BHAKTI KI SHAKTI
🌿
🌿 Lord Dhanvantari

Shri Dhanvantari Chalisa

For health, longevity, recovery from illness, and vitality blessed by Lord Dhanvantari.

📅 Best Day: Dhanteras, Saturday 📜 40 Sacred Verses
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॥ दोहा ॥

करूं वंदना गुरू चरण रज, ह्रदय राखी श्री राम।

मातृ पितृ चरण नमन करूँ, प्रभु कीर्ति करूँ बखान॥

तव कीर्ति आदि अनंत है, विष्णुअवतार भिषक महान।

हृदय में आकर विराजिए, जय धन्वंतरि भगवान॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय धनवंतरि जय रोगारी। सुनलो प्रभु तुम अरज हमारी॥

2

विष्णु रूप तुम जग में आये। अमृत कलश कर में सजाये॥

3

क्षीर सिंधु मथ जब सब देवा। प्रगटे प्रभु तुम करि जन सेवा॥

4

आयुर्वेद के जनक कहाये। जड़ी बूटी का भेद बताये॥

5

चार भुजा अति दिव्य सोहावे। शंख चक्र कर अमृत भावे॥

6

पीताम्बर तन पर छवि भारी। रोग हरन की लीला न्यारी॥

7

वात पित्त कफ दोष मिटावन। सकल व्याधि से देहु बचावन॥

8

दीर्घायु आरोग्य विधाता। जन कल्याण करहु सुख दाता॥

9

जो जन रोग ग्रस्त अति होई। तुम्हरे शरण आवे जब कोई॥

10

औषधि रूप में कृपा तुम्हारी। मिटे असाध्य व्याधि सब भारी॥

11

वैद्य डॉक्टर शीश नवावें। तुम्हरे बल सों रोग नशावें॥

12

सकल औषधिन रस तुम जाना। चरक सुश्रुत कीन्हा ज्ञाना॥

13

काया कंचन सम कर दीजै। दुख दारिद सब हर प्रभु लीजै॥

14

मानसिक चिंता भय भगावो। सुखद शांति का मार्ग दिखावो॥

15

अमृत बिंदु देहु प्रभु माहीं। जम के दूत निकट नहिं आहीं॥

16

अंधे को तुम नयन दिखावे। कोढ़ी का सब काया सुधारे॥

17

निर्बल जन को बल पहुंचावे। रोगी का सब कष्ट नशावे॥

18

धनतेरस जो दीप जलावै। तुम्हरी पूजा पाठ करावै॥

19

ताके घर आरोग्य समाई। दुख विपत्ति सब दूर नसाई॥

20

जय जय धन्वंतरि कृपाला। मिटहु कलेश कटहु जंजाला॥

21

शरण गहे की लाज रखहु प्रभु। भक्तन के हितकारी हो विभु॥

22

सत्य शील गुण ज्ञान बढ़ावो। भक्ति भाव उर बीच जगावो॥

23

अमृत रस की वर्षा कीजै। चरणन की सेवा प्रभु दीजै॥

24

नित उठि जो चालीस दिन गावे। रोग दोष सब दूर भगावे॥

25

घर आंगन में सुख बरसावे। तन मन में नव तेज जगावे॥

26

औषधि सेवन करते ध्यावे। शीघ्र स्वास्थ्य लाभ नर पावे॥

27

हे देवाधिदेव भगवाना। हम अज्ञानी तुम्हरा ज्ञाना॥

28

कृपा दृष्टि निज जन पर फेरो। हरो अमंगल संशय मेरो॥

29

दीन दयाल दया के सागर। धन्वंतरि प्रभु गुण आगार॥

30

सकल जगत के तुम हो त्राता। सुख संपत्ति स्वास्थ्य के दाता॥

31

चारों वेद महिमा बखानी। विष्णु अंश धन्वंतरि ज्ञानी॥

32

भूल चूक सब क्षमा करावो। मनवांछित फल शीघ्र दिलावो॥

33

अकाल मृत्यु का भय मिटावो। दीर्घायु का वर बतलाओ॥

34

जो नर ध्यावे नित्य सवेरे। कष्ट न आवे पास घनेरे॥

35

सदा सहाय रहहु भगवाना। धन्वंतरि प्रभु पूरण ज्ञाना॥

36

आरोग्य धन सब ते बड़ भाई। जाहि मिले सोई सुख पाई॥

37

तुम्हरी कृपा सबहिं सुख होई। रोग विहीन रहे नर सोई॥

38

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावै। श्रद्धा सों जो शीश नवावै॥

39

पाप ताप संताप विनाशन। जय जय धन्वंतरि सुख भासन॥

40

जो कोई इसको नित्य ध्यावे। बल वैभव सम्पन्न तन पावें॥

॥ समापन दोहा ॥

रोग शोक सन्ताप हरण, अमृत कलश लिए हाथ।

जरा व्याधि मद लोभ मोह, हरण करो भिषक नाथ॥

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Chanting Ritual & Procedure (पाठ विधि)

Bathe and face East or North. Light a pure ghee lamp. Offer tulsi leaves, yellow flowers, and sandalwood paste. Recite before taking medicine for divine healing.

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Spiritual & Material Benefits (पाठ के लाभ)

For health, longevity, recovery from illness, and vitality blessed by Lord Dhanvantari.

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