बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम। जो सुमिरे सब सिद्ध होय, पूरण हो सब काम॥
बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम। जो सुमिरे सब सिद्ध होय, पूरण हो सब काम॥
अन्नपूर्णा जगदम्बा माता, सबकी पालनहार। काशी की महारानी तुम हो, दया की अवतार॥
नित प्रति भोजन देति सबन को, अन्न धन के भण्डार। रिद्धि सिद्धि सब दासी तेरी, महिमा अपरम्पार॥
शिव शंकर ने भिक्षा मांगी, झोली दई पसार। काशी में तब वास कियो माँ, तारन जग संसार॥
सोने के थाल में भोग लगैयो, छप्पन भोग सुहाये। खीर खांड अमृत सम भोजन, भक्तन मन हर्षाए॥
जो जन ध्यावे प्रेम भाव से, पावे सुख अपार। दुःख दरिद्रता दूर भगावे, संकट सब टर जाए॥
आरती जो कोई नर गावे, प्रेम सहित चित लाय। अन्न धन लक्ष्मी घर में बाढ़े, सुख सम्पति नित पाय॥
बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम। जो सुमिरे सब सिद्ध होय, पूरण हो सब काम॥
बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम। जो सुमिरे सब सिद्ध होय, पूरण हो सब काम॥