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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ भगवती महादुर्गा / जगदंबा दुर्गा सप्तशती (पंचम अध्याय) ऋषि: मेधा ऋषि छंद: अनुष्टुप्

तंत्रोक्तदेवी सूक्तं

Tantroktadevi Suktam

समस्त प्राणियों में चेतना, बुद्धि, शक्ति और दया रूप में स्थित पराशक्ति भगवती दुर्गा की अप्रतिम स्तुति (या देवी सर्वभूतेषु...)।

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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

तंत्रोक्तदेवी सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः । नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम् ॥ १ ॥
Namo devyai mahādevyai śivāyai satataṃ namaḥ | Namaḥ prakṛtyai bhadrāyai niyatāḥ praṇatāḥ sma tām || 1 ||
सरल भावार्थ: देवी को नमस्कार है, महादेवी शिवा को निरंतर नमस्कार है। कल्याणकारी मूल प्रकृति को नमस्कार है; हम नियमपूर्वक उन्हें प्रणाम करते हैं।
English Translation: Salutations to the Divine Goddess, to the Great Mahadevi, to the Auspicious Shiva; salutations to the primal nature, the benevolent source of creation.
ऋचा 2 वेदमंत्र
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ २ ॥
Yā devī sarvabhūteṣu śaktirūpeṇa saṃsthitā | Namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ || 2 ||
सरल भावार्थ: जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारंबार नमस्कार है।
English Translation: To the Supreme Goddess who abides in all beings in the form of Power and Cosmic Energy; salutations to Her, salutations again and again.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: नवरात्रि, प्रत्येक शुक्रवार, अष्टमी एवं नवमी तिथि

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. मां दुर्गा के सम्मुख शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक जलाएं।
  2. लाल पुष्प, कुमकुम और हलवा-चना या बताशे का भोग लगाएं।
  3. श्रद्धापूर्वक 'या देवी सर्वभूतेषु' मंत्रों का सस्वर पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ भय, संताप, शत्रुबाधा और नकारात्मक ऊर्जा से तत्काल मुक्ति मिलती है।
  • ✔ साधक में असीम आत्मबल, ओज तथा देवी कृपा का वास होता है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तंत्रोक्तदेवी सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं का पाठ सामान्यतः नवरात्रि, प्रत्येक शुक्रवार, अष्टमी एवं नवमी तिथि के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं का पावन स्रोत दुर्गा सप्तशती (पंचम अध्याय) है। इसके ऋषि मेधा ऋषि तथा छंद अनुष्टुप् है।
तंत्रोक्तदेवी सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से भय, संताप, शत्रुबाधा और नकारात्मक ऊर्जा से तत्काल मुक्ति मिलती है। तथा साधक में असीम आत्मबल, ओज तथा देवी कृपा का वास होता है। होती है।

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