जय गोरख देवा, स्वामी जय गोरख देवा। अलख निरंजन दाता, सब सुख फल देवा॥ जय गोरख देवा॥
जय गोरख देवा, स्वामी जय गोरख देवा। अलख निरंजन दाता, सब सुख फल देवा॥
मत्स्येन्द्रनाथ के चेले, योगेश्वर ज्ञानी। कुण्डल कानन सोहे, सिद्धि महादानी॥
अंग भभूत रमाए, जटाजूट धारा। त्रिशूल चिमटा साजे, नाद ध्वनि प्यारा॥
सिद्ध चौरासी सेवे, नौ नाथों के नाथ। शरणागत प्रतिपालक, राखो सिर पर हाथ॥
खिचड़ी का भोग लगे, धूणी जलती रहे। जो नर ध्यावे तुमको, संकट सब टरे॥
कायर भय मिट जावे, मिले आत्मबल भारी। भूत-पिशाच डरे सब, जय जय त्रिपुरारी॥
आरती गोरखनाथ की, जो जन नित गावे। योग सिद्धि सुख सम्पदा, परम धाम पावे॥
जय गोरख देवा, स्वामी जय गोरख देवा। अलख निरंजन दाता, सब सुख फल देवा॥
जय गोरख देवा, स्वामी जय गोरख देवा। अलख निरंजन दाता, सब सुख फल देवा॥ जय गोरख देवा॥