BHAKTI KI SHAKTI
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🌊 Lord Jhulelal (Uderolal)

Shri Jhulelal Chalisa

For prosperity, business growth, water blessings, and spiritual fortitude.

📅 Best Day: Cheti Chand, Friday 📜 40 Sacred Verses
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॥ दोहा ॥

जय जय जल देवता, जय ज्योति स्वरूप।

अमर उडेरो लाल जय, झूलेलाल अनूप॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

रतनलाल रतनाणी नंदन। जयति देवकी सुत जग वंदन॥

2

दरियाशाह वरुण अवतारी। जय जय लाल साईं सुखकारी॥

3

जय जय होय धर्म की भीरा। जिन्दा पीर हरे जन पीरा॥

4

सिंधु देश महं असुर सतायो। मिरखशाह जब जुल्म मचायो॥

5

सकल प्रजा मिलि वरुण ध्यायो। जल समाधि महं शीश नवायो॥

6

चालीस दिन जब कीन्ह तपासा। प्रगटे प्रभु पूरण की आशा॥

7

नसरपुर महं प्रगट भये हैं। झूलेलाल प्रभु नाम लहे हैं॥

8

बाल चरित देखि सब हरषाहीं। मिरखशाह मन संशय पाहीं॥

9

अश्व सवारी मत्सय अगाड़ी। लीला देखि दुष्ट मति हारी॥

10

सकल पंथ महं प्रेम बढ़ायो। हिंदू मुस्लिम एक बताया॥

11

ज्योति स्वरूप सदा घट वासा। पूरण करहु भक्त अभिलाषा॥

12

आयो लाल झूलेलाल पुकारे। संकट कष्ट विपद सब टारे॥

13

चेटी चंड पर्व जब आवे। बहिराणा साहिब सजवावे॥

14

अक्खा पल्लव पूजा ध्यावे। झूलेलाल कृपा नित पावे॥

15

व्यापार रोजगार बढ़ावे। जल यात्रा महं रक्षा पावे॥

16

सिंधी समाज के कुल उजियारे। सकल जगत के तारणहारे॥

17

दीन अनाथ जानि मोही तारो। भव सागर सों पार उतारो॥

18

जो जन पाठ करे चित लाई। ताके घर धन धान्य समाई॥

19

रोग दोष दारिद्र नशावे। घर आंगन में खुशियां छावे॥

20

सत्य शील गुण ज्ञान बढ़ावो। भक्ति भाव उर बीच जगावो॥

21

जय जय जल देवता भगवाना। हम मूरख तुम ज्ञान निधाना॥

22

चारों दिशा यश तुम्हरा छाया। अद्भुत है प्रभु तुम्हरी माया॥

23

प्रेम सहित जो पाठ सुनावे। झूलेलाल कृपा नित पावे॥

24

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावै। श्रद्धा सों जो शीश नवावै॥

25

पाप ताप संताप विनाशन। जय जय झूलेलाल सुभासन॥

26

अमर लाल सब संकट टारे। बिगड़े काज प्रभु संवारे॥

27

नित उठि चालीस दिन जो गावे। मनवांछित फल सो नर पावे॥

28

जल अग्नि भय पास न आवे। सो नर निर्भय जीवन पावे॥

29

सदा सहाय रहहु सुखदाता। झूलेलाल त्रिभुवन विख्याता॥

30

सेवक जानि दया प्रभु कीजै। चरणन की सेवा मुहि दीजै॥

31

जयति उडेरो लाल कृपाला। भक्तन के हितकारी लाला॥

32

पल्लव पाय के विनय सुनावें। मन की मुरादें पूरी पावें॥

33

सिंधु नदी का नीर पवित्र। गावत सुर नर मुनि सब मित्र॥

34

वरुण देव अवतारी स्वामी। घट-घट वासी अंतर्यामी॥

35

भूल चूक सब क्षमा करावो। सुखद शांति का मार्ग दिखावो॥

36

जो कोई झूलेलाल धियावे। जीवन में सब आनंद पावे॥

37

हाथ जोड़ि सब शीश झुकावें। जय झूलेलाल का नारा लगावें॥

38

चालीसा चालीस दिन पाठ करे जो कोय। पावे मनवांछित फल अरु जीवन सुखमय होय॥

39

सकल अमंगल मूल नसावन। झूलेलाल नाम अति पावन॥

40

जय जय जय झूलेलाल साईं। तुम बिन और न कोई सहाई॥

॥ समापन दोहा ॥

चालीसा चालीस दिन, पाठ करे जो कोय।

पावे मनवांछित फल अरु, जीवन सुखमय होय॥

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Chanting Ritual & Procedure (पाठ विधि)

Bathe and sit before a vessel of water with an illuminated lamp. Offer fresh flowers and prayers (Pallav), reciting with steady devotion.

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Spiritual & Material Benefits (पाठ के लाभ)

For prosperity, business growth, water blessings, and spiritual fortitude.

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