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Lord Rudra / Shiva
Yajurveda (Namakam / Chapter 16)
Rishi: Parameshti
Chhandas: Trishtubh / Jagati
Rudra Suktam
रूद्र सूक्तं
The celebrated Vedic Namaka hymn venerating Lord Rudra's cosmic omnipresence and benevolent grace.
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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
Rudra Suktam Verses & Meaning
ऋचा 1
Vedic Verse
Rudra
Suktam
ॐ नमस्ते रुद्र मन्यव उतो त इषवे नमः ।
बाहुभ्यामुत ते नमः ॥१॥
Hindi Meaning:
दु:ख दूर करने वाले (अथवा ज्ञान प्रदान करने वाले) हे रुद्र! आपके क्रोध के लिये नमस्कार है, आपके बाणों के लिये नमस्कार है और आपकी दोनों भुजाओं के लिये नमस्कार है॥१॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2
Vedic Verse
या ते रुद्र शिवा तनूरघोराऽपापकाशिनी ।
तया नस्तन्वा शन्तमया गिरिशन्ताभि चाकशीहि ॥२॥
Hindi Meaning:
हे गिरिशन्त (कैलास पर रहकर संसार का कल्याण करने वाले अथवा वाणी में स्थित होकर लोगों को सुख देने वाले या मेघ में स्थित होकर वृष्टि के द्वारा लोगों को सुख देने वाले)! हे रुद्र! आपका जो मंगलदायक, सौम्य, केवल पुण्य प्रकाशक शरीर है, उस अनन्त सुखकारक शरीर से हमारी ओर देखिये अर्थात् हमारी रक्षा कीजिये॥२॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3
Vedic Verse
यामिषुं गिरिशन्त हस्ते बिभर्यस्तवे ।
शिवां गिरित्र तां कुरु मा हि सी: पुरुषं जगत् ॥३॥
Hindi Meaning:
कैलास पर रहकर संसार का कल्याण करने वाले तथा मेघों में स्थित होकर वृष्टि के द्वारा जगत की रक्षा करने वाले हे सर्वज्ञ रुद्र ! शत्रुओं का नाश करने के लिये जिस बाण को आप अपने हाथ में धारण करते हैं, वह कल्याणकारक हो और आप मेरे पुत्र-पौत्र तथा गौ, अश्व आदि का नाश मत कीजिये॥३॥- रूद्र सूक्तं
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4
Vedic Verse
शिवेन वचसा त्वा गिरिशाच्छा वदामसि ।
यथा नः सर्वमिज्जगदयक्ष्म सुमना असत् ॥४॥
Hindi Meaning:
हे कैलास पर शयन करने वाले! आपको प्राप्त करने के लिये हम मंगलमय वचन से आपकी स्तुति करते हैं। जिस प्रकार हमारा समस्त संसार ताप रहित, निरोग और निर्मल मन वाला बने, वैसा आप करें ।।४।।
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5
Vedic Verse
अध्यवोचदधिवक्ता प्रथमो दैव्यो भिषक् ।
अर्हीश्च सर्वाञ्जम्भयन्त्सर्वाश्च यातुधान्योऽधराचीः परा सुव ॥५॥
Hindi Meaning:
अत्यधिक वन्दनशील, समस्त देवताओं में मुख्य, देवगणों के हितकारी तथा रोगों का नाश करने वाले रुद्र मुझसे सबसे अधिक बोलें, जिससे मैं सर्वश्रेष्ठ हो जाऊँ। हे रुद्र! समस्त सर्प, व्याघ्र आदि हिंसकों का नाश करते हुए आप अधोगमन कराने वाली राक्षसियों को हमसे दूर कर दें॥५॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6
Vedic Verse
असौ यस्ताम्रो अरुण उत बभ्रुः सुमङ्गलः ।
ये चैन रुद्रा अभितो दिक्षु श्रिताः सहस्रशोऽवैषा हेड ईमहे ॥६॥
Hindi Meaning:
उदय के समय ताम्रवर्ण (अत्यन्त रक्त), अस्तकाल में अरुण वर्ण (रक्त), अन्य समय में वधु (पिंगल) वर्ण तथा शुभ मंगलों वाला जो यह सूर्यरूप है, वह रुद्र ही है। किरण रूप में ये जो हजारों रुद्र इन आदित्य के सभी ओर स्थित हैं, इनके क्रोध का हम अपनी भक्ति मय उपासना से निवारण करते हैं ॥६॥- रूद्र सूक्तं
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7
Vedic Verse
असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः ।
उतैनं गोपा अदृश्रन्नदृश्रन्नुदहार्यः स दृष्टो मृडयाति नः ॥७॥
Hindi Meaning:
जिन्हें अज्ञानी गोप तथा जल भरने वाली दासियाँ भी प्रत्यक्ष देख सकती हैं, विष धारण करने से जिनका कण्ठ नील वर्ण का हो गया है, तथापि विशेषतः रक्तवर्ण होकर जो सर्वदा उदय और अस्त को प्राप्त होकर गमन करते हैं, वे रवि मण्डल स्थित रुद्र हमें सुखी कर दें॥७॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 8
Vedic Verse
नमोऽस्तु नीलग्रीवाय सहस्राक्षाय मीढुषे ।
अथो ये अस्य सत्वानोऽहं तेभ्योऽकरं नमः ॥८॥
Hindi Meaning:
नीलकण्ठ, सहस्र नेत्र वाले, इन्द्र स्वरूप और वृष्टि करने वाले रुद्र के लिये मेरा नमस्कार है। उस रुद्रके जो अनुचर हैं, उनके लिये भी मैं नमस्कार करता हूँ॥८॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 8): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 9
Vedic Verse
प्रमुञ्च धन्वनस्त्वमुभयोरार्त्न्योर्ज्याम् ।
याश्च ते हस्त इषवः परा ता भगवो वप ॥९॥
Hindi Meaning:
हे भगवन्! आप धनुष की दोनों कोटियों के मध्य स्थित प्रत्यंचा का त्याग कर दें और अपने हाथ में स्थित बाणों को भी दूर फेंक दें अर्थात् हम पर अनुग्रह करें॥९॥- रूद्र सूक्तं
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 9): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 10
Vedic Verse
विज्यं धनुः कपर्दिनो विशल्यो बाणवाँ२ उत ।
अनेशन्नस्य या इषव आभुरस्य निषङ्गधिः ॥१०॥
Hindi Meaning:
जटा जूट धारण करने वाले रुद्र का धनुष प्रत्यंचा रहित रहे, तूणीर में स्थित बाणों के नोकदार अग्र भाग नष्ट हो जायँ, इन रुद्र के जो बाण हैं. वे भी नष्ट हो जाये तथा इनके खड्ग रखने का कोश भी खड्ग रहित हो जाय अर्थात् वे रुद्र हमारे प्रति सर्वथा करुणामय हो जायँ ॥१०॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 10): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 11
Vedic Verse
या ते हेतिर्मीढुष्टम हस्ते बभूव ते धनुः ।
तयाऽस्मान्विश्वतस्त्वमयमया परि भुज ॥११॥
Hindi Meaning:
अत्यधिक वृष्टि करने वाले हे रुद्र! आपके हाथ में जो धनुष रूप आयुध है, उस सुदृढ़ तथा अनुप द्रवकारी धनुष से हमारी सब ओर से रक्षा कीजिये॥११॥- रूद्र सूक्तं
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 11): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 12
