श्री दुर्गा कवचम् || Shree Durga Kavacham ||

श्री दुर्गा कवचम् || Shri Durga Kavacham ईश्वर उवाच शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कवचं सर्वसिद्धिदम् । पठित्वा पाठयित्वा च नरो मुच्येत सङ्कटात् ॥ १ ॥ उमा देवी शिरः पातु ललाटं शूलधारिणी । चक्षुषी खेचरी पातु वदनं सर्वधारिणी ॥ २ ॥ जिह्वां च चण्डिका देवी  ग्रीवां सौभद्रिका तथा । अशोकवासिनी चेतो द्वौ बाहू वज्रधारिणी ॥ ३ ॥ … Read more

Skandmata Devi Kavach -स्कंदमाता देवी कवच

 स्कंदमाता देवी कवच –  Skandmata Devi Kavach !! कवच !! ऐं बीजालिंकादेवी पदयुग्मधरापरा। हृदयंपातुसा देवी कातिकययुता॥ श्रींहीं हुं ऐं देवी पूर्वस्यांपातुसर्वदा। सर्वाग में सदा पातुस्कन्धमातापुत्रप्रदा॥ वाणवाणामृतेहुं फट् बीज समन्विता। उत्तरस्यातथाग्नेचवारूणेनेत्रतेअवतु॥ इन्द्राणी भैरवी चैवासितांगीचसंहारिणी। सर्वदापातुमां देवी चान्यान्यासुहि दिक्षवै॥ Skandmata Kavach Read also: श्री तुलसी कवचम् || Shree Tulsi Kavacham शुक्र ग्रह कवच – Shukra Graha Kavacham … Read more

Chandi Kavach | Shri Durga Chandi Kavach in Hindi | श्री चण्डी कवच

Chandi Kavach- श्री चण्डी कवच   विनियोग :    ॐ अस्य श्रीदेव्या: कवचस्य ब्रह्मा ऋषि:,   अनुष्टुप् छन्द:, ख्फ्रें चामुण्डाख्या महा-लक्ष्मी: देवता,   ह्रीं ह्रसौं ह्स्क्लीं ह्रीं ह्रसौं अंग-न्यस्ता देव्य: शक्तय:,   ऐं ह्स्रीं ह्रक्लीं श्रीं ह्वर्युं क्ष्म्रौं स्फ्रें बीजानि,   श्रीमहालक्ष्मी-प्रीतये सर्व रक्षार्थे च पाठे विनियोग:।   ऋष्यादि-न्यास   ब्रह्मर्षये नम: शिरसि,   अनुष्टुप् … Read more

माता कुष्मांडा देवी कवच -Kushmanda Devi Kavach

माता कुष्मांडा देवी कवच -Kushmanda Devi Kavach !! कवच !! हसरै मे शिर: पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्। हसलकरीं नेत्रथ, हसरौश्च ललाटकम्॥ कौमारी पातु सर्वगात्रे वाराही उत्तरे तथा। पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम। दिग्दिध सर्वत्रैव कूं बीजं सर्वदावतु॥ Kushmanda Devi Raksha Kavacham Read also: श्री महालक्ष्मी कवचम् || Shree Mahalakshmi Kavacham || माता ब्रह्मचारिणी देवी कवच … Read more

Devi Kavach – देवी रक्षा कवच

Devi Kavach – देवी रक्षा कवच विनियोग :  ॐ अस्य श्रीदेव्या: कवचस्य ब्रह्मा ऋषि:,  अनुष्टुप् छन्द:, ख्फ्रें चामुण्डाख्या महा-लक्ष्मी:  देवता, ह्रीं ह्रसौं ह्स्क्लीं ह्रीं ह्रसौं अंग-न्यस्ता देव्य: शक्तय:, ऐं ह्स्रीं ह्रक्लीं श्रीं ह्वर्युं क्ष्म्रौं स्फ्रें बीजानि,  श्रीमहालक्ष्मी-प्रीतये सर्व रक्षार्थे च पाठे विनियोग:। ऋष्यादि-न्यास ब्रह्मर्षये नम: शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नम: मुखे, ख्फ्रें चामुण्डाख्या महा-लक्ष्मी: देवतायै नम: … Read more