माँ षोडशी त्रिपुर सुन्दरी कवच || Mata Shodashi Tripura Sundari Kavach

माँ षोडशी त्रिपुर सुन्दरी कवच || Mata Shodashi Tripura Sundari Kavach ॐ पूर्वे मां भैरवी पातु बाला मां पातु दक्षिणे । मालिनी पश्चिमे पातु त्रासिनी उत्तरेऽवतु ।। ऊधर्व पातु महादेवी महात्रिपुरसुन्दरी । अधस्तात् पातु देवेशी पातालतलवासिनी ।। आधारे वाग्भव: पातु कामराजस्तथा हदि । डामर: पातु मां नित्यं मस्तके सर्वकामद: ।। ब्रह्मरन्ध्रे सर्वगात्रे छिद्रस्थाने च सर्वदा … Read more

माता ब्रह्मचारिणी देवी कवच || Brahmacharini Kavacham

माता ब्रह्मचारिणी देवी कवच || Mata Brahmacharini Devi Kavach || Brahmacharini Kavacham ॥ कवच ॥ त्रिपुरा में हृदयेपातुललाटेपातुशंकरभामिनी। अर्पणासदापातुनेत्रोअर्धरोचकपोलो॥ पंचदशीकण्ठेपातुमध्यदेशेपातुमहेश्वरी॥ षोडशीसदापातुनाभोगृहोचपादयो। अंग प्रत्यंग सतत पातुब्रह्मचारिणी॥ Brahmacharini Kavacham Read also: पितृ कवच | Pitra Kavach | Pitru Kavach | Pitra Kavacham श्री दत्तात्रेय वज्र कवच || Shree Dattatreya Vajra Kavacham श्री नृसिंह कवच | Shree Narsimha … Read more

माता चंद्रघंटा देवी कवच || Mata Chandraghanta Devi Kavach

माता चंद्रघंटा देवी कवच || Mata Chandraghanta Devi Kavach ॥ कवच ॥ रहस्यं श्रणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने। श्री चन्द्रघण्टास्य कवचं सर्वसिद्धि दायकम्॥ बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोद्धारं बिना होमं। स्नान शौचादिकं नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिकम॥ कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च। न दातव्यं न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्॥ Maa Chandraghanta Kavach Read also: श्री दत्तात्रेय वज्र … Read more

माँ मातंगी कवच || Maa Matangi Kavacham

माँ मातंगी कवच || Maa Matangi Kavacham श्री देव्युवाच साधु-साधु महादेव। कथयस्व सुरेश्वर। मातंगी-कवचं दिव्यं, सर्व-सिद्धि-करं नृणाम् ॥ श्री ईश्वर उवाच श्रृणु देवि। प्रवक्ष्यामि, मातंगी-कवचं शुभं। गोपनीयं महा-देवि। मौनी जापं समाचरेत् ॥ विनियोग – ॐ अस्य श्रीमातंगी-कवचस्य श्री दक्षिणा-मूर्तिः ऋषिः । विराट् छन्दः । श्रीमातंगी देवता । चतुर्वर्ग-सिद्धये जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यास श्री दक्षिणा-मूर्तिः ऋषये … Read more

Skandmata Devi Kavach -स्कंदमाता देवी कवच

 स्कंदमाता देवी कवच –  Skandmata Devi Kavach !! कवच !! ऐं बीजालिंकादेवी पदयुग्मधरापरा। हृदयंपातुसा देवी कातिकययुता॥ श्रींहीं हुं ऐं देवी पूर्वस्यांपातुसर्वदा। सर्वाग में सदा पातुस्कन्धमातापुत्रप्रदा॥ वाणवाणामृतेहुं फट् बीज समन्विता। उत्तरस्यातथाग्नेचवारूणेनेत्रतेअवतु॥ इन्द्राणी भैरवी चैवासितांगीचसंहारिणी। सर्वदापातुमां देवी चान्यान्यासुहि दिक्षवै॥ Skandmata Kavach Read also: श्री तुलसी कवचम् || Shree Tulsi Kavacham शुक्र ग्रह कवच – Shukra Graha Kavacham … Read more