Vedic Verse
परि ते धन्वनो हेतिरस्मान्वृणक्तु विश्वतः ।
Hindi Meaning:
हे रुद्र! आपका धनुष रूप आयुध सब ओर से हमारा त्याग करे अर्थात् हमें न मारे और आपका जो बाणों से भरा तरकश है, उसे हमसे दूर रखिये॥१२॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 12): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 13
Vedic Verse
अवतत्य धनुष्ट्व सहस्राक्ष शतेषुधे ।
निशीर्य शल्यानां मुखा शिवो नः सुमना भव ॥१३॥
Hindi Meaning:
सौ तूणीर और सहस्र नेत्र धारण करने वाले हे रुद्र! धनुष की प्रत्यंचा दूर करके और बाणों के अग्र भागों को तोड़कर आप हमारे प्रति शान्त और प्रसन्न मन वाले हो जायें॥१३॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 13): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 14
Vedic Verse
नमस्त आयुधायानातताय धृष्णवे ।
उभाभ्यामुत ते नमो बाहुभ्यां तव धन्वने ॥१४॥
Hindi Meaning:
हे रुद्र! शत्रुओं को मारने में प्रगल्भ और धनुष पर न चढ़ाये गये आपके बाण के लिये हमारा प्रणाम है। आपकी दोनों बाहुओं और धनुष के लिये भी हमारा प्रणाम है॥१४॥- रूद्र सूक्तं मा नो महान्तमुत मा नो
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 14): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 15
Vedic Verse
अर्भकं मा न उक्षन्तमुत मा न उक्षितम् ।
मा नो वधी: पितरं मोत मातरं
Hindi Meaning:
हे रुद्र! हमारे गुरु, पितृव्य आदि वृद्धजनों को मत मारिये, हमारे बालक की हिंसा मत कीजिये, हमारे तरुण को मत मारिये, हमारे गर्भस्थ शिशु का नाश मत कीजिये, हमारे माता-पिता को मत मारिये तथा हमारे प्रिय पुत्र-पौत्र आदि की हिंसा मत कीजिये॥१५॥ मा नस्तोके तनये मा न आयुषि
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 15): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 16
Vedic Verse
मा नो गोषु मा नो अश्वेषु रीरिषः ।
मा नो वीरान् रुद्र भामिनो वधीर्हविष्मन्तः
Hindi Meaning:
हे रुद्र! हमारे पुत्र-पौत्र आदि का विनाश मत कीजिये, हमारी आयु को नष्ट मत कीजिये, हमारी गौओं को मत मारिये, हमारे घोड़ों का नाश मत कीजिये, हमारे क्रोध युक्त वीरों की हिंसा मत कीजिये। हवि से युक्त होकर हम सब सदा आपका आवाहन करते हैं ॥१६॥ नमो हिरण्यबाहवे सेनान्ये दिशां च पतये नमो नमो वृक्षेभ्यो हरिकेशेभ्यः पशूनां पतये नमो नमः शष्पिञ्जराय त्विषीमते पथीनां पतये नमो नमो
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 16): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 17
Vedic Verse
हरिकेशायोपवीतिने पुष्टानां पतये नमः ॥१७॥
Hindi Meaning:
भुजाओं में सुवर्ण धारण करने वाले सेना नायक रुद्र के लिये नमस्कार है, दिशाओं के रक्षक रुद्र के लिये नमस्कार है, पूर्ण रूप हरे केशों वाले वृक्ष रूप रुद्रों के लिये नमस्कार है, जीवों का पालन करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, कान्तिमान् बालतृण के समान पीत वर्ण वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, मार्गो के पालक रुद्र के लिये नमस्कार है, नीलवर्ण केश से युक्त तथा मंगल के लिये यज्ञोपवीत धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, गुणों से परिपूर्ण मनुष्यों के स्वामी रुद्र के लिये नमस्कार है॥१७॥ नमो बभ्लुशाय व्याधिने ऽन्नानां पतये नमो नमो भवस्य हेत्यै जगतां पतये नमो नमो रुद्रायाततायिने क्षेत्राणां पतये नमो
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 17): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 18
Vedic Verse
नम उच्चैर्घोषायाक्रन्दयते पत्तीनां पतये नमः ॥१९॥
Hindi Meaning:
लोहित वर्ण वाले तथा गृह आदि के निर्माता विश्वकर्मा रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, वृक्षों के पालक रुद्र के लिये नमस्कार है, भुवन का विस्तार करने वाले तथा समृद्धि कारक रुद्र के लिये नमस्कार है, ओषधियों के रक्षक रुद्र के लिये नमस्कार है, आलोचन कुशल व्यापार कर्तारूप रुद्र के लिये नमस्कार है, वन के लता-वृक्ष आदि के पालक रुद्र के लिये नमस्कार है, युद्ध में उग्र शब्द करनेवा ले तथा शत्रुओं को रुलाने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, हाथी, घोड़ा, रथ, पैदल आदि सेनाओं के पालक रुद्र के लिये नमस्कार है ॥१९॥- रूद्र सूक्तं नमः कृत्स्नायतया धावते सत्वनां पतये नमो नमः सहमानाय निव्याधिन आव्याधिनीनां पतये नमो नमो निषङ्गिणे ककुभाय स्तेनानां पतये नमो
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 18): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 19
Vedic Verse
नमो निचेरवे परिचरायारण्यानां पतये नमः ॥२०॥
Hindi Meaning:
कर्णपर्यन्त प्रत्यंचा खींचकर युद्ध में शीघ्रता पूर्वक दौड़ने वाले (अथवा सम्पूर्ण लाभ की प्राप्ति कराने वाले) रुद्र के लिये नमस्कार है, शरणागत प्राणियों के पालक रुद्र के लिये नमस्कार है, शत्रुओं का तिरस्कार करने वाले तथा शत्रुओं को बेधने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, सब प्रकार से प्रहार करने वाली शूर सेनाओं के रक्षक रुद्र के लिये नमस्कार है, खड्ग चलाने वाले महान् रुद्र के लिये नमस्कार है, गुप्त चोरों के रक्षक रुद्र के लिये नमस्कार है, अपहार की बुद्धि से निरन्तर गतिशील तथा हरण की इच्छा से आपण (बाजार) वाटिका आदि में विचरण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है तथा वनों के पालक रुद्र के लिये नमस्कार है॥२०॥- रूद्र सूक्तं नमो वञ्चते परिवञ्चते स्तायूनां पतये नमो नमो निषङ्गिण इषुधिमते तस्कराणां पतये नमो नमः सृकायिभ्यो जिघा सद्भयो मुष्णतां पतये नमो
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 19): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 20
Vedic Verse
नमोऽसिमद्भयो नक्तञ्चरद्भयो विकृन्तानां पतये नमः ॥२१॥
Hindi Meaning:
