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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

श्री अंगरक स्तोत्र

श्री अंगरक स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
विनियोगः ॥ श्री ॥
विनियोग – अस्य अंगारकस्तोत्रस्य विरूपांगिरस ऋषि: । अग्निर्देवता । गायत्री छन्द: । भौम प्रीत्यर्थे जपे विनियोग: । ।। अंगारक स्तोत्रम् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री अंगरक स्तोत्र (श्लोक विनियोगः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
अंगारक: शक्तिधरो लोहितांगो धरासुत: । कुमारो मंगलौ भौमो महाकायो धनप्रद: ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री अंगरक स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृद्रोगनाशन: । विद्युतप्रभो व्रणकर: कामदो धनहृत् कुज: ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री अंगरक स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
सामगानप्रियो रक्त वस्त्रो रक्तायतेक्षण: । लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्मावबोधक: ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री अंगरक स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
रक्तमाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायक: । नामान्येतानि भौमस्य य: पठेत्सततं नर: ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री अंगरक स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
ऋणं तस्य च दौर्भाग्यं दारिद्रस्यं च विनश्यति । धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम् ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री अंगरक स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
वंशोद्योतकरं पुत्रं लभते नात्र संशय: । योsर्चयेदह्नि भौमस्य मंगलं बहुपुष्पकै: ।। 6 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री अंगरक स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
सर्वा नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम् ।। 7 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री अंगरक स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
।। इति श्री अंगारक स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री अंगरक स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री अंगरक स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।