सूर्य देव मंतर | Surya Dev Mantra | Surya Mantra

सूर्य ग्रह के मंत्र –  Surya Dev Ke Mantra    सूर्य वैदिक मंत्र || Surya Dev Ke Vedic Mantra    ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च ।   हिरण्य़येन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन ।।   सूर्य तांत्रिक मंत्र || Surya Dev Ke Tantrik Mantra      ऊँ घृणि: सूर्यादित्योम ऊँ घृणि: सूर्य आदित्य … Read more

श्री सूर्य अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् – Surya Ashtottara Shatanama Stotra

अरुणाय शरण्याय करुणारससिन्धवे । असमानबलायाऽर्तरक्षकाय नमो नमः ॥ १॥ आदित्यायाऽदिभूताय अखिलागमवेदिने । अच्युतायाऽखिलज्ञाय अनन्ताय नमो नमः ॥ २॥ इनाय विश्वरूपाय इज्यायैन्द्राय भानवे । इन्दिरामन्दिराप्ताय वन्दनीयाय ते नमः ॥ ३॥ ईशाय सुप्रसन्नाय सुशीलाय सुवर्चसे । वसुप्रदाय वसवे वासुदेवाय ते नमः ॥ ४॥ उज्ज्वलायोग्ररूपाय ऊर्ध्वगाय विवस्वते । उद्यत्किरणजालाय हृषीकेशाय ते नमः ॥ ५॥ ऊर्जस्वलाय वीराय निर्जराय जयाय … Read more

सूर्य अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् – Surya Ashtottara Shatanama Stotram

सूर्य अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् || Surya Ashtottara Shatanama Stotram श्रीगणेशाय नमः । वैशम्पायन उवाच । शृणुष्वावहितो राजन् शुचिर्भूत्वा समाहितः । क्षणं च कुरु राजेन्द्र गुह्यं वक्ष्यामि ते हितम् ॥ १॥ धौम्येन तु यथा प्रोक्तं पार्थाय सुमहात्मने । नाम्नामष्टोत्तरं पुण्यं शतं तच्छृणु भूपते ॥ २॥ सूर्योऽर्यमा भगस्त्वष्टा पूषार्कः सविता रविः । गभस्तिमानजः कालो मृत्युर्धाता प्रभाकरः ॥ … Read more

सूर्य अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम् – Surya Ashtottara Shatanama Stotram

श्रीगणेशाय नमः । वैशम्पायन उवाच । शृणुष्वावहितो राजन् शुचिर्भूत्वा समाहितः । क्षणं च कुरु राजेन्द्र गुह्यं वक्ष्यामि ते हितम् ॥ १॥ धौम्येन तु यथा प्रोक्तं पार्थाय सुमहात्मने । नाम्नामष्टोत्तरं पुण्यं शतं तच्छृणु भूपते ॥ २॥ सूर्योऽर्यमा भगस्त्वष्टा पूषार्कः सविता रविः । गभस्तिमानजः कालो मृत्युर्धाता प्रभाकरः ॥ ३॥ पृथिव्यापश्च तेजश्च खं वायुश्च परायणम् । सोमो बृहस्पतिः … Read more

श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् | Surya Mandala Ashtakam Stotram

श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् || Shri Surya Mandala Ashtakam Stotram नमः सवित्रे जगदेकचक्षुषे जगत्प्रसूतिस्थितिनाश हेतवे ।   त्रयीमयाय त्रिगुणात्मधारिणे विरञ्चि नारायण शंकरात्मने ॥ १ ॥     यन्मडलं दीप्तिकरं विशालं रत्नप्रभं तीव्रमनादिरुपम् ।   दारिद्र्यदुःखक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ २ ॥     यन्मण्डलं देवगणै: सुपूजितं विप्रैः स्तुत्यं भावमुक्तिकोविदम् ।   तं देवदेवं प्रणमामि … Read more

