BHAKTI KI SHAKTI
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🐘 भगवान श्री गणेश

श्री गणेश चालीसा

विघ्न निवारण, बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि व नए कार्यों में विजय

📅 शुभ दिन: बुधवार एवं संकष्टी चतुर्थी 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥

2

जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥

3

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

4

राजित मणिरत्नन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

5

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

6

सुन्दर पीताम्बर तन साजे। चरण पादुका मुनि मन राजे॥

7

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व विख्याता॥

8

ऋद्धि सिद्धि तव चंवर सुधारे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥

9

कहौं जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति विचित्र अति पावनकारी॥

10

एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥

11

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुँच्यो तुम धरि शिशु रूपा॥

12

लखि शिशु रूप सकल हरषाने। देवन के सब बाजे बाजे॥

13

शनि जब दीन्हो दृष्टि पसारी। धड़ तें शीश गयो तब न्यारी॥

14

हाहाकार मच्यो कैलाशा। गिरिजा सुधि बुधि भई विनाशा॥

15

गरुड़ चढ़े वैकुंठ सिधारे। गज शिर काटि तुरत लै आए॥

16

धड़ ऊपर शिर जोड़ी मिलायो। प्राण वायु सुत माहिं चलायो॥

17

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हा। प्रथम पूज्य वर तुमको दीन्हा॥

18

बुद्धि परीक्षा जब शिव लीन्हा। पृथ्वी परिक्रमा कहि दीन्हा॥

19

चले षडानन भरमि भुलाना। रचेउ युक्ति तुम बुद्धि निधाना॥

20

मात-पिता पद पंकज ध्याई। सात प्रदक्षिण कीन्ह सुहाई॥

21

प्रथम पूज्य पद पायो भारी। कीन्हि प्रशंसा सब सुर-नारी॥

22

अंधक वध भयो सुरन सहाई। तारक वध में प्रभु प्रभुताई॥

23

जबहिं विपत्ति प्रभु पर आई। तबहिं सहाय भये सुखदाई॥

24

दुष्ट दलन सब संकट हरण। शरणागत के पावन शरण॥

25

ऋद्धि सिद्धि तव अंग बिराजैं। शुभ और लाभ दुहुँ दिशि छाजैं॥

26

जो जन तुमको निसदिन ध्यावै। सो मनवांछित फल बहु पावै॥

27

विद्या बुद्धि विद्यापति दीजै। जनम जनम के पाप हरीजै॥

28

व्यापारिक बाधा सब टारो। धन धान्य सो सदन संवारो॥

29

पुत्र पौत्र सुख सम्पति पावै। जो जन तुमको ध्यान लगावै॥

30

अचल अगाध कृपा तव भारी। दीन दयाल सुनो विनती हमारी॥

31

विघ्नराज तुम विघ्न विनाशी। सकल मनोरथ पूरण राशी॥

32

करहु कृपा मोहि निज कर जानो। संकट मोचन नाम बखानो॥

33

तुमरे भजन करत जो कोई। ताके विघ्न सकल दुख खोई॥

34

अल्प बुद्धि अति ही अज्ञानी। दास जानि दीजै वरदानी॥

35

मोदक प्रिय मुद मंगल दाता। विद्या वारिधि बुद्धि विधाता॥

36

मांगहुँ वर यह देहु दयाला। सदा करहु भक्तन प्रतिपाला॥

37

प्रेम सहित जो पाठ सुनावै। सो भव सागर पार लगावै॥

38

संतत संपति सुयश बढावै। सकल मनोरथ सिद्ध करावै॥

39

निश्चय मन जो ध्यान लगावै। विनायक ताहि सदा सुख पावै॥

40

गणपति की सेवा मंगलकारी। जय जय जय विघ्नेश्वर बलिहारी॥

॥ समापन दोहा ॥

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै जो कोय। संवत साठ सहस्र लौं, विघ्न न व्यापै कोय॥

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Vedic Exposition & Meaning · स्तोत्र भावार्थ व संपूर्ण सारांश

The Auspicious Blessings of Shri Ganesh Chalisa

Dedicated to Lord Ganesha, the First-Worshiped Deity (Prathama Pujya) and the divine master of wisdom, intellect (Buddhi), and prosperity (Riddhi-Siddhi). The 40 couplets invoke Ganesha to eliminate all stumbling blocks from one's path.

✨ Thematic Verse Journey & Spiritual Essence

✦ Divine Birth & Iconography

Celebrates the beloved son of Mother Parvati and Lord Shiva, bearing the single tusk (Ekadanta), large ears receptive to all prayers, and riding the mouse signifying mastery over wandering desires.

✦ Vighnaharta (Remover of Obstacles)

Ganesha is invoked at the onset of every sacred venture, business opening, wedding, and study. No undertaking encounters hurdles when blessed by his divine Modak and axe.

✦ Giver of Intellect & Learning

He who inscribed the great Mahabharata with his own broken tusk inspires clear thinking, artistic eloquence, and scholastic distinction.

🌟 Daily Chanting Fruits & Spiritual Benefits (फलश्रुति)

Ideal for chanting every Wednesday and on Chaturthi. It brings sharp memory, success in examinations, flourishing trade, and fills the home with harmony and joy.

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

बुधवार या चतुर्थी के दिन गणेश जी को दूर्वा (21 गांठे), लाल सिंदूर, मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। घी का दीपक जलाकर गणेश चालीसा का पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

किसी भी नए कार्य, व्यापार या गृह प्रवेश में सफलता, बच्चों की एकाग्रता व पढ़ाई में उत्तम परिणाम, और सभी विघ्नों का समूल नाश।

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