केहिविधि  करूं अनन्ता | माया गुण ज्ञान … Read more

श्री सरस्वती स्तोत्रम || Shri Saraswati Stotram

श्री सरस्वती स्तोत्रम || Shri Saraswati Stotram या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वति भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥१॥ दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिं स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापेरण । भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना ॥२॥ सुरासुरसेवितपादपङ्कजा करे विराजत्कमनीयपुस्तका ।  विरिञ्चिपत्नी कमलासनस्थिता … Read more