वंचना करने वाले तथा अपने स्वामी को विश्वास दिलाकर धन हरण करके उसे ठगने वाले रुद्ररूप के लिये नमस्कार है, गुप्त धन चुराने वालों के पालक रुद्र के लिये नमस्कार है, बाण तथा तूणीर धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, प्रकट रूप में चोरी करने वालों के पालक रुद्र के लिये नमस्कार है, वज़ धारण करने वाले तथा शत्रुओं को मारने की इच्छा वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, खेतों में धान्य आदि चुराने वालों के रक्षक रुद्र के लिये नमस्कार है, प्राणियों पर घात करने के लिये खड्ग धारणकर रात्रि में विचरण करने वाले रुद्रों के लिये नमस्कार है तथा दूसरों को काटकर उनका धन हरण करने वालों के पालक रुद्र के लिये नमस्कार है॥२१॥ नम उष्णीषिणे गिरिचराय कुलुञ्चानां पतये नमो नम इषुमद्भयो धन्वायिभ्यश्च वो नमो नम आतन्वानेभ्यः प्रतिदधानेभ्यश्च वो नमो
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 20): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 21
Vedic Verse
विरूपेभ्यो विश्वरूपेभ्यश्च वो नमः ॥२५॥
Hindi Meaning:
देवानुचर भूतगण रूप रुद्रों के लिये नमस्कार है, भूतगणों के अधिपति रूप आप रुद्रों के लिये नमस्कार है, भिन्न-भिन्न जाति समूह रूप रुद्रों के लिये नमस्कार है, विभिन्न जाति समूहों के अधिपतिरूप आप रुद्रों के लिये नमस्कार है, मेधावी ब्रह्म जिज्ञासु रूप रुद्रों के लिये नमस्कार है, मेधावी ब्रह्म जिज्ञासुओं के अधिपति रूप आप रुद्रों के लिये नमस्कार है, निकृष्ट रूप वाले रुद्रों के लिये नमस्कार है, नानाविध रूपों वाले विश्वरूप आप रुद्रों के लिये नमस्कार है॥२५॥-रूद्र सूक्तं नमः सेनाभ्यः सेनानिभ्यश्च वो नमो नमो रथिभ्यो अरथेभ्यश्च वो नमो नमः क्षतृभ्यः संग्रहीतृभ्यश्च वो नमो नमो
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 21): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 22
Vedic Verse
नमो मीढुष्टमाय चेषुमते च ॥२९॥
Hindi Meaning:
जटाजूट धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, मुण्डित केश वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, हजारों नेत्र वाले इन्द्र रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, सैकड़ों धनुष धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, कैलास पर्वत पर शयन करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, सभी प्राणियों के अन्तर्यामी विष्णु रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, अत्यधिक सेचन करने वाले मेघ रूप रुद्र के लिये नमस्कार है और बाण धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है॥२९॥ नमो ह्रस्वाय च वामनाय च नमो बृहते च वर्षीयसे च नमो वृद्धाय च सवृधे च
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 22): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 23
Vedic Verse
नमोऽग्न्याय च प्रथमाय च ॥३०॥
Hindi Meaning:
अल्प देह वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, संकुचित अंगों वाले वामन रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, बृहत्काय रुद्र के लिये नमस्कार है, अत्यन्त वृद्धावस्था वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, अधिक आयु वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, विद्याविनयादि गुणों से सम्पन्न विद्वानों के साथी रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, जगत के आदिभूत रुद्र के लिये नमस्कार है और सर्वत्र मुख्य स्वरूप रुद्र के लिये नमस्कार है॥३०॥ नम आशवे चाजिराय च नमः शीघ्रयाय च शीभ्याय च नम ऊर्ध्याय चावस्वन्याय च नमो
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 23): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 24
Vedic Verse
नादेयाय च द्वीप्याय च ॥३१॥
Hindi Meaning:
जगद्व्यापी रुद्र के लिये नमस्कार है, गतिशील रुद्र के लिये नमस्कार है, वेगवाली वस्तुओं में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है, जल प्रवाह में विद्यमान आत्मश्लाघी रुद्र के लिये नमस्कार है, जल तरंगों में व्याप्त रुद्र के लिये नमस्कार है, स्थिर जलरूप रुद्र के लिये नमस्कार है, नदियों में व्याप्त रुद्र के लिये नमस्कार है और द्वीपों में व्याप्त रुद्र के लिये नमस्कार है॥३१॥ नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय चापरजाय च नमो मध्यमाय चापगल्भाय च
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 24): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 25
Vedic Verse
नमो जघन्याय च बुध्याय च ॥३२॥
Hindi Meaning:
अति प्रशस्य ज्येष्ठ रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, अत्यन्त युवा (अथवा कनिष्ठ)- रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, जगत के आदि में हिरण्यगर्भ रूप से प्रादुर्भूत हुए रुद्र के लिये नमस्कार है, प्रलय के समय कालाग्नि के सदृश रूप धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, सृष्टि और प्रलय के मध्य में देवनर-तिर्यगादि रूप से उत्पन्न होने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, अव्युत्पन्नेन्द्रिय रुद्र के लिये नमस्कार है अथवा विनीत रुद्र के लिये नमस्कार है, (गाय आदि के) जघन प्रदेश से उत्पन्न होने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है और वृक्षादिकों के मूल में निवास करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है॥३२॥ नमः सोभ्याय च प्रतिसर्याय च नमो याम्याय च क्षेम्याय च नमः श्लोक्याय चावसान्याय च
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 25): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 26
Vedic Verse
नम उर्वर्याय च खल्याय च ॥३३॥
Hindi Meaning:
