BHAKTI KI SHAKTI
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🦁 माँ दुर्गा (आदिशक्ति भगवती)

श्री दुर्गा चालीसा

शत्रु दमन, संकट निवारण, शक्ति संचय व सर्व मनोकामना पूर्ति

📅 शुभ दिन: शुक्रवार, मंगलवार एवं नवरात्रि 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥

2

शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटी विकराला॥

3

रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥

4

तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥

5

अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

6

प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

7

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

8

रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥

9

धर्यो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥

10

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो॥

11

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥

12

क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

13

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥

14

मातंगी धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुखदाता॥

15

श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्नभाल भव दुःख निवारिणी॥

16

केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥

17

कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥

18

सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

19

नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुँलोक में डंका बाजत॥

20

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥

21

महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

22

रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

23

परी गाढ़ संतन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥

24

अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहे अशोका॥

25

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥

26

प्रेम भक्ति से जो यश गावै। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवै॥

27

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जनम-मरण ताकौ छुटि जाई॥

28

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

29

शंकर आचारज तप कीन्हो। काम क्रोध जीति सब लीन्हो॥

30

निसिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहू काल न सुमिरो तुमको॥

31

शक्ति रूप को मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥

32

शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

33

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥

34

मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो॥

35

आशा तृष्णा निपट सतावैं। रिपु मूरख मोहि अति डरपावैं॥

36

शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

37

करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला॥

38

जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ॥

39

दुर्गा चालीसा जो नित गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥

40

देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

॥ समापन दोहा ॥

शरणागत रक्षा करे, संकट हरे हमार। जय दुर्गे जय भवानी, जय जय जगदाधार॥

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

लाल आसन पर बैठकर घी का दीपक प्रज्वलित करें। माँ दुर्गा को लाल पुष्प, रोली व बताशे अर्पित करें। कपूर आरती के साथ चालीसा का पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

शत्रुओं और नकारात्मक तंत्र-बाधा का विनाश, कोर्ट-कचहरी में विजय, असाध्य विपत्तियों से रक्षा और पारिवारिक सुख-समृद्धि।

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