BHAKTI KI SHAKTI
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🪔 वेदमाता गायत्री ⏰ प्रातः सूर्योदय, गायत्री जयंती, रविवार

श्री गायत्री माता की आरती (जयति जय गायत्री माता)

आत्मज्ञान, ब्रह्मतेज, मानसिक शुद्धि और चारों वेदों के सार रूपी ज्ञान की प्राप्ति हेतु।

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॥ मुख्य टेक / मुखड़ा ॥

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥

॥ संपूर्ण आरती कड़ियां ॥
1

आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जग पालन कर्त्री। दुःख शोक भय क्लेश कलह सब दारिद दैन्य हर्त्री॥ जयति जय...॥

2

ब्रह्म रूपिणी, प्रणव प्रणीती, जगत की जननी। ज्ञान तेज बल बुद्धि विधात्री, भव भय तम हरनी॥ जयति जय...॥

3

चार वेद की मात पुनीता, तुम ब्रह्माणी गोरी। ऋद्धि सिद्धि धन सुख की दाती, महा भवानि सुहोरी॥ जयति जय...॥

4

जो जन ध्यावे ध्यान तुम्हारा, पावे सो सुख ज्ञाना। पातक छूटहिं, ताप मिटहिं सब, मिटे सकल संताना॥ जयति जय...॥

5

आरती प्रेम सहित जो गावे, गायत्री सुख पावे। ज्ञान प्रकाश हृदय महं जागे, मोक्ष परम पद पावे॥ जयति जय...॥

जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥

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आरती करने की शास्त्रोक्त विधि

सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। शुद्ध घी का दीपक जलाकर गायत्री मंत्र का जप करने के उपरांत श्रद्धापूर्वक आरती करें।

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आरती के चमत्कारी लाभ

बुद्धि तेजस्वी होती है और निर्णय क्षमता में सुधार होता है। मन से नकारात्मक विचार नष्ट होते हैं। आध्यात्मिक तेज और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।

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