BHAKTI KI SHAKTI
⚡
⚡ भगवान हनुमान

श्री बजरंग बाण

शत्रु नाश, तंत्र-बाधा, भूत-पिशाच भय और घोर संकटों से तत्काल मुक्ति दिलाने वाला अचूक पाठ।

📅 शुभ दिन: मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
💬
॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥

2

जन के काज विलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥

3

जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा॥

4

आगे जाइ लंकिनी रोकी। मारेहु लात गई सुरलोकी॥

5

जाय विभीषन को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा॥

6

बाग उजारि अक्षय को मारा। कनक लंक जारि संहारा॥

7

लाय संजीवन लखन जियाये। श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥

8

उलटी महोदधि आनि बुझाई। जय जय जय रघुवीर बड़ाई॥

9

अंजनी पुत्र पवनसुत नामा। जय जय जय हनुमंत सुकामा॥

10

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै॥

11

शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जगवंदन॥

12

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥

13

ओम् हनु हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहि मारु बज्र की कीले॥

14

गदा बज्र लै बैरिहि मारो। महाराज प्रभु दास उबारो॥

15

ओंकार हुंकार महा प्रभु धावो। बज्र गदा हनुमंत चलावो॥

16

मारु मारु बैरिन सिर काटो। दुष्टन के अभिमानहिं पाटो॥

17

जैसे लछिमन पर बान चलायो। शक्ति लगी मूर्छित उठि धायो॥

18

तबहीं जाइ संजीवन लाये। प्राण दान लछिमन कहं पाये॥

19

प्रभु कृपाल अब ढील न लावो। मोहि संकट सों बेगि छुड़ावो॥

20

जय जय जय हनुमंत अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा॥

21

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥

22

बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं॥

23

जनकसुता हरि दास कहावो। ताकी शपथ विलंब न लावो॥

24

जय जय जय जय जय हनुमाना। जयति जयति जय कृपा निधाना॥

25

सत्य होहु हरि शपथ पायके। राम दूत धरु धीर आयके॥

26

जय हनुमंत अनंत अगाधा। हरहु कलेश मिटावहु बाधा॥

27

तात मातु गुरु सकल सहाई। जय जय जय जय मारुत राई॥

28

सुमिरत नाम भागि सब जाहीं। भूत पिशाच प्रेत परछाहीं॥

29

इन्हें मारु तहं लेहु निशानी। जय जय जय हनुमंत भवानी॥

30

कपिपति कीन्ह कृपा की काया। राम चरण महं मन ठहराया॥

31

जो जन बजरंग बाण पढ़ावै। ताके तन दुख कबहूँ न आवै॥

32

जादू टोना डाकिनी शाकिनी। भसम होहिं सब देखि प्रकाशिनी॥

33

रोग दोष दरिद्रता छूटे। संकट सब हनुमंत सों टूटे॥

34

उठि प्रभात जो पाठ सुनावै। मनवांछित फल सो नर पावै॥

35

धूप दीप नैवेद्य लगावै। ताके गृह हनुमंत सिधावै॥

36

राम काज कीन्हे बिनु नाहीं। हनुमान प्रभु सुख कहुँ नाहीं॥

37

तुलसीदास सदा रघुराई। जाके हृदय बसहिं हनुमाई॥

38

संकट ते हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

39

सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा॥

40

धूप देय जो जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥

॥ समापन दोहा ॥

प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

🪔

चालीसा पाठ विधि एवं नियम

मंगलवार या शनिवार को लाल वस्त्र धारण करें। हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल या घी का दीपक और सिंदूर अर्पित करें। अत्यंत संकट के समय ही एकाग्रचित्त होकर बजरंग बाण का पाठ करें।

🌟

चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

घोर संकट, असाध्य भय और शत्रु बाधा का तत्काल निवारण होता है। नकारात्मक शक्तियों, भूत-प्रेत और तंत्र-मंत्र के प्रभाव नष्ट होते हैं। असाध्य रोगों और लंबे समय से चली आ रही पीड़ा से मुक्ति मिलती है। आत्मविश्वास, साहस और मानसिक दृढ़ता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।

🔔
दैनिक राशिफल व पंचांग अलर्ट

शुभ मुहूर्त व दैनिक राशिफल पाएं

प्रतिदिन प्रातः अपनी राशि का सटीक दैनिक राशिफल, आज का शुभ चौघड़िया व राहुकाल समय की सूचना सीधे अपने मोबाइल/कंप्यूटर पर प्राप्त करें।

🍪

कुकीज़ व गोपनीयता सहमति (Cookie Consent)

हम आपकी पसंदीदा भाषा, चयनित शहर और पंचांग गणना को सहेजने के लिए आवश्यक कुकीज़ का उपयोग करते हैं।