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BHAKTI KI SHAKTI
📜 Supreme Brahman (Self-Realization / Jivanmukti) • 9 Verses

Dhanya Ashtakam

Philosophical masterpiece by Adi Shankaracharya honoring blessed, self-realized souls (Jivanmuktas) dwelling in unbroken supreme peace.

Composer Adi Shankaracharya
Source / Purana Stotra Ratnavali (Adi Shankaracharya)
Chhanda (Meter) Malini Meter
Auspicious Timing Guru Purnima, Daily mornings, Ekadashi
Verse 1 ॥ श्री ॥
तज्ज्ञानं प्रशमकरं यदिन्द्रियाणां तज्ज्ञेयं यदुपनिषत्सु निश्चितार्थम् । ते धन्या भुवि परमार्थनिश्चितेहाः शेषास्तु भ्रमनिलये परिभ्रमन्ति ॥ १ ॥
Hindi Meaning: वही सच्चा ज्ञान है जो इन्द्रियों को शांत कर दे, वही जानने योग्य तत्व है जो उपनिषदों में परब्रह्म के रूप में निश्चित किया गया है। इस पृथ्वी पर वे ही पुरुष वास्तव में 'धन्य' हैं जिनका मन परमार्थ सत्य में स्थित है; शेष लोग तो भ्रम के जाल में ही भटक रहे हैं।
English Translation: True knowledge is that which subdues the senses; the true reality to be known is the Supreme Brahman established in the Upanishads. Blessed indeed are those anchored in ultimate Truth; others merely wander in delusion.
Verse 2 ॥ श्री ॥
आदौ विजित्य विषयान्मदमोहपूर्वान् शान्तिं विधाय हृदये सुसमाहिताङ्गाः । ये संन्यसन्ति सकलं भवबन्धजालं ते धन्या भुवि परमानन्दभावितात्मानः ॥ २ ॥
Hindi Meaning: जिन्होंने पहले काम, क्रोध, मद, मोह आदि विषय-विकारों को जीत लिया है, हृदय में परम शांति स्थापित कर ली है और संसार के समस्त बंधनों का संन्यास कर दिया है, वे परमानंद में लीन आत्मज्ञानी पुरुष इस पृथ्वी पर धन्य हैं।
English Translation: Having conquered base passions of delusion and pride, establishing tranquility in the heart, renouncing the entangling net of worldly bondages, blessed are those immersed in supreme bliss.
Verse 3 ॥ श्री ॥
ब्रह्मात्मभावविमुखेन सुविस्मृतेन येषां न याति समयः क्षणमात्रमत्र । सद्ध्यानलीनमनसः परिशुद्धचित्तास्ते धन्या भुवि परमानन्दभावितात्मानः ॥ ३ ॥
Hindi Meaning: जिनका एक क्षण भी ब्रह्म-भाव के विस्मरण में नहीं बीतता, जिनका मन नित्य सत्य के ध्यान में लीन है और जिनका चित्त परम विशुद्ध हो चुका है, वे परमानंद में स्थित महात्मा इस संसार में धन्य हैं।
English Translation: Not a single moment of whose life slips away in forgetfulness of the Supreme Brahman, mind absorbed in sacred contemplation, pure in heart, blessed are they in cosmic bliss.
Verse 4 ॥ श्री ॥
लीनं मनो हरिपदे चरणारविन्दे संसारदुःखशमने विमले सुशान्ते । येषां न चेतसि विकारलवोऽपि भाति ते धन्या भुवि परमानन्दभावितात्मानः ॥ ४ ॥
Hindi Meaning: जिनका मन संसार के समस्त दुःखों को शांत करने वाले भगवान श्रीहरि के परम निर्मल और शांत चरण कमलों में लीन हो चुका है और जिनके चित्त में विकार का लेशमात्र भी नहीं है, वे पुरुष इस पृथ्वी पर धन्य हैं।
English Translation: Whose mind is merged in the immaculate lotus feet of Lord Hari that dissolve worldly sorrow, in whose heart lingers not a trace of impurity, blessed are they in supreme bliss.
Verse 5 ॥ श्री ॥
अज्ञानपङ्कपटलैरवगुण्ठितं यत् संसारमण्डलमवेक्ष्य सुशान्तचित्ताः । आत्मानमेव सततं परिभावयन्तो धन्या भवन्ति भुवि नित्यविमुक्तात्मानः ॥ ५ ॥
Hindi Meaning: इस संसार को अज्ञान के कीचड़ से ढका हुआ देखकर भी जो शांत चित्त रहते हैं और निरंतर अपने विशुद्ध आत्म-स्वरूप का ही चिंतन करते हैं, वे नित्य विमुक्त ज्ञानी पुरुष इस पृथ्वी पर धन्य हैं।