गन्धर्व नगर में होने वाले (अथवा पुण्य और पापों से युक्त मनुष्य लोक में उत्पन्न होने वाले) रुद्र के लिये नमस्कार है, प्रत्यभिचार में रहने वाले (अथवा विवाह के समय हस्त सूत्र में उत्पन्न होने वाले) रुद्र के लिये नमस्कार है, पापियों को नरक की वेदना देने वाले यम के अन्तर्यामी रुद्र के लिये नमस्कार है, कुशल कर्म में रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, वेद के मन्त्र (अथवा यश) द्वारा उत्पन्न हुए रुद्र के लिये नमस्कार है, वेदान्त के तात्पर्य विषयी भूत रुद्र के लिये नमस्कार है, सर्वसस्य सम्पन्न पृथ्वी से उत्पन्न होने वाले धान्य रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, धान्यविवेचन-देश (खलिहान) में उत्पन्न हुए रुद्र के लिये नमस्कार है॥३३॥ नमो वन्याय च कक्ष्याय च नमः श्रवाय च प्रतिश्रवाय च नम: आशुषेणाय चाशुरथाय च नमः
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 26): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 27
Vedic Verse
शूराय चावभेदिने च ॥३४॥
Hindi Meaning:
वनों में वृक्ष-लतादि रूप रुद्र अथवा वरुण स्वरूप रुद्रों के लिये नमस्कार है, शुष्क तृण अथवा गुल्मों में रहनेवाले रुद्र के लिये नमस्कार है। प्रतिध्वनि स्वरूप रुद्र के लिये नमस्कार है, शीघ्रगामी सेना वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, शीघ्रगामी रथ वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, युद्ध में शूरता प्रदर्शित करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है तथा शत्रुओं को विदीर्ण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है॥३४॥ नमो बिल्मिने च कवचिने च नमो वर्मिणे च वरूथिने च नमः श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 27): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 28
Vedic Verse
दुन्दुभ्याय चाहनन्याय च ॥३५॥
Hindi Meaning:
शिरस्त्राण धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, कपास-निर्मित देहरक्षक (अंगरखा) धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, लोहे का बख्तर धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, गुम्बद युक्त रथ वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, संसार में प्रसिद्ध रुद्र के लिये नमस्कार है, प्रसिद्ध सेना वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, दुन्दुभी (भेरी) में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है, भेरी आदि वाद्यों को बजाने में प्रयुक्त होने वाले दण्ड आदि में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है॥३५॥ नमो धृष्णवे च प्रमृशाय च नमो निषङ्गिणे चेषुधिमते च नमस्ती क्ष्णेषवे चायुधिने च नमः
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 28): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 29
Vedic Verse
स्वायुधाय च सुधन्वने च ॥३६॥
Hindi Meaning:
प्रगल्भ स्वभाव वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, सत्-असत का विवेक पूर्वक विचार करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, खड्ग धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, तूणीर (तरकश) धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, तीक्ष्ण बाणों वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, नानाविध आयुधों को धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, उत्तम त्रिशूल रूप आयुध धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है और श्रेष्ठ पिनाक धनुष धारण करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है॥३६॥ नमः स्रुत्याय च पथ्याय च नमः काट्याय च नीप्याय च नमः कुल्याय च सरस्याय च नमो नादेयाय
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 29): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 30
Vedic Verse
च वैशन्ताय च ॥३७॥
Hindi Meaning:
क्षुद्रमार्ग में विद्यमान रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, रथ-गज, अश्व आदि के योग्य विस्तृत मार्ग में विद्यमान रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, दुर्गम मार्गो में स्थित रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, जहाँ झरनों का जल गिरता है, उस भूप्रदेश में उत्पन्न हुए अथवा पर्वतों के अधोभाग में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है, नहर के मार्ग में स्थित अथवा शरीरों में अन्तर्यामी रूप से विराजमान रुद्र के लिये नमस्कार है, सरोवर में उत्पन्न होने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, सरितादिकों में विद्यमान जल रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, अल्प सरोवर में रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है॥३७॥ नमः कूप्याय चावट्याय च नमो वीध्र्याय चातप्याय च नमो मेघ्याय च विद्युत्याय च
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 30): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 31
Vedic Verse
नमो वाय चावाय च ॥३८॥
Hindi Meaning:
कूपों में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है, गर्त-स्थानों में रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, शरद्-ऋतु के बादलों अथवा चन्द्र-नक्षत्रादि मण्डल में विद्यमान विशुद्ध स्वभाव वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, आतप (धूप) में उत्पन्न होने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, मेघों में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है, विद्युत में होने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, वृष्टि में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है तथा अवर्षण में स्थित रुद्र के लिये नमस्कार है॥३८॥ नमो वात्याय च रेष्याय च नमो वास्तव्याय च वास्तुपाय च नमः सोमाय च रुद्राय च
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 31): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 32
