मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
सुन जगदम्बे कर न विलम्बे, संतन के भंडार भरे। खडग खप्पर त्रिशूल विराजे, देखि दुष्टन के प्राण डरे॥
कानन कुंडल गल मुंडमाला, शीश मुकुट मणि तेज धरे। रक्तबीज मधु-कैटभ मारे, सुर नर मुनि सब कष्ट हरे॥
जो जन आरती गावे माता, ताके सब संकट दूर टरे। कहत सदाशिव पार उतारो, जनम मरण के फेर हरे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