श्री सूर्य प्रातः स्मरण स्तोत्रम् | Surya Pratah Smaran Stotram

श्री सूर्य प्रातः स्मरण स्तोत्रम् || Shri Surya Pratah Smaran Stotram प्रातः स्मरामि तत्सवितुर्वरेण्यं,   रूपं हि मण्डलमृचोऽथ तनुर्यजूंषि।     सामानि यस्य किरणाः प्रभवादि हेतुं,   ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यमचिन्त्यरूपम् ॥१॥     प्रातर्नमामि तरणिं तनुवाङ्मनोभि-,   र्ब्रह्मेन्द्रपूर्वकसुरैर्नुतमर्चितं च।     वृष्टिप्रमोचनविनिग्रहहेतुभूतं,   त्रैलोक्यपालनपरं त्रिगुणात्मकं च ॥२॥     प्रातर्भजामि सवितारमनन्तशक्तिं,   पापौघशत्रुभयरोगहरं परं च।     … Read more

सूर्य स्तोत्र || Surya Stotram

सूर्य स्तोत्र || Surya Stotram प्रात: स्मरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यंरूपं हि मण्डलमृचोऽथ तनुर्यजूंषी । सामानि यस्य किरणा: प्रभवादिहेतुं ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यचिन्त्यरूपम् ।।1।। प्रातर्नमामि तरणिं तनुवाऽमनोभि ब्रह्मेन्द्रपूर्वकसुरैनतमर्चितं च। वृष्टि प्रमोचन विनिग्रह हेतुभूतं त्रैलोक्य पालनपरंत्रिगुणात्मकं च।।2।। प्रातर्भजामि सवितारमनन्तशक्तिं पापौघशत्रुभयरोगहरं परं चं। तं सर्वलोककनाकात्मककालमूर्ति गोकण्ठबंधन विमोचनमादिदेवम् ।।3।। ॐ चित्रं देवानामुदगादनीकं चक्षुर्मित्रस्य वरुणस्याग्ने:। आप्रा धावाप्रथिवी अन्तरिक्षं सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्र्व ।।4।। सूर्यो देवीमुषसं … Read more

श्री सूर्य अष्टकम || Shri Surya Ashtakam

नवग्रहों में सर्वप्रथम ग्रह सूर्य हैं जिसे पिता के भाव कर्म का स्वामी माना गया हैं ।  सूर्यदेव का यह पाठ आपकी ज़िंदगी में व्यवसाय या शिक्षा सम्बन्धी रुकावटों को दूर करते हैं। रोजगार की चाह रखने वाले अगर प्रति रविवार उनका सूर्याष्टकम का पाठ करें और दूध -मिश्री का भोग लगा कर पूजन करें … Read more

श्री सूर्याष्टकम् || Shri Suryashtakam || Surya Ashtakam || Ashtakam

श्री सूर्याष्टकम् || Shri Suryashtakam || Surya Ashtakam ॥ सूर्याष्टकम् ॥ श्रीगणेशाय नमः । प्रभाते यस्मिन्नभ्युदितसमये कर्मसु नृणां, प्रवर्तेद्वै चेतो गतिरपि च शीतापहरणम् । गतो मैत्र्यं पृथ्वीसुरकुलपतेर्यश्च तमहं, नमामि श्रीसूर्यं तिमिरहरणं शान्तशरणम् ॥ १॥ त्रिनेत्रोऽप्यञ्जल्या सुरमुकुटसंवृष्टचरणे, बलिं नीत्वा नित्यं स्तुतिमुदितकालास्तसमये । निधानं यस्यायं कुरुत इति धाम्नामधिपति, नमामि श्रीसूर्यं तिमिरहरणं शान्तशरणम् ॥ २॥ मृगाङ्के मूर्तित्वं ह्यमरगण भर्ताकृत … Read more

सूर्य देव के 108 नाम | Surya Dev Ke 108 Naam | Ashtottara Shatanamavali

सूर्य देव के 108 नाम || Surya Dev Ke 108 Naam || 108 Names Of Lord Surya अरुण- तांबे जैसे रंग वाला शरण्य- शरण देने वाला करुणारससिन्धु- करुणा- भावना के महासागर असमानबल- असमान बल वाले आर्तरक्षक- पीड़ा से रक्षा करने वाले आदित्य- अदिति के पुत्र आदिभूत- प्रथम जीव अखिलागमवेदिन- सभी शास्त्रों के ज्ञाता अच्युत- जिसता … Read more