Vedic Verse
नमस्ताम्राय चारुणाय च ॥३९॥
Hindi Meaning:
वायु में रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, प्रलयकाल में विद्यमान रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, गृह-भूमि में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है अथवा सर्वशरीर वासी रुद्र के लिये नमस्कार है, गृहभूमि के रक्षक रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, चन्द्रमा में स्थित अथवा ब्रह्मविद्या महाशक्ति उमासहित विराजमान सदाशिव रुद्र के लिये नमस्कार है, सर्वविध अनिष्ट के विनाशक रुद्र के लिये नमस्कार है, उदित होने वाले सूर्य के रूप में ताम्रवर्ण के रुद्र के लिये नमस्कार है और उदय के पश्चात् अरुण (कुछ-कुछ रक्त) वर्ण वाले रुद्र के लिये नमस्कार है॥३९॥ नमः शङ्गवे च पशुपतये च नम उग्राय च भीमाय च नमोऽग्रेवधाय च दूरेवधाय च नमो हन्त्रे च हनीयसे
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 32): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 33
Vedic Verse
च नमो वृक्षेभ्यो हरिकेशेभ्यो नमस्ताराय ॥४०॥
Hindi Meaning:
भक्तों को सुख की प्राप्ति कराने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, जीवों के अधिपति स्वरूप रुद्र के लिये नमस्कार है, संहार-काल में प्रचण्ड स्वरूप वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, अपने भयानक रूप से शत्रुओं को भयभीत करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, सामने खड़े होकर वध करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, दूर स्थित रहकर संहार करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, हनन करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, प्रलयकाल में रावहन्ता रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, हरित वर्ण के पत्र रूप केशों वाले कल्पत रुस्वरूप रुद्र के लिये नमस्कार है और ज्ञानोपदेश के द्वारा अधिकारी जनों को तारने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है॥४०॥ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 33): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 34
Vedic Verse
च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च ॥४१॥
Hindi Meaning:
सुख के उत्पत्ति स्थान रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, भोग तथा मोक्ष का सुख प्रदान करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, लौकिक सुख देने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, वेदान्त-शास्त्र में होने वाले ब्रह्मात्मैक्य साक्षात्कार स्वरूप रुद्र के लिये नमस्कार है, कल्याण रूप निष्पाप रुद्र के लिये नमस्कार है और अपने भक्तों को भी निष्पाप बनाकर कल्याण रूप कर देने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है॥४१॥ नमः पार्याय चावार्याय च नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च नमस्तीर्थ्याय
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 34): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 35
Vedic Verse
च कल्याय च नमः शष्याय च फेन्याय च ॥४२॥
Hindi Meaning:
संसार समुद्र के अपर तीर पर रहने वाले अथवा संसारातीत जीवन्मुक्त विष्णुरूप रुद्र के लिये नमस्कार है, संसारव्यापी रुद्र के लिये नमस्कार है, दुःख-पापादि से प्रकृष्ट रूप से तारने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, उत्कृष्ट ब्रह्म-साक्षात्कार कराकर संसार से तारने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, तीर्थस्थलों में प्रतिष्ठित रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, गंगा आदि नदियों के तटपर विद्यमान रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, गंगा आदि नदियों के तट पर उत्पन्न रहने वाले कुशांकुरादि बाल तृण रूप रुद्र के लिये नमस्कार है और जल के विकार स्वरूप फेन में विद्यमान रहने वाले रुद्रके लिये नमस्कार है॥४२॥ नमः सिकत्याय च प्रवाह्याय च नमः कि शिलाय च क्षयणाय च नमः कपर्दिने
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 35): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 36
Vedic Verse
च पुलस्तये च नम इरिण्याय च प्रपथ्याय च ॥४३॥
Hindi Meaning:
नदियों की बालुकाओं में होने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, नदी आदि के प्रवाह में होने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, क्षुद्र पाषाणों वाले प्रदेश के रूप में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है, स्थिर जल से परिपूर्ण प्रदेश रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, जटा मुकुट धारी रुद्र के लिये नमस्कार है, शुभाशुभ देखने की इच्छा से सदा सामने खड़े रहने वाले अथवा सर्वान्तर्यामी स्वरूप रुद्र के लिये नमस्कार है, ऊसर भूमि रूप रुद्र के लिये नमस्कार है और अनेक जनों से संसेवित मार्ग में होने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है॥४३॥ नमो व्रज्याय च गोष्ठ्याय च नमस्तल्प्याय च गेह्याय च नमो हृदय्याय च
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 36): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 37
Vedic Verse
निवेष्याय च नमः काट्याय च गह्वरेष्ठाय च ॥४४॥
Hindi Meaning:
गोसमूह में विद्यमान अथवा व्रज में गोपेश्वर के रूप में रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, गोशालाओं में रहने वाले गोष्ठ्य रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, शय्या में विद्यमान रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, गृह में विद्यमान रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, हृदय में रहने वाले जीव रूपी रुद्र के लिये नमस्कार है, जल के भँवर में रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, दुर्ग-अरण्य आदि स्थानों में रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है और विषम गिरिगुहा आदि अथवा गम्भीर जल में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है॥४४॥ नमः शुष्क्याय च हरित्याय च नमः पा सव्याय च रजस्याय च नमो लोप्याय
