BHAKTI KI SHAKTI
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💰 Lord Kuber (Treasurer of Wealth)

Shri Kuber Chalisa

Treasury expansion, liquidation of debt, business prosperity, and hidden wealth.

📅 Best Day: Dhanteras, Thursday & Diwali 📜 40 Sacred Verses
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॥ दोहा ॥

जय जय कुबेर भण्डारी, धनपति यक्ष महान। शिव कृपा से तुम भए, धन के प्रभु बलवान॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय जय कुबेर यक्ष के राजा। सकल लोक में डंका बाजा॥

2

अलकापुरी है वास तुम्हारा। कनक महल छवि अति उजियारा॥

3

शिव के परम भक्त कहलाए। उत्तर दिशा के स्वामी आए॥

4

धन संपत्ति के तुम हो दाता। सब देवों के भाग्य विधाता॥

5

नवनिधि के तुम अधिपति स्वामी। जय जय जय त्रिभुवन सुखकामी॥

6

शंख पद्म निधि मकर सुहावै। कच्छप मुकुंद नील छवि पावै॥

7

कुंद खर्व निधि सब सुखकारी। कुबेर देव तव महिमा भारी॥

8

तिजोरी में जो नाम लगावै। ताके भंडार कभू न घट आवै॥

9

व्यापार में लाभ करावहु। घर में सुख शांति बसावहु॥

10

ऋण संकट से मोहि उबारो। बिगड़े काज हमारे संवारो॥

11

निर्धन को धनवान बनावहु। विपुल सम्पदा हिय में लावहु॥

12

धनतेरस को पूजन जो ठाने। कुबेर कृपा को सो पहिचाने॥

13

दीपावली पर दीप जलावै। कुबेर चालीसा जो नित गावै॥

14

चांदी स्वर्ण रत्न बहु पावै। अन्न धन्य सो सदन भरावै॥

15

दीन मलीन अनाथ सहारा। कुबेर देव तुम हो रखवारा॥

16

सदा रहौं मैं शरण तुम्हारी। रक्षा करहु हे नाथ बलिहारी॥

17

दुःख दरिद्र नहिं निकटै आवै। मंगल मोद प्रमोद बढावै॥

18

जो यह पाठ करै चालीसा। होय प्रसन्न यक्ष के ईशा॥

19

नित्त नेम करि पाठ सुनावै। सो नर मनवांछित फल पावै॥

20

अद्भुत महिमा प्रभु तिहारी। वंदन करत सकल संसारी॥

21

काम क्रोध मद लोभ नशावहु। सात्विक भाव हृदय उपजावहु॥

22

रोग कष्ट सब दूर भगावहु। आरोग्य बल विद्या दिलवावहु॥

23

संतान हीन को गोदी भरई। कुबेर कृपा ते सब दुख टरई॥

24

दीन दयाल सुनो विनती हमारी। संकट हरहु हमारे भारी॥

25

तुम बिन कोई नहिं रखवाला। सुन लीजै विनती कृपाला॥

26

जय कुबेर जय जय सुखदाता। भक्त जनों के भाग्य विधाता॥

27

शरण तुम्हारी आयो स्वामी। तुम हो घट घट अंतरयामी॥

28

आरती करौं तुम्हारी देवा। सदा करहु भक्तन की सेवा॥

29

प्रेम भक्ति रस अन्तर नाचे। कुबेर नाम जो सांचे बांचे॥

30

सकल मनोरथ पूरण कीजै। निज पद भक्ति प्रेम रस दीजै॥

31

आरोग्य बल विद्या दीजै। दास जानि अपना करि लीजै॥

32

कुबेर चालीसा पाठ समाप्ता। सब विधि मंगल होय प्रभाता॥

33

जय जय जय श्री कुबेर राऊ। राखहु लाज सुनो यक्षराऊ॥

34

माता कृपा दृष्टि नित राखो। अमृत वचन सदा मुख भाखो॥

35

निश्चय मन जो ध्यान लगावै। कुबेर ताहि सदा सुख पावै॥

36

सदा रहो मम कंठ निवासा। पुरवहु मात हमारी आसा॥

37

विद्या बुद्धि विवेक प्रदाता। जय जय जय कुबेर सुखदाता॥

38

अन्न धन्य से घर भर जावै। जो जन कुबेर गुण गावै॥

39

सदा सुहागिन जग कल्याणी। जय कुबेर देव वरदानी॥

40

कुबेर चरण में शीश झुकाऊं। जनम जनम प्रभु गुण मैं गाऊं॥

॥ समापन दोहा ॥

कुबेर चालीसा जो पढ़ै, उत्तर मुख कर ध्यान। तिजोरी भरे कुबेर प्रभु, धन धान्य दे मान॥

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Chanting Ritual & Procedure (पाठ विधि)

Sit facing North, light a ghee lamp before Kuber Yantra/idol, offer yellow flowers and coins, and recite with prayers for honest prosperity.

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Spiritual & Material Benefits (पाठ के लाभ)

Treasury expansion, liquidation of debt, business prosperity, and hidden wealth.

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