होली (होलिका दहन व रंगोत्सव / धुलेंडी)
होली सनातन धर्म का उल्लास, सामाजिक समरसता और प्रेम का रंगबिरंगा वसंतोत्सव है। यह बुराई, अहंकार और अधर्म पर भक्ति, सत्य और धर्म की विजय का पर्व है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन में अहंकार और नकारात्मकता की आहुति दी जाती है, और अगले दिन चैत्र प्रतिपदा को रंग-गुलाल से एक-दूसरे को रंगकर सारे गिले-शिकवे मिटाए जाते हैं। ब्रज में इसे राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम के रूप में मनाया जाता है।
इस साल का शुभ मुहूर्त एवं समय (2026)
वैदिक सूर्य सिद्धांत व पंचांग गणना अनुसार प्रमाणित
तिथि विवरण: होलिका दहन: 03 मार्च 2026 | रंगोत्सव (धुलेंडी): 04 मार्च 2026
कब-कब क्या करना है? संपूर्ण समय-सारणी व पूजा विधि
प्रातः काल स्नान से लेकर मुख्य पूजा, दीप प्रज्वलन व रात्रि अनुष्ठान तक की सटीक समय सारणी
होलिका निर्माण व पूजन
फाल्गुन पूर्णिमा दोपहरसूखी लकड़ी, गोबर के उपले (बड़कूले) से होलिका सजाएं। रोली, पुष्प, कच्चा सूत लपेटकर सात बार परिक्रमा करें।
शुभ मुहूर्त में होलिका दहन
शाम 06:22 - 08:50 PMभद्रा समाप्त होने पर होलिका प्रज्वलित करें। नई फसल (गेहूं की बाली) भूनें और नारियल अर्पित करें।
होलिका भस्म तिलक व पूजा
अगले दिन प्रातः 07:00 AMहोलिका की पवित्र राख को माथे पर लगाएं। भगवान श्री कृष्ण व राधा रानी को गुलाल अर्पित करें।
रंगोत्सव, गुलाल व मिलन
पूर्वाह्न 09:00 - दोपहर 02:00 PMपारिवारिक जनों व मित्रों के साथ प्राकृतिक अबीर-गुलाल खेलें। गुजिया, ठंडाई और मठरी का आनंद लें।
यह पर्व या व्रत क्यों मनाया जाता है?
होली सनातन धर्म का उल्लास, सामाजिक समरसता और प्रेम का रंगबिरंगा वसंतोत्सव है। यह बुराई, अहंकार और अधर्म पर भक्ति, सत्य और धर्म की विजय का पर्व है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन में अहंकार और नकारात्मकता की आहुति दी जाती है, और अगले दिन चैत्र प्रतिपदा को रंग-गुलाल से एक-दूसरे को रंगकर सारे गिले-शिकवे मिटाए जाते हैं। ब्रज में इसे राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम के रूप में मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं
होलिका दहन की अग्नि में नई फसल की बालियां (गेहूं, चना) भूनकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से आरोग्य लाभ होता है। होलिका की पवित्र भस्म को घर लाने से बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। ब्रज में लट्ठमार होली, फूलों की होली और लड्डू होली की वैश्विक ख्याति है।
संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा एवं प्रसंग
पुराणों व सनातन धर्मग्रंथों में वर्णित प्रामाणिक कथा
असुरराज हिरण्यकशिपु स्वयं को ईश्वर मानता था और अपनी प्रजा को भगवान विष्णु की पूजा करने से रोकता था। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान नारायण का अनन्य भक्त निकला। हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मारने के अनेक प्रयास किए — पहाड़ से गिराया, विष दिया, हाथियों से कुचलवाया, किंतु प्रभु कृपा से प्रह्लाद का बाल भी बांका न हुआ।
अंत में हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर धधकती चिता में बैठ गई। भगवान नारायण के स्मरण से वरदान का उल्टा प्रभाव हुआ — होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सकुशल बाहर निकल आए। उसी दिन से होलिका दहन की परंपरा चली आ रही है।
कहाँ-कहाँ देश व विदेश में कैसे मनाया जाता है?
भारत के विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय परंपराएं एवं विदेशों में भारतीय समुदाय का उत्सव
बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली, मथुरा-वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर, काशी का मणिकर्णिका भस्म उत्सव, पंजाब का होला मोहल्ला और बंगाल का दोल जात्रा विशेष प्रसिद्ध हैं।
नेपाल में फागु पूर्णिमा, यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया और स्पेन के विश्वविद्यालयों में "फेस्टिवल ऑफ कलर्स" के नाम से लाखों लोग उत्साहपूर्वक मनाते हैं।
पूजा सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
पूजा की तैयारी करते समय वस्तुओं पर टिक करें
विशेष मंत्र, स्तोत्र व जप
पूजा व व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें
- ✓ भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करें
- ✓ होलिका की भस्म को घर लाएं
- ✓ प्राकृतिक हर्बल रंगों का प्रयोग करें
- ✗ नवजात शिशु व गर्भवती स्त्रियां होलिका दहन के अति निकट न जाएं
- ✗ रासायनिक व पक्के पेंट वाले हानिकारक रंगों का प्रयोग न करें
होली (होलिका दहन व रंगोत्सव / धुलेंडी) की आगामी तिथियां (2026 से 2030)
भक्तों व परिवारों की अग्रिम योजना हेतु 5-वर्षीय पंचांग सारणी
| वर्ष | दिनांक (Date) | वार (Day) | तिथि | पंचांग |
|---|---|---|---|---|
| 2026 | 03 March 2026 | मंगलवार (होलिका दहन) | फाल्गुन पूर्णिमा (दहन) व चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (रंग) | पंचांग |
| 2027 | 21 March 2027 | रविवार (दहन) | फाल्गुन पूर्णिमा (दहन) व चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (रंग) | पंचांग |
| 2028 | 11 March 2028 | शनिवार (दहन) | फाल्गुन पूर्णिमा (दहन) व चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (रंग) | पंचांग |
| 2029 | 28 February 2029 | बुधवार (दहन) | फाल्गुन पूर्णिमा (दहन) व चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (रंग) | पंचांग |
| 2030 | 19 March 2030 | मंगलवार (दहन) | फाल्गुन पूर्णिमा (दहन) व चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (रंग) | पंचांग |
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