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 37): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 38
Vedic Verse
चोलप्याय च नम ऊर्व्याय च सूर्व्याय च ॥४५॥
Hindi Meaning:
काष्ठ आदि शुष्क पदार्थों में भी सत्तारूप से विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है, आई काष्ठ आदि में सत्तारूप से विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है, धूलि आदि में विराजमान पांसव्य रूप रुद्रके लिये नमस्कार है, रजोगुण अथवा पराग में विद्यमान रजस्य रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, सम्पूर्ण इन्द्रियों के व्यापार की शान्ति होने पर भी अथवा प्रलय में भी साक्षी बनकर रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, बल्वजादि तृण विशेषों में होने वाले उलप्य रूपी रुद्र के लिये नमस्कार है, बडवानल में विराजमान रुद्र के लिये नमस्कार है और प्रलयाग्नि में विद्यमान रुद्र के लिये नमस्कार है॥४५॥ नमः पर्णाय च पर्णशदाय च नम उद्गुरमाणाय चाभिघ्नते च नम आखिदते च प्रखिदते च नम इषुकृद्भयो धनुष्कद्भ्यश्च वो नमो नमो व: किरिकेभ्यो देवाना हृदयेभ्यो नमो
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 38): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 39
Vedic Verse
विचिन्वत्केभ्यो नमो विक्षिणत्केभ्यो नम आनिर्हतेभ्यः ॥४६॥
Hindi Meaning:
वृक्षों के पत्र रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, वृक्ष-पर्णों के स्वतः शीर्ण होने के काल वसन्त ऋतु रूप रुद्र के लिये नमस्कार है, पुरुषार्थ परायण रहने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, सब ओर शत्रुओं का हनन करने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, सब ओर से अभक्तों को दीन-दुःखी बना देने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, अपने भक्तों के दु:खों से दुःखी होने के कारण दया से आर्द्रहृदय होने वाले रुद्र के लिये नमस्कार है, बाणों का निर्माण करने वाले रुद्रों के लिये नमस्कार है, धनुषों का निर्माण करने वाले रुद्रों के लिये नमस्कार है, वृष्टि आदि के द्वारा जगत का पालन करने वाले देवताओं के हृदय भूत अग्नि, वायु, आदित्य रूप रुद्रों के लिये नमस्कार है, धर्मात्मा तथा पापियों का भेद करने वाले अग्नि आदि रुद्रों के लिये नमस्कार है, भक्तों के पाप रोग अमंगल को दूर करने वाले तथा पाप-पुण्य के साक्षी स्वरूप अग्नि आदि रुद्रों के लिये नमस्कार है और सृष्टि के आदि में मुख्यतया इन लोकों से निर्गत हुए अग्नि, वायु, सूर्य रूप रुद्रों के लिये नमस्कार है॥४६॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 39): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 40
Vedic Verse
द्रापे अन्धसस्पते दरिद्र नीललोहित ।
आसां प्रजानामेषां पशूनां मा भेर्मा रोड्मो च नः किंचनाममत् ॥४७॥
Hindi Meaning:
हे द्रापे (दुराचारियों को कुत्सित गति प्राप्त कराने वाले)! हे अन्धसस्पते (सोमपालक)! हे दरिंद्र (निष्परिग्रह)! हे नीललोहित! हमारी पुत्रादि प्रजाओं तथा गो-आदि पशुओं को भयभीत मत कीजिये, उन्हें नष्ट मत कीजिये और उन्हें किसी भी प्रकार के रोग से ग्रसित मत कीजिये॥४७॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 40): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 41
Vedic Verse
इमा रुद्राय तवसे कपर्दिने क्षयद्वीराय प्र भरामहे मतीः ।
यथा शमसद् द्विपदे चतुष्पदे विश्वं पुष्टं ग्रामे अस्मिन्ननातुरम् ॥४८॥
Hindi Meaning:
जिस प्रकार से मेरे पुत्रादि तथा गौ आदि पशुओं को कल्याण की प्राप्ति हो तथा इस ग्राम में सम्पूर्ण प्राणी पुष्ट तथा उपद्रव रहित हों, इसके निमित्त हम अपनी इन बुद्धियों को महाबली, जटाजूटधारी तथा शूरवीरों के निवास भूत रुद्र के लिये समर्पित करते हैं॥४८॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 41): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 42
Vedic Verse
या ते रुद्र शिवा तनूः शिवा विश्वाहा भेषजी ।
शिवा रुतस्य भेषजी तया नो मृड जीवसे ॥४९॥
Hindi Meaning:
हे रुद्र! आपका जो शान्त, निरन्तर कल्याणकारक, संसार की व्याधि निवृत्त करने वाला तथा शारीरिक व्याधि दूर करने का परम औषधि रूप शरीर है, उससे हमारे जीवन को सुखी कीजिये॥४९॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 42): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 43
Vedic Verse
परि नो रुद्रस्य हेतिवृणक्तु परि त्वेषस्य दुर्मतिरघायोः ।
अव स्थिरा मघवद्भयस्तनुष्व मीढ्वस्तोकाय तनयाय मृड ॥५०॥- Rudra Suktam
Hindi Meaning:
रुद्र के आयुध हमारा परित्याग करें और क्रुद्ध हुए द्वेषी पुरुषों की दुर्बुद्धि हम लोगों को वर्जित कर दे (अर्थात् उनसे हम लोगों को किसी प्रकार की पीड़ा न होने पाये)। अभिलषित वस्तुओं की वृष्टि करने वाले हे रुद्र ! आप अपने धनुष को प्रत्यंचा रहित करके यजमान-पुरुषों के भय को दूर कीजिये और उनके पुत्र-पौत्रों को सुखी बनाइये॥५०॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 43): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 44
Vedic Verse
मीढुष्टम शिवतम शिवो नः सुमना भव ।
परमे वृक्ष आयुधं निधाय कृत्तिं वसान
आ चर पिनाकं बिभ्रदा गहि ॥५१॥
Hindi Meaning:
अभीष्ट फल और कल्याणों की अत्यधिक वृष्टि करने वाले हे रुद्र! आप हम पर प्रसन्न रहें, अपने त्रिशूल आदि आयुधों को कहीं दूर स्थित वृक्षों पर रख दीजिये, गजचर्म का परिधान धारण करके तप कीजिये और केवल शोभा के लिये धनुष धारण करके आइये॥५१॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 44): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 45
