BHAKTI KI SHAKTI
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🪔 भगवान श्री सत्यनारायण ⏰ पूर्णिमा, गुरुवार, संक्रांति, व्रत व कथा उपरांत

श्री सत्यनारायण जी की आरती (जय लक्ष्मी रमणा)

सत्य का आचरण, मनोकामना पूर्ति और परिवार में सुख-शांति हेतु।

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॥ मुख्य टेक / मुखड़ा ॥

जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥

॥ संपूर्ण आरती कड़ियां ॥
1

रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे। नारद करत निराजन, घंटा ध्वनि बाजे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥

2

प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दर्श दियो। बूढ़े ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥

3

दुर्बल भील कठियारा, जिन पर कृपा करी। लीलावती कलावती, संकट सब संहरी॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥

4

भाव भक्ति के कारण, छिन छिन भोग लगे। जो जन आरती गावे, सो नर सुख भोगे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥

जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा॥

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आरती करने की शास्त्रोक्त विधि

सत्यनारायण कथा के पश्चात पंजीरी और पंचामृत का प्रसाद वितरित कर आरती करें।

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आरती के चमत्कारी लाभ

सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति मिलती है और कार्य सिद्ध होते हैं।

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