जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥
आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जग पालन कर्त्री। दुःख शोक भय क्लेश कलह सब दारिद दैन्य हर्त्री॥ जयति जय...॥
ब्रह्म रूपिणी, प्रणव प्रणीती, जगत की जननी। ज्ञान तेज बल बुद्धि विधात्री, भव भय तम हरनी॥ जयति जय...॥
चार वेद की मात पुनीता, तुम ब्रह्माणी गोरी। ऋद्धि सिद्धि धन सुख की दाती, महा भवानि सुहोरी॥ जयति जय...॥
जो जन ध्यावे ध्यान तुम्हारा, पावे सो सुख ज्ञाना। पातक छूटहिं, ताप मिटहिं सब, मिटे सकल संताना॥ जयति जय...॥
आरती प्रेम सहित जो गावे, गायत्री सुख पावे। ज्ञान प्रकाश हृदय महं जागे, मोक्ष परम पद पावे॥ जयति जय...॥
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