Vedic Verse
विकिरिद्र विलोहित नमस्ते अस्तु भगवः ।
यास्ते सहस्र हेतयोऽन्यमस्मन्नि वपन्तु ताः ॥५२॥
Hindi Meaning:
विविध प्रकार के उपद्रवों का विनाश करने वाले तथा शुद्ध स्वरूप वाले हे रुद्र! आपको हमारा प्रणाम है, आपके जो असंख्य आयुध हैं, वे हमसे अतिरिक्त दूसरों पर जाकर गिरें॥५२॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 45): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 46
Vedic Verse
सहस्राणि सहस्रशो बाह्वोस्तव हेतयः ।
तासामीशानो भगवः पराचीना मुखा कृधि ॥५३॥-Rudra Suktam
Hindi Meaning:
गुण तथा ऐश्वर्यों से सम्पन्न हे जगत्पति रुद्र! आपके हाथों में हजारों प्रकार के जो असंख्य आयुध हैं, उनके अग्रभागों (मुखों) को हमसे विपरीत दिशाओं की ओर कर दीजिये (अर्थात् हम पर आयुधों का प्रयोग मत कीजिये)॥५३॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 46): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 47
Vedic Verse
असंख्याता सहस्राणि ये रुद्रा अधि भूम्याम् ।
तेषा सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि ॥५४॥
Hindi Meaning:
पृथ्वी पर जो असंख्य रुद्र निवास करते हैं, उनके असंख्य धनुषों को प्रत्यंचा रहित करके हम लोग हजारों कोसों के पार जो मार्ग है, उस पर ले जाकर डाल देते हैं॥५४॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 47): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 48
Vedic Verse
अस्मिन् महत्यर्णवे ऽन्तरिक्षे भवा अधि ।
तेषा सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि ॥५५॥
Hindi Meaning:
मेघ मण्डल से भरे हुए इस महान् अन्तरिक्ष में जो रुद्र रहते हैं, उनके असंख्य धनुषों को प्रत्यंचारहित करके हम लोग हजारों कोसों के पारस्थित मार्ग पर ले जाकर डाल देते हैं॥५५॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 48): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 49
Vedic Verse
नीलग्रीवा: शितिकण्ठा दिव रुद्रा उपश्रिताः ।
तेषा सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि ॥५६॥- Rudra Suktam
Hindi Meaning:
जिनके कण्ठ का कुछ भाग नील वर्ण का है और कुछ भाग श्वेत वर्ण का है तथा जो धुलोक में निवास करते हैं, उन रुद्रों के असंख्य धनुषों को प्रत्यंचारहित करके हमलोग हजारों कोस दूर स्थित मार्ग पर ले जाकर डाल देते हैं ॥५६॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 49): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 50
Vedic Verse
नीलग्रीवा: शितिकण्ठाः शर्वा अधः क्षमाचराः ।
तेषा सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि ॥५७॥
Hindi Meaning:
कुछ भाग में नीलवर्ण और कुछ भाग में शुक्लवर्ण के कण्ठ वाले तथा भूमि के अधोभाग में स्थित पाताललोक में निवास करने वाले रुद्रों के असंख्य धनुषों को प्रत्यंचारहित करके हमलोग हजारों कोस दूर स्थित मार्ग पर ले जाकर डाल देते हैं॥५७॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 50): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 51
Vedic Verse
ये वृक्षेषु शष्पिञ्जरा नीलग्रीवा विलोहिताः ।
तेषा सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि ॥५८॥- Rudra Suktam
Hindi Meaning:
बाल तृण के समान हरित वर्ण के तथा कुछ भाग में नील वर्ण एवं कुछ भाग में शुक्ल वर्ण के कण्ठ वाले, जो रुधिर रहित रुद्र (तेजोमय शरीर रहने से उन शरीरों में रक्त और मांस नहीं रहता) हैं, वे अश्वत्थ आदि के वृक्षों पर रहते हैं। उन रुद्रों के धनुषों को प्रत्यंचा रहित करके हम लोग हजारों कोसों के पारस्थित मार्ग पर डाल देते हैं॥५८॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 51): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 52
Vedic Verse
ये भूतानामधिपतयो विशिखासः कपर्दिनः ।
तेषा सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि ॥५९॥
Hindi Meaning:
जिनके सिर पर केश नहीं हैं, जिन्होंने जटाजूट धारण कर रखा है और जो पिशाचों के अधिपति हैं, उन रुद्रों के धनुषों को प्रत्यंचा रहित करके हम लोग हजारों कोसों के पारस्थित मार्ग पर ले जाकर डाल देते हैं ॥५९॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 52): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 53
Vedic Verse
ये पथां पथिरक्षय ऐलबृदा आयुर्युधः ।
तेषा सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि ॥६०॥
Hindi Meaning:
अन्न देकर प्राणियों का पोषण करने वाले, आजीवन युद्ध करने वाले, लौकिक-वैदिक मार्ग का रक्षण करने वाले तथा अधिपति कहलाने वाले जो रुद्र हैं, उनके धनुषों को प्रत्यंचा रहित करके हम लोग हजारों कोसों के पारस्थित मार्ग पर ले जाकर डाल देते हैं॥६०॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 53): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 54
Vedic Verse
ये तीर्थानि प्रचरन्ति सृकाहस्ता निषङ्गिणः ।
तेषा सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि ॥६१॥- Rudra Suktam
Hindi Meaning:
वज्र और खड्ग आदि आयुधों को हाथ में धारण कर जो रुद्र तीर्थो पर जाते हैं, उनके धनुषों को प्रत्यंचा रहित करके हमलोग हजारों कोसों के पारस्थित मार्ग पर ले जाकर डाल देते हैं॥६१॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 54): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 55
Vedic Verse
येऽन्नेषु विविध्यन्ति पात्रेषु पिबतो जनान।
तेषा सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि ॥६२॥
Hindi Meaning:
खाये जाने वाले अन्नों में स्थित जो रुद्र अन्नभोक्ता प्राणियों को पीड़ित करते हैं (अर्थात् धातु वैषम्य के द्वारा उन में रोग उत्पन्न करते हैं) और पात्रों में स्थित दुग्ध आदि में विराजमान जो रुद्र उनका पान करने वाले लोगों को (व्याधि आदिके द्वारा) कष्ट देते हैं, उनके धनुषों को प्रत्यंचा रहित करके हमलोग हजारों कोस दूर स्थित मार्ग पर ले जाकर डाल देते हैं॥६२॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 55): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 56
