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BHAKTI KI SHAKTI
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📜 श्रीमद्भगवद्गीता (श्रीकृष्ण मुखारविंद वाणी) ⏰ गीता जयंती (मोक्षदा एकादशी), नित्य स्वाध्याय के उपरांत, एकादशी

श्रीमद्भगवद्गीता जी की आरती

श्रीमद्भगवद्गीता भगवान श्रीकृष्ण के मुखारविंद से निःसृत अमृतमयी वाणी है, जो जीवन के समस्त संशयों को मिटाकर मोक्ष प्रदान करती है।

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॥ मुख्य टेक / मुखड़ा ॥

जय भगवद् गीते, मैया जय भगवद् गीते। हरि-हिय-कमल-विहारिणि, सुन्दर सुपुनीते॥ जय भगवद् गीते॥

॥ संपूर्ण आरती कड़ियां ॥
1

जय भगवद् गीते, मैया जय भगवद् गीते। हरि-हिय-कमल-विहारिणि, सुन्दर सुपुनीते॥

2

कर्म-अकर्म-विकर्म-अकर्म, सब संशय हरणी। ज्ञान-भक्ति-वैराग्य, त्रिवेणी सुख करणी॥

3

राग-द्वेष-विनाशिनी, सब जंजाल हरंती। पार्थ-विषाद-निवारिणी, समता-रस भरंती॥

4

कृष्ण-मुखारविन्द-निःसृता, अमृत-मय-वाणी। वेद-उपनिषद-सार, महा-ज्ञान-कल्याणी॥

5

सकल-शास्त्र-शिरोमणि, भव-भय-निवारिणी। मुक्ति-मुक्ति-प्रदायिनी, जन-मन-उद्धारिणी॥

6

जो नर नियम से पढ़े, मन में अर्थ विचारे। कृष्ण-कृपा सो पावे, भवसागर निस्तारे॥

7

आरती भगवद्गीता की, जो जन प्रेम से गावे। परम शान्ति को पाकर, वैकुण्ठ पद पावे॥

8

जय भगवद् गीते, मैया जय भगवद् गीते। हरि-हिय-कमल-विहारिणि, सुन्दर सुपुनीते॥

जय भगवद् गीते, मैया जय भगवद् गीते। हरि-हिय-कमल-विहारिणि, सुन्दर सुपुनीते॥ जय भगवद् गीते॥

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Sacred Aarti Exposition & Meaning · आरती भावार्थ व सारांश

Divine Meaning & English Summary of Shri Bhagavad Gita Aarti

This sacred Aarti is an offering of light and camphor flame to Shri Bhagavad Gita. In Sanatan Dharma, the Aarti ritual symbolizes burning away ego and illuminating life with the divine presence of the Supreme.

✨ Stanza-by-Stanza Devotional Significance

✦ Refrain & Salutations

Hails the glory of Shri Bhagavad Gita, expressing deep devotional surrender.

✦ Divine Attributes & Feats

Recalls the protective acts and compassionate pastimes performed for devotees.

✦ Boon of Peace & Grace

Prays for forgiveness of human shortcomings, protection from distress, and permanent auspiciousness in the home.

🌟 Spiritual Fruits & Vastu Household Blessings (आरती फल)

Performing this Aarti at dawn or dusk cleanses household energy (Vastu), dissolves fear, and cultivates loving peace and harmony.

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आरती करने की शास्त्रोक्त विधि

पवित्र आसन पर गीता ग्रंथ को पीताम्बर पर स्थापित कर चंदन, अक्षत, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें तथा दीप जलाकर श्रद्धा से आरती करें।

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आरती के चमत्कारी लाभ

मोह, भय और मानसिक संशयों का समूल नाश होता है, आत्मज्ञान और परम मोक्ष की प्राप्ति होती है।