महाशिवरात्रि (शिव-पार्वती विवाह व ज्योतिर्लिंग प्राकट्य)
महाशिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का महापर्व है। इसी रात्रि को भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ विवाह किया था। इसी पावन तिथि की महानिशीथ बेला में निराकार परब्रह्म शिव करोड़ों सूर्यों के समान ज्योतिर्मय लिंग (अग्नि स्तंभ) के रूप में प्रकट हुए थे। इस दिन शिवभक्त उपवास रखते हैं, चार पहर की पूजा करते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र व धतूरा अर्पित कर मोक्ष की कामना करते हैं।
इस साल का शुभ मुहूर्त एवं समय (2026)
वैदिक सूर्य सिद्धांत व पंचांग गणना अनुसार प्रमाणित
चार पहर पूजा (शाम 06:15 से अगली सुबह 06:55 तक)
अति शुभ व श्रेष्ठ समयरात 12:09 से मध्यरात्रि 01:01 तक (ज्योतिर्लिंग प्राकट्य मुहूर्त)
श्री सूक्त पाठ व मंत्र साधनातिथि विवरण: 15 फरवरी 2026, शाम 04:30 बजे से • समाप्ति: 16 फरवरी 2026, शाम 03:05 बजे तक
कब-कब क्या करना है? संपूर्ण समय-सारणी व पूजा विधि
प्रातः काल स्नान से लेकर मुख्य पूजा, दीप प्रज्वलन व रात्रि अनुष्ठान तक की सटीक समय सारणी
प्रातः स्नान व रुद्राभिषेक
प्रातः 05:00 - 07:00 AMब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर शिवलिंग का गंगाजल, गाय के कच्चे दूध, दही, शहद, घी व शर्करा (पंचामृत) से अभिषेक करें।
प्रथम पहर पूजा (दुग्धाभिषेक)
शाम 06:15 - 09:30 PMईशान कोण में जल व दूध से अभिषेक करें। अक्षत, भस्म और बेलपत्र अर्पित करें।
द्वितीय पहर पूजा (दध्याभिषेक)
रात 09:30 - 12:45 AMदही से अभिषेक करें और "ॐ नमः शिवाय" का जप करें।
निशीथ काल - ज्योतिर्लिंग ध्यान
रात 12:09 - 01:01 AMघी और शहद से अभिषेक। महामृत्युंजय मंत्र और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
चतुर्थ पहर पूजा व आरती
रात 03:45 - 06:55 AMगन्ने के रस व जल से अभिषेक। आरती करें और अगले दिन प्रातः पारण करें।
यह पर्व या व्रत क्यों मनाया जाता है?
महाशिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का महापर्व है। इसी रात्रि को भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ विवाह किया था। इसी पावन तिथि की महानिशीथ बेला में निराकार परब्रह्म शिव करोड़ों सूर्यों के समान ज्योतिर्मय लिंग (अग्नि स्तंभ) के रूप में प्रकट हुए थे। इस दिन शिवभक्त उपवास रखते हैं, चार पहर की पूजा करते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र व धतूरा अर्पित कर मोक्ष की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं
शिवपुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात जो भक्त बिना सोए चार पहर रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जप करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप भस्म हो जाते हैं। समुद्र मंथन से निकले कालकूट हलाहल विष को भगवान शिव ने इसी दिन अपने कंठ में धारण किया था, जिससे उनका नाम नीलकंठ पड़ा।
संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा एवं प्रसंग
पुराणों व सनातन धर्मग्रंथों में वर्णित प्रामाणिक कथा
शिवपुराण की प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक क्रूर निषाद (शिकारी) जंगल में शिकार न मिलने पर रात को बेलपत्र के वृक्ष पर चढ़कर बैठ गया। नीचे एक शिवलिंग स्थापित था। ठंड और भूख से कांपते हुए अनजाने में उसके हाथों से बेलपत्र टूटकर शिवलिंग पर गिरते रहे और लोटे से जल टपकता रहा। रात्रि के प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ पहर में एक-एक मृग परिवार (हिरण, हिरणी व बच्चे) आए।
शिकारी ने उन्हें मारना चाहा, किंतु मृगों ने अपने परिवार से मिलकर वापस आने का वचन दिया। मृगों की सत्यवादिता और शिवलिंग पर अनजाने में हुए चार पहर के अभिषेक से शिकारी का हृदय निर्मल हो गया। जब मृग परिवार लौटा, तो शिकारी ने धनुष फेंक दिया। उसी क्षण भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने शिकारी को गुह नाम देकर मोक्ष प्रदान किया।
कहाँ-कहाँ देश व विदेश में कैसे मनाया जाता है?
भारत के विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय परंपराएं एवं विदेशों में भारतीय समुदाय का उत्सव
12 ज्योतिर्लिंगों (सोमनाथ, महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ आदि) में लाखों भक्त उमड़ते हैं। उज्जैन में शिव नवरात्रि का उत्सव, वाराणसी में भव्य शिव बारात और हरिद्वार में गंगाजल अभिषेक होता है।
नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में विश्वभर से 10 लाख से अधिक साधु व श्रद्धालु जुटते हैं। मॉरीशस में "गंगा तालाब" की पदयात्रा, त्रिनिदाद, यूके और अमेरिका में भव्य रुद्र-यज्ञ होते हैं।
पूजा सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
पूजा की तैयारी करते समय वस्तुओं पर टिक करें
विशेष मंत्र, स्तोत्र व जप
पूजा व व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें
- ✓ शिवलिंग पर केवल अखंडित बेलपत्र चढ़ाएं (चिकना भाग शिवलिंग की ओर हो)
- ✓ चारों पहर जागरण करें
- ✓ सात्विक फलाहार करें
- ✗ शिवलिंग पर तुलसी, केतकी का फूल या कुमकुम/सिंदूर न चढ़ाएं
- ✗ शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा न करें (सोमसूत्र को न लांघें)
महाशिवरात्रि (शिव-पार्वती विवाह व ज्योतिर्लिंग प्राकट्य) की आगामी तिथियां (2026 से 2030)
भक्तों व परिवारों की अग्रिम योजना हेतु 5-वर्षीय पंचांग सारणी
| वर्ष | दिनांक (Date) | वार (Day) | तिथि | पंचांग |
|---|---|---|---|---|
| 2026 | 15 February 2026 | रविवार | फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष चतुर्दशी | पंचांग |
| 2027 | 06 March 2027 | शनिवार | फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष चतुर्दशी | पंचांग |
| 2028 | 23 February 2028 | बुधवार | फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष चतुर्दशी | पंचांग |
| 2029 | 12 February 2029 | सोमवार | फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष चतुर्दशी | पंचांग |
| 2030 | 03 March 2030 | रविवार | फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष चतुर्दशी | पंचांग |
🪔 अन्य प्रमुख हिंदू व्रत एवं त्योहार
किसी भी पर्व पर क्लिक करके उसकी विस्तृत कथा, मुहूर्त व समय-सारणी जानें