📿
भगवती महालक्ष्मी
सनत्कुमार संहिता
ऋषि: सनक
छंद: अनुष्टुप्
लक्ष्मी सहस्रनाम
Lakshmi Sahasranama
भगवती महालक्ष्मी के 1000 पावन नामों का यह दिव्य सहस्रनाम सनातन धर्म का अमूल्य रत्न है। अष्ट ऐश्वर्य, स्थिर लक्ष्मी, व्यापारिक वृद्धि व अखंड समृद्धि।
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॥ मूल सहस्रनाम पाठ व भावार्थ ॥
लक्ष्मी सहस्रनाम मूल श्लोक व भावार्थ
मङ्गलाचरणम् एवं ध्यानम्
सहस्रनाम श्लोक
ॐ अस्य श्रीमहालक्ष्मीसहस्रनामस्तोत्रमहामन्त्रस्य आनन्दकर्दमचिक्लीता ऋषयः । अनुष्टुप् छन्दः । श्रीमहालक्ष्मीर्देवता । श्रीं बीजम् । ह्रीं शक्तिः । क्लीं कीलकम् । श्रीमहाप्रसादावाप्तये जपे विनियोगः ॥
पद्मासनस्थितां देवीं पद्मकिञ्जल्कवासिनीम् ।
पद्महस्तां पद्मनेत्रां वन्दे पद्ममुखीं प्रियाम् ॥
Om asya śrīmahālakṣmīsahasranāmastotramahāmantrasya ānandakardamaciklītā ṛṣayaḥ | anuṣṭup chandaḥ | śrīmahālakṣmīrdevatā ||
सरल भावार्थ:
श्री महालक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्रम् (स्कन्द पुराण) (मङ्गलाचरणम् एवं ध्यानम्): पावन वेदोक्त व पौराणिक पाठ।
English Translation:
श्री महालक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्रम् (स्कन्द पुराण) (मङ्गलाचरणम् एवं ध्यानम्): Sacred recitation of thousand divine names.
श्लोक १ — १०
सहस्रनाम श्लोक
ॐ श्रीर्महाविद्या जगन्माता जगत्प्रिया । पद्मा पद्मावती पद्मनेत्रा पद्ममुखी परा ॥ १ ॥
पद्मासना पद्महस्ता पद्मोद्भासिता विमला । हरिप्रिया विष्णुवक्षःस्थलस्था सर्वमङ्गला ॥ २ ॥
कमला चञ्चला देवी कान्तिर्मेधा धृतिः स्मृतिः । पुष्टिस्तुष्टिः प्रभा दीप्तिः श्रद्धा कीर्तिर्वसुन्धरा ॥ ३ ॥
धनदा धनधान्यदा कामदा सर्वकामदा । राजलक्ष्मीर्गृहलक्ष्मीर्मोक्षलक्ष्मीर्जयप्रदा ॥ ४ ॥
ऐश्वर्यदात्री वरदा भक्तदारिद्र्यनाशिनी । अष्टलक्ष्मीस्वरूपा च वैष्णवी सर्वसुन्दरी ॥ ५ ॥
Om śrīrmahāvidyā jaganmātā jagatpriyā | padmā padmāvatī padmanetrā padmamukhī parā || 1 ||
सरल भावार्थ:
श्री महालक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्रम् (स्कन्द पुराण) (श्लोक १ — १०): पावन वेदोक्त व पौराणिक पाठ।
English Translation:
श्री महालक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्रम् (स्कन्द पुराण) (श्लोक १ — १०): Sacred recitation of thousand divine names.
फलश्रुतिः
सहस्रनाम श्लोक
यः पठेच्छृणुयान्नित्यं लक्ष्मीनामसहस्रकम् । तस्य गेहे स्थिरा लक्ष्मीर्वसेत् संवत्सरं परम् ॥
दारिद्र्यं नाशमायाति धनधान्यं प्रवर्धते । सुपुत्रो जायते वंशे विष्णोः सायुज्यमाप्नुयात् ॥
॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे सनत्कुमारसंहितायां श्रीमहालक्ष्मीसहस्रनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
Yaḥ paṭhecchṛṇuyānnityaṃ lakṣmīnāmasahasrakam | tasya gehe sthirā lakṣmīrvaset saṃvatsaraṃ param ||
सरल भावार्थ:
श्री महालक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्रम् (स्कन्द पुराण) (फलश्रुतिः): पावन वेदोक्त व पौराणिक पाठ।
English Translation:
श्री महालक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्रम् (स्कन्द पुराण) (फलश्रुतिः): Sacred recitation of thousand divine names.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय:
शुक्रवार, धनतेरस, दीपावली
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें तथा पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें।
- आसन पर बैठकर भगवती महालक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर संकल्प करें।
- लक्ष्मी सहस्रनाम का शांत एवं लयबद्ध स्वर में एक-एक नाम का चिंतन करते हुए पाठ करें।
- पाठ के समापन पर आरती करें और क्षमा प्रार्थना के साथ प्रसाद अर्पित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ:
- ✔ अष्ट ऐश्वर्य, स्थिर लक्ष्मी, व्यापारिक वृद्धि व अखंड समृद्धि।
- ✔ हजार नामों के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि-कंपन घर व अंतःकरण की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है।
- ✔ पारिवारिक कलह दूर होकर सुख, शांति, समृद्धि व स्वास्थ्य की वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लक्ष्मी सहस्रनाम का पाठ करने से क्या फल प्राप्त होता है?
लक्ष्मी सहस्रनाम का पाठ करने से अष्ट ऐश्वर्य, स्थिर लक्ष्मी, व्यापारिक वृद्धि व अखंड समृद्धि। तथा इष्ट देव की अहैतुकी कृपा से जीवन के समस्त पाप और विघ्न नष्ट होते हैं।
लक्ष्मी सहस्रनाम का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः शुक्रवार, धनतेरस, दीपावली के दिन प्रातःकाल स्नानादि के बाद, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शुद्ध घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
लक्ष्मी सहस्रनाम का मूल स्रोत क्या है?
इस पावन सहस्रनाम का प्रामाणिक स्रोत सनत्कुमार संहिता है। इसके ऋषि सनक एवं आराध्य भगवती महालक्ष्मी हैं।