BHAKTI KI SHAKTI
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🌿 Maa Tulsi (Holy Basil / Vrinda)

Shri Tulsi Chalisa

Positive home vibrations, Vastu defect removal, wellness, and Lord Vishnu's grace.

📅 Best Day: Thursday, Ekadashi, Kartik Month 📜 40 Sacred Verses
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॥ दोहा ॥

जय जय तुलसी भगवती, सत्यवती सुखदान। नमो नमो हरि प्रिय सकल, संकट करहु निदान॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय जय तुलसी मातु कृपाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

2

वृन्दा नाम तिहारो विख्याता। शालिग्राम प्रिया सुखदाता॥

3

हरि के अंग बिराजत माता। जग कल्याणी जग विधाता॥

4

बिना तुलसी हरि भोग न खावैं। चरणामृत में तुलसी भावैं॥

5

कार्तिक मास में पूजा ठाने। तुलसी कृपा सो पहिचाने॥

6

दीप दान जो तुलसी पै करई। ताके घर धन धान्य भरई॥

7

सवेरे उठि जो जल चढ़ावै। ताके पाप ताप सब नशावै॥

8

वास्तु दोष सब दूर भगावहु। घर में सुख शांति बसावहु॥

9

रोग दोष दारिद्र नसावहु। आरोग्य बल विद्या दिलवावहु॥

10

तुलसी पत्ता मुख में राखै। सो अमृत रस जीवन चाखै॥

11

यमदूत निकट न कबहूँ आवैं। जहाँ तुलसी दल दर्शन पावैं॥

12

तुलसी विवाह जो जन करई। सो वैकुण्ठ धाम संचरई॥

13

कन्या दान सम फल सो पावै। जो तुलसी शालिग्राम मिलावै॥

14

दीन मलीन अनाथ सहारा। तुलसी मातु तुम हो रखवारा॥

15

सदा रहौं मैं शरण तुम्हारी। रक्षा करहु हे मात बलिहारी॥

16

दुःख दरिद्र नहिं निकटै आवै। मंगल मोद प्रमोद बढावै॥

17

जो यह पाठ करै चालीसा। होय प्रसन्न तुलसी के ईशा॥

18

नित्त नेम करि पाठ सुनावै। सो नर मनवांछित फल पावै॥

19

अद्भुत महिमा मात तुम्हारी। वंदन करत सकल संसारी॥

20

काम क्रोध मद लोभ नशावहु। सात्विक भाव हृदय उपजावहु॥

21

संतान हीन को गोदी भरई। तुलसी कृपा ते सब दुख टरई॥

22

निर्धन को धनवान बनावहु। बिगड़े काज हमारे संवारो॥

23

दीन दयाल सुनो विनती हमारी। संकट हरहु हमारे भारी॥

24

तुम बिन कोई नहिं रखवाला। सुन लीजै विनती कृपाला॥

25

जय तुलसी जय जय सुखदाता। भक्त जनों के भाग्य विधाता॥

26

शरण तुम्हारी आयो माता। तुम हो मुक्ति मोक्ष विधाता॥

27

आरती करौं तुम्हारी स्वामी। तुम हो घट घट अंतरयामी॥

28

प्रेम भक्ति रस अन्तर नाचे। तुलसी नाम जो सांचे बांचे॥

29

सकल मनोरथ पूरण कीजै। निज पद भक्ति प्रेम रस दीजै॥

30

आरोग्य बल विद्या दीजै। दास जानि अपना करि लीजै॥

31

तुलसी चालीसा पाठ समाप्ता। सब विधि मंगल होय प्रभाता॥

32

जय जय जगदम्बा सुखकारी। जय तुलसी मंगलकारी॥

33

माता कृपा दृष्टि नित राखो। अमृत वचन सदा मुख भाखो॥

34

निश्चय मन जो ध्यान लगावै। तुलसी ताहि सदा सुख पावै॥

35

सदा रहो मम कंठ निवासा। पुरवहु मात हमारी आसा॥

36

विद्या बुद्धि विवेक प्रदाता। जय जय जय तुलसी माता॥

37

अन्न धन्य से घर भर जावै। जो जन तुलसी गुण गावै॥

38

सदा सुहागिन जग कल्याणी। जय तुलसी मातु वरदानी॥

39

तुलसी चरण में शीश झुकाऊं। जनम जनम प्रभु गुण मैं गाऊं॥

40

तुलसी माता कृपा करीजै। भक्ति मुक्ति सब हमहिं दीजै॥

॥ समापन दोहा ॥

तुलसी चालीसा जो पढ़ै, नित्य नेम चित लाय। पाप ताप दारिद्र मिटै, वैकुण्ठ बासा पाय॥

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Chanting Ritual & Procedure (पाठ विधि)

Offer pure water to the Tulsi plant in the morning and light a ghee lamp in the evening. Perform circumambulation (parikrama) and chant.

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Spiritual & Material Benefits (पाठ के लाभ)

Positive home vibrations, Vastu defect removal, wellness, and Lord Vishnu's grace.

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