Vedic Verse
य एतावन्तश्च भूया सश्च दिशो रुद्रा वितस्थिरे ।
तेषा सहस्रयोजनेऽव धन्वानि तन्मसि ॥६३॥
Hindi Meaning:
दसों दिशाओं में व्याप्त रहने वाले जो अनेक रुद्र हैं, उनके धनुषों को प्रत्यंचारहित करके हमलोग हजारों कोस दूर स्थित मार्ग पर ले जाकर डाल देते हैं॥६३॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 56): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 57
Vedic Verse
नमोऽस्तु रुद्रेभ्यो ये दिवि येषां वर्षमिषवः ।
तेभ्यो दश प्राचीर्दश दक्षिणा दश प्रतीचीशोदीचीर्दशोर्ध्वाः ।
तेभ्यो नमो अस्तु ते नोऽवन्तु ते नो मृडयन्तु ते
यं द्विष्मो यश्च नो द्वेष्टि तमेषां जम्भे दध्मः ॥६४॥
Hindi Meaning:
जो रुद्र धुलोक में विद्यमान हैं तथा जिन रुद्रों के बाण वृष्टि रूप हैं, उन रुद्रों के लिये नमस्कार है। उन रुद्रों के लिये पूर्व दिशा की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ, दक्षिण की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ, पश्चिम की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ, उत्तर की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ और ऊपर की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ (अर्थात् हाथ जोड़कर सभी दिशाओं में उन रुद्रों के लिये प्रणाम करता हूँ)। वे रुद्र हमारी रक्षा करें और वे हमें सुखी बनायें। वे रुद्र जिस मनुष्य से द्वेष करते हैं, हमलोग जिससे द्वेष करते हैं और जो हमसे द्वेष करता है, उस पुरुष को हमलोग उन रुद्रों के भयंकर दाँतों वाले मुख में डालते हैं (अर्थात् वे रुद्र हमसे द्वेष करने वाले मनुष्य का भक्षण कर जायँ)॥६४॥- Rudra Suktam
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 57): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 58
Vedic Verse
नमोऽस्तु रुद्रेभ्यो येऽन्तरिक्षे येषां वात इषवः ।
तेभ्यो दश प्राचीर्दश दक्षिणा दश ।
प्रतीचीर्दशोदीचीर्दशोर्ध्वाः ।
तेभ्यो नमो अस्तु ते नोऽवन्तु ते नो मृडयन्तु ते
यं द्विष्मो यश्च नो द्वेष्टि तमेषां जम्भे दध्मः ॥६५॥
Hindi Meaning:
जो रुद्र अन्तरिक्ष में विद्यमान हैं तथा जिन रुद्रों के बाण पवनरूप हैं, उन रुद्रों के लिये नमस्कार है। उन रुद्रों के लिये पूर्व दिशा की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ, दक्षिण की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ, पश्चिम की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ, उत्तर की ओर दसों अंगुलियाँ करता हूँ और ऊपर की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ (अर्थात् हाथ जोड़कर सभी दिशाओं में उन रुद्रों के लिये प्रणाम करता हूँ)। वे रुद्र हमारी रक्षा करें और वे हमें सुखी बनायें। वे रुद्र जिस मनुष्य से द्वेष करते हैं, हम लोग जिससे द्वेष करते हैं और जो हमसे द्वेष करता है, उस पुरुष को हमलोग उन रुद्रों के भयंकर दाँतों वाले मुख में डालते हैं (अर्थात् वे रुद्र हमसे द्वेष करने वाले मनुष्य का भक्षण कर जायँ)॥६५॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 58): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 59
Vedic Verse
नमोऽस्तु रुद्रेभ्यो ये पृथिव्यां येषामन्नमिषवः ।
तेभ्यो दश प्राचीर्दश दक्षिणा दश प्रतीचीर्दशोदीचीर्दशोर्ध्वाः ।
तेभ्यो नमो अस्तु ते नोऽवन्तु ते नो मृडयन्तु ते
यं द्विष्मो यश्च नो द्वेष्टि तमेषां जम्भे दध्मः ॥६६॥- Rudra Suktam
Hindi Meaning:
जो रुद्र पृथ्वीलोकमें स्थित हैं तथा जिनके बाण अन्नरूप हैं, उन रुद्रों के लिये नमस्कार है। उन रुद्रों के लिये पूर्व दिशा की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ, दक्षिण की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ, पश्चिम की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ, उत्तर की ओर दसों अँगुलियाँ करता हूँ और ऊप रकी ओर दसों अंगुलियाँ करता हूँ (अर्थात् हाथ जोड़कर सभी दिशाओं में उन रुद्रों के लिये प्रणाम करता हूँ)। वे रुद्र हमारी रक्षा करें और वे हमें सुखी बनायें। वे रुद्र जिस मनुष्य से द्वेष करते हैं, हमलोग जिससे द्वेष करते हैं और जो हमसे द्वेष करता है, उस पुरुष को हम लोग उन रुद्रों के भयंकर दाँतों वाले मुख में डालते हैं (अर्थात् वे रुद्र हमसे द्वेष करने वाले मनुष्य का भक्षण कर जायँ) ॥६६॥
English Translation:
रूद्र सूक्तं (ऋचा 59): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥
Recitation Vidhi & Auspicious Timing
⏱️
Auspicious Timing:
Mondays, Trayodashi (Pradosha), Mahashivratri
🪔 Step-by-Step Vidhi:
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और बिल्वपत्र से अभिषेक करते हुए पाठ करें।
✨ Divine Benefits (Phalashruti):
- ✔ Pacifies Kaal Sarp Dosha, Sade Sati, and critical astrological perils.
- ✔ Bestows longevity, profound peace, and liberation.
Frequently Asked Questions
Frequently Asked Questions
What is the most auspicious time to recite Rudra Suktam?
Rudra Suktam is most auspiciously recited during Mondays, Trayodashi (Pradosha), Mahashivratri after morning ablutions with dedicated focus.
What is the Vedic origin of Rudra Suktam?
Rudra Suktam originates from Yajurveda (Namakam / Chapter 16) with seer Parameshti and metre Trishtubh / Jagati.
What are the spiritual benefits of reciting Rudra Suktam?
Recitation of Rudra Suktam bestows Pacifies Kaal Sarp Dosha, Sade Sati, and critical astrological perils. and Bestows longevity, profound peace, and liberation..