English Translation: Beholding this world shrouded in the mire of ignorance, yet remaining serene, perpetually meditating upon their true divine Self, blessed are these eternally liberated souls.
Verse 6 ॥ श्री ॥
देहेऽपि ये विगतदेहधियो विमुक्ताः प्रारब्धकर्मवशतोऽपि न सज्जमानाः । आत्मानुभूतिरसमग्ननिरन्तराभास्ते धन्या भुवि परमानन्दभावितात्मानः ॥ ६ ॥
Hindi Meaning: जो शरीर में रहते हुए भी देहाभिमान से सर्वथा मुक्त हैं, प्रारब्ध कर्मों के आने पर भी उनमें आसक्त नहीं होते और जो आत्म-अनुभूति के दिव्य रस में निरंतर निमग्न रहते हैं, वे पुरुष इस पृथ्वी पर धन्य हैं।
English Translation: Dwelling in the physical body yet free from bodily identification, unattached to the unfolding of destiny, continuously absorbed in the nectar of Self-realization, blessed are they.
Verse 7 ॥ श्री ॥
शान्ता महान्त इह साधव आत्मतृप्ताः शीतं यथा शशधरः प्रतनूकरोति । लोकोपकारकरणाय चरन्ति भूमौ ते धन्या भुवि परमानन्दभावितात्मानः ॥ ७ ॥
Hindi Meaning: जो परम शांत, महान, अपने आत्म-स्वरूप में ही तृप्त रहने वाले हैं, और जैसे चन्द्रमा बिना किसी स्वार्थ के संसार को शीतलता देता है, वैसे ही जो केवल लोकोपकार के लिए पृथ्वी पर विचरते हैं, वे महापुरुष धन्य हैं।
English Translation: Tranquil, noble, fulfilled in the Self, who wander the earth solely for the welfare of humanity just as the moon imparts soothing coolness without desire, blessed are these great souls.
Verse 8 ॥ श्री ॥
संन्यस्तसर्वकरणोपशमाभिमुख्याः प्रत्यग्परे परमशान्तिमवाप्य हृष्टाः । नित्यं प्रकाशपरमामृतपूरपूर्णास्ते धन्या भुवि परमानन्दभावितात्मानः ॥ ८ ॥
Hindi Meaning: जिन्होंने समस्त इन्द्रियों की चंचलता को शांत कर दिया है, जिन्होंने अंतरात्मा में परम शांति प्राप्त कर ली है और जो नित्य ज्ञान-प्रकाश रूपी परम अमृत से परिपूर्ण हैं, वे आत्मज्ञानी इस पृथ्वी पर धन्य हैं।
English Translation: Having stilled all sensory organs, attaining supreme peace in the indwelling Self, brimming with the nectar of eternal illumination, blessed are they in supreme beatitude.
Phalashruti 9 ॥ श्री ॥
धन्याष्टकं पठति यः सततं मनुष्यः संसृतितापशमनाय समाहितात्मा । स प्राप्नुयात्परमहंसपदं प्रशान्तं कैवल्यमुक्तिसुखमक्षयमद्वितीयम् ॥ ९ ॥
Hindi Meaning: संसार के त्रिविध तापों को शांत करने के लिए जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर निरंतर इस धन्याष्टकम का पाठ करता है, वह शांत परमहंस पद को प्राप्त करता है और अक्षय, अद्वितीय कैवल्य मोक्ष का सुख भोगता है।
English Translation: Whoever regularly chants this Dhanya Ashtakam with a concentrated mind to quench worldly suffering attains the tranquil state of Paramahamsa, enjoying eternal non-dual liberation.
✨ Conclusion
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं धन्याष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 Recitation Vidhi & Auspicious Rules

  • 1 प्रातःकाल शांत वातावरण में ध्यान मुद्रा में बैठें।
  • 2 इन्द्रियों और मन को बाह्य प्रपंचों से समेटकर आत्म-स्वरूप का चिंतन करें।
  • 3 शांत चित्त से 'ते धन्या भुवि परमानन्दभावितात्मानः' का मनन करते हुए पाठ करें।

✨ Phalashruti & Divine Benefits

  • ✔ संसार के विषय-भोगों और नश्वर आकर्षणों से चित्त में निर्मल वैराग्य और शांति आती है।
  • ✔ भ्रम, अज्ञान, मृत्यु भय और मानसिक संशय समूल नष्ट होकर आत्मज्ञान का उदय होता है।
  • ✔ साधक को साक्षात् जीवनमुक्ति और परमहंस स्थिति का आध्यात्मिक अनुभव होता है।
🗓️ Auspicious Days: Guru Purnima, Daily mornings, Ekadashi