Shri Ganga Stotram

श्री गंगा स्तोत्रम || Shri Ganga Stotram || Ganga Stotra देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरल तरंगे।   शंकर मौलिविहारिणि विमले मम मति रास्तां तव पद कमले ॥ १ ॥     भागीरथिसुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः ।   नाहं जाने तव महिमानं पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥ २ ॥     हरिपदपाद्यतरंगिणि गंगे हिमविधुमुक्ताधवलतरंगे । … Read more