BHAKTI KI SHAKTI
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💰 धनाधिपति कुबेर देव ⏰ धनतेरस, दीपावली, शरद पूर्णिमा, शुक्रवार

श्री कुबेर जी की आरती (ॐ जय यक्ष कुबेर हरे)

धन के भंडार की रक्षा, स्थिर लक्ष्मी और आर्थिक संकट से मुक्ति हेतु।

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॥ मुख्य टेक / मुखड़ा ॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जय यक्ष कुबेर हरे। धन संपति के दाता, संकट दूर करे॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥

॥ संपूर्ण आरती कड़ियां ॥
1

उत्तर दिश के स्वामी, शिव के परम सखा। तिजोरी के रक्षक, सब सुख संपत्ति रखा॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥

2

धनतेरस जो पूजे, सो नर वैभव पावे। दरिद्रता सब भागे, सुख संपति घर आवे॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जय यक्ष कुबेर हरे। धन संपति के दाता, संकट दूर करे॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥

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Sacred Aarti Exposition & Meaning · आरती भावार्थ व सारांश

Divine Meaning of Shri Kuber Dev Ki Aarti

Praises the custodian of heaven's wealth, who blesses honest labor with lasting riches and financial stability.

✨ Stanza-by-Stanza Devotional Significance

✦ Guardian of Treasures

Invokes Lord Kuber to settle in the home alongside Mother Lakshmi so wealth is never squandered.

🌟 Spiritual Fruits & Vastu Household Blessings (आरती फल)

Prevents business bankruptcy, stops cash drains, and encourages wise investments.

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आरती करने की शास्त्रोक्त विधि

तिजोरी या पूजा स्थान पर उत्तर दिशा में मुख कर कमल का फूल और चांदी का सिक्का रखकर आरती करें।

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आरती के चमत्कारी लाभ

धन-संपत्ति सुरक्षित रहती है और धन संचय में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।

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