BHAKTI KI SHAKTI
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🐘 भगवान श्री गणेश ⏰ प्रातः व सांध्य वंदना, बुधवार, संकष्टी व विनायक चतुर्थी

श्री गणेश जी की आरती

सभी विघ्न-बाधाओं के नाश, बुद्धि, ज्ञान, रिद्धि-सिद्धि और नए कार्यों के शुभारंभ के लिए।

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॥ मुख्य टेक / मुखड़ा ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

॥ संपूर्ण आरती कड़ियां ॥
1

एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी। मस्तक पर सिन्दूर सोहे मूसे की सवारी॥

2

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे सन्त करे सेवा॥

3

अन्धे को आँख देत कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥

4

सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

5

दीनन की लाज राखो शम्भु सुत वारी। कामना को पूर्ण करो जग बलिहारी॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

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आरती करने की शास्त्रोक्त विधि

आरती की थाली में कुमकुम, अक्षत, दूर्वा, मोदक और शुद्ध घी या कपूर का दीपक रखें। तीन बार ओम बोलते हुए आरती को दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

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आरती के चमत्कारी लाभ

सभी कार्यों में आने वाले विघ्न दूर होते हैं। बुद्धि, ज्ञान और एकाग्रता में वृद्धि होती है। घर में सुख, शांति और रिद्धि-सिद्धि का आगमन होता है।

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