श्री भैरवाष्टक || Shri Bhairav Ashtakam

श्री भैरवाष्टक || Shri Bhairav Ashtakam ॥ श्रीभैरवाय नमः ॥ सकलकलुषहारी धूर्तदुष्टान्तकारी, सुचिरचरितचारी मुण्डमौञ्जीप्रचारी । करकलितकपाली कुण्डली दण्डपाणिः, स भवतु सुखकारी भैरवो भावहारी ॥ १॥ विविधरासविलासविलासितं नववधूरवधूतपराक्रमम् । मदविधूणितगोष्पदगोष्पदं भवपदं सततं सततं स्मरे ॥ २॥ अमलकमलनेत्रं चारुचन्द्रावतंसं, सकलगुणगरिष्ठं कामिनीकामरूपम् । परिहृतपरितापं डाकिनीनाशहेतुं, भज जन शिवरूपं भैरवं भूतनाथम् ॥ ३॥ सबलबलविघातं क्षेत्रपालैकपालं, विकटकटिकरालं ह्यट्टहासं विशालम् । … Read more