श्री गणनायक अष्टकम || Sri Gananayaka Ashtakam ||

श्री गणनायक अष्टकम || Sri Gananayaka Ashtakam || Gananayaka Ashtak एकदन्तं महाकायं तप्तकांचनसन्निभम् । लंबोदरं विशालाक्षं वन्देऽहं गणनायकम् ॥ १ ॥ मौञ्जीकृष्णाजिनधरं नागयज्ञोपवीतिनम् । बालेन्दुविलसन्मौलिं वन्देऽहं गणनायकम् ॥ २ ॥ अम्बिकाहृदयानन्दं मातृभिः परिपालितम् । भक्तप्रियं मदोन्मत्तं वन्देऽहं गणनायकम् ॥ ३ ॥ चित्ररत्नविचित्रांगं चित्रमालाविभूषितम् । चित्ररूपधरं देवं वन्देऽहं गणनायकम् ॥ ४ ॥ गजवक्त्रं सुरश्रेष्ठं कर्णचामरभूषितम् । … Read more