गोवर्धन पूजा / अन्नकूट महोत्सव
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का महापर्व मनाया जाता है। यह प्रकृति, पर्यावरण, गौवंश और पर्वत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अनूठा उत्सव है। द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के अहंकार को चूर करने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को 7 दिनों तक उठाए रखा था। इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर उनकी पूजा और 56 भोग (अन्नकूट) अर्पित किए जाते हैं।
इस साल का शुभ मुहूर्त एवं समय (2026)
वैदिक सूर्य सिद्धांत व पंचांग गणना अनुसार प्रमाणित
प्रातःकाल: 06:41 - 08:52 | सायंकाल: 03:22 - 05:32
अति शुभ व श्रेष्ठ समयतिथि विवरण: 09 नवंबर 2026, प्रातः 10:35 बजे से • समाप्ति: 10 नवंबर 2026, प्रातः 08:15 बजे तक
अमृत: प्रातः 06:41 - 08:03 | शुभ: प्रातः 09:25 - 10:47
कब-कब क्या करना है? संपूर्ण समय-सारणी व पूजा विधि
प्रातः काल स्नान से लेकर मुख्य पूजा, दीप प्रज्वलन व रात्रि अनुष्ठान तक की सटीक समय सारणी
गोवर्धन निर्माण व गौ सेवा
प्रातः 06:41 - 08:52 AMआंगन में गाय के गोबर से गिरिराज जी की आकृति बनाएं। नाभि पर दीपक जलाएं और गौमाता की आरती कर उन्हें गुड़-रोटी खिलाएं।
अन्नकूट महाप्रसाद निर्माण
दोपहर 11:30 - 02:00 PMकढ़ी, बाजरे की खिचड़ी, पूड़ी, और अनेक मौसमी सब्जियों का मिश्रण बनाकर अन्नकूट तैयार करें।
गिरिराज पूजन व परिक्रमा
शाम 03:22 - 05:32 PMगोवर्धन जी को दूध, खील, बताशे, अन्नकूट और फूल अर्पित करें। परिवार सहित सात बार गोवर्धन आकृति की परिक्रमा करें।
यह पर्व या व्रत क्यों मनाया जाता है?
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का महापर्व मनाया जाता है। यह प्रकृति, पर्यावरण, गौवंश और पर्वत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अनूठा उत्सव है। द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के अहंकार को चूर करने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को 7 दिनों तक उठाए रखा था। इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर उनकी पूजा और 56 भोग (अन्नकूट) अर्पित किए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं
इस दिन गायों और बैलों को नहलाकर, उनके सींगों पर तेल व सिंदूर लगाकर उनकी पूजा की जाती है। विभिन्न प्रकार के अनाजों, कढ़ी, बाजरा और मौसमी सब्जियों को मिलाकर "अन्नकूट" का महाप्रसाद बनाया जाता है। गोवर्धन परिक्रमा करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा एवं प्रसंग
पुराणों व सनातन धर्मग्रंथों में वर्णित प्रामाणिक कथा
श्रीमद्भागवत के अनुसार, ब्रजवासी प्रतिवर्ष देवराज इंद्र को प्रसन्न करने के लिए विशाल यज्ञ करते थे। बालक कृष्ण ने नंदबाबा और गोपों से पूछा कि जो वर्षा प्रकृति का नियम है, उसके लिए इंद्र की पूजा क्यों? हमें तो प्रत्यक्ष फल देने वाले गोवर्धन पर्वत और गौमाता की पूजा करनी चाहिए। ब्रजवासियों ने इंद्र का यज्ञ बंद कर गोवर्धन की पूजा की।
क्रोधित होकर इंद्र ने ब्रजमंडल पर प्रलयंकारी मूसलाधार वर्षा और वज्रपात शुरू कर दिया। तब श्री कृष्ण ने सात वर्ष की आयु में खेल-खेल में गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लिया। समस्त गोप, ग्वाल और गायें पर्वत के नीचे सुरक्षित आ गए। इंद्र का सारा घमंड टूट गया और उन्होंने सुरभि गाय के साथ आकर प्रभु के चरणों में क्षमा याचना की।
कहाँ-कहाँ देश व विदेश में कैसे मनाया जाता है?
भारत के विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय परंपराएं एवं विदेशों में भारतीय समुदाय का उत्सव
मथुरा, वृंदावन व गोवर्धन (ब्रज क्षेत्र) में लाखों भक्त 21 किलोमीटर की दंडवती परिक्रमा करते हैं। गुजरात में बेस्टु वरस (नया साल), पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश में अन्नकूट का भव्य भंडारा होता है।
यूके के भक्तिवेदांत मनोर, अमेरिका के राधा कृष्ण मंदिरों और मॉरीशस में विशालकाय अन्नकूट पहाड़ बनाकर 108+ व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
पूजा सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
पूजा की तैयारी करते समय वस्तुओं पर टिक करें
विशेष मंत्र, स्तोत्र व जप
पूजा व व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें
- ✓ गोमाता की सेवा व पूजन अवश्य करें
- ✓ अन्नकूट प्रसाद सभी में बांटें
- ✓ गोवर्धन जी की परिक्रमा करें
- ✗ गोबर से बने गोवर्धन जी पर पैर न लगने दें
- ✗ इस दिन किसी पशु को कष्ट न दें
गोवर्धन पूजा / अन्नकूट महोत्सव की आगामी तिथियां (2026 से 2030)
भक्तों व परिवारों की अग्रिम योजना हेतु 5-वर्षीय पंचांग सारणी
| वर्ष | दिनांक (Date) | वार (Day) | तिथि | पंचांग |
|---|---|---|---|---|
| 2026 | 09 November 2026 | सोमवार | कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष प्रतिपदा | पंचांग |
| 2027 | 30 October 2027 | शनिवार | कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष प्रतिपदा | पंचांग |
| 2028 | 18 October 2028 | बुधवार | कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष प्रतिपदा | पंचांग |
| 2029 | 06 November 2029 | मंगलवार | कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष प्रतिपदा | पंचांग |
| 2030 | 27 October 2030 | रविवार | कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष प्रतिपदा | पंचांग |
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