तुलसी गायत्री मंत्र | Tulsi Gayatri mantra

माँ तुलसी गायत्री मंत्र एक और बहुत शक्तिशाली मंत्र है। तुलसी गायत्री मंत्र के जाप से मन को शांति मिलती है।

तुलसी गायत्री मंत्र घर में शांति और परिवार के सदस्यों के बीच सद्भाव लाता है। मंत्र से संबंधित सभी लाभ प्राप्त करने के लिए तुलसी गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।

तुलसी मंत्र तुलसी को समर्पित है, जो विष्णु और उनके अवतार कृष्ण और विट्टल को प्रिय है। देवी तुलसी के लिए गायत्री मंत्र निम्नलिखित है।

श्री तुलसी गायत्री मंत्र

ऊँ श्री त्रिपुराय विद्महे तुलसी पत्राय धीमहि |
तन्नो: तुलसी प्रचोदयात ||

Om shreeTripuray Vidmahe Tulsi Patray Dhimahi |
Tanno: Tulsi Prachodayat ||


तुलसी मंत्र

ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे,
विष्णुप्रियायै च धीमहि,
तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।

Om Tulsidevye Cha Vidmahe Vishnupriyaye Cha Dheemahi Tanno Vrinda Prachodayat.

तुलसी गायत्री मंत्र का अर्थ

ओम, मुझे दिव्या ओषदियों की देवी और प्राण रक्षक तुलसी देवी का ध्यान करके प्राथना करते है, हे तुलसी देवी, जो विष्णु को प्रिय हैं, मुझे उच्च बुद्धि दें, और माँ वृंदा मेरे मन को रोशन करें।


तुलसी गायत्री मंत्र के लाभ

तुलसी पूजा के दौरान तुलसी मंत्र का जाप किया जाता और तुलसी माता की आरती की जाती है। तुलसी गायत्री मंत्र अच्छे स्वास्थ्य, धन, शांति और समृद्धि के लिए एक शक्तिशाली मंत्र है। तुलसी गायत्री मंत्र देवी महालक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है। सांस से सम्बंदित बिमारियों में तुलसी का उपयोग बहुत लाभकारी है । तुलसी गायत्री मंत्र का जाप करने का सबसे अच्छा समय एकादशी तिथि, शुक्रवार और शनिवार है। जप करने के समय की संख्या: 9, 11, 108, या 1008 बार।

हिन्दू धर्म में घर में तुलसी के होने का बहुत महत्ब है। तुलसी सब औषदीयों के ऊपर महा औषधि मन गया है। तुलसी को संजीवनी बूटी के बराबर माना गया है। घर में तुलसी होने से घर में स्वस्थ ऊर्जा का संचार होता है। तुलसी गायत्री मन्त्र के पाठ से रोगों और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है | जीवन में सुख और शान्ति आती है | तुलसी माता के गायत्री मंत्र जाप से मन शांत होता है तथा मन में सेवाभाव का संचार होता है |

Tulsi Gayatri mantra
तुलसी गायत्री मंत्र अर्थ सहित

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