आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की॥
जनक सुता जग जननी भवानी, सिंगार रूप पतिव्रत खानी॥ आरती श्री जनक दुलारी की...॥
पति पद अनुगामी सुखदाता, रामचन्द्र मन हरनी माता॥ आरती श्री जनक दुलारी की...॥
जो कोई आरती गावै सीता, पावे सुख संपति विनीता॥ आरती श्री जनक दुलारी की...॥
आरती श्री जनक दुलारी की, सीता जी रघुवर प्यारी की॥