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BHAKTI KI SHAKTI
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⚔️ माँ चामुंडा देवी

श्री चामुंडा देवी चालीसा

चंड-मुंड और रक्तबीज के संहारक, शत्रुओं का दमन करने वाली परम शक्ति माँ चामुंडा की रक्षा स्तुति।

📅 शुभ दिन: मंगलवार, शुक्रवार, अष्टमी, नवमी, गुप्त व प्रकट नवरात्रि 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

नीलवरण माँ कालिका, रहती सदा प्रचंड।

दस हाथों में शस्त्र धर, देती दुष्ट को दंड॥

मधु कैटभ संहार कर, करी धर्म की जीत।

मेरी भी पीड़ा हरो, हो जो कर्म पुनीत॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

नमस्कार चामुंडा माता। तीनों लोक में विख्याता॥

2

हिमालय में पवित्र धाम है। महाशक्ति तुमको प्रणाम है॥

3

मार्कंडेय ऋषि ने ध्याया। कैसे प्रगटीं भेद बताया॥

4

शुंभ निशुंभ दो दैत्य बलशाली। तीनों लोक जो कर दिए खाली॥

5

वायु अग्नि यम कुबेर संग। सूर्य चंद्र वरुण हुए तंग॥

6

अपमानित चरणों में आए। गिरिराज हिमालय को लाए॥

7

भद्र रौद्र नित ध्याया। चेतन शक्ति करके बुलाया॥

8

क्रोधित होकर काली आई। जिसने अपनी लीला दिखाई॥

9

चंड मुंड और शुंभ पताए। कामुक वैरी लड़ने आए॥

10

पहले सुग्रीव दूत को मारा। भगा चंड भी मारा मारा॥

11

अरबों सैनिक लेकर आया। दसों दिशाओं क्रोध दिखाया॥

12

जैसे ही दुष्ट ललकारा। हुंकार शब्द गुंजा के मारा॥

13

सेना में मचाई भगदड़। फाड़ा सिंह ने आया जो बढ़॥

14

हत्या करने चंड-मुंड आए। मदिरा पीकर के घुर्राए॥

15

चतुरंगिणी सेना संग लाए। ऊंचे ऊंचे शिविर गिराए॥

16

तुमने क्रोधित रूप निकाला। प्रगटीं डाल गले मुंड माला॥

17

चर्म की साड़ी चीते वाली। अस्थि ढांचा था बलशाली॥

18

विकराल मुखी आंखें दिखलाई। रणभूमि में धूम मचाई॥

19

खट्वांग मुक्कों से मारा। ब्रह्मास्त्र ने फेंकी जलधारा॥

20

माहेश्वरी ने त्रिशूल चलाया। माँ वैष्णवी चक्र घुमाया॥

21

कार्तिकेय की शक्ति आई। नारसिंही दैत्यों पे छाई॥

22

चुन-चुन सिंह सभी को खाया। हर दानव घायल घबराया॥

23

रक्तबीज ने माया फैलाई। शक्ति उसने नई दिखाई॥

24

रक्त गिरा जब धरती ऊपर। नया दैत्य प्रगटा था वहीं पर॥

25

चंडी माँ ने शूल घुमाया। मारा उसको लहू चुसाया॥

26

शुंभ निशुंभ अब दौड़े आए। सहस्र सेना भरकर लाए॥

27

वज्रपात संग शूल चलाया। सभी देवता देख घबराए॥

28

ललकारा फिर घूंसा मारा। ले त्रिशूल किया निस्तारा॥

29

शुंभ निशुंभ धरती पर सोए। दैत्य सभी देखकर रोए॥

30

चामुंडा माँ धर्म बचाया। अपना शुभ मंदिर बनवाया॥

31

सभी देवता आके मनाते। हनुमत भैरव चंवर डुलाते॥

32

आश्विन चैत्र नवरात्र आओ। ध्वजा नारियल भेंट चढ़ाओ॥

33

बाणगंगा पावन स्नान कराओ। चामुंडा माँ तुमको ध्याओ॥

34

जो नर भक्ति भाव से गावे। संकट से छुटकारा पावे॥

35

भूत पिशाच निकट नहिं आवे। चामुंडा जब नाम सुनावे॥

36

रोग शोक सब दूर नशावै। सुख संपत्ति घर माही आवै॥

37

पुत्र पौत्र सुख सम्पति पावै। अंत काल सुरपुर को जावै॥

38

जो यह पढ़े चामुंडा चालीसा। होय सिद्ध साक्षी गौरीशा॥

39

अखंड ज्योति जो घर में बारे। ताके सब संताप निवारे॥

40

जय चामुंडा जय जगदम्बा। रक्षा करहु मात अविलम्बा॥

॥ समापन दोहा ॥

शरणागत को शक्ति दो, हे जग की आधार।

भक्ति की नैया डोलती, कर दो भव से पार॥

📖
Vedic Exposition & Meaning · स्तोत्र भावार्थ व संपूर्ण सारांश

Divine Meaning & English Summary of Shri Chamunda Devi Chalisa

This sacred 40-verse hymn is dedicated to Goddess Chamunda Devi, praising their divine attributes, celestial pastimes, and protective boons. Composed in authentic Vedic tradition, it serves as a devotional bridge connecting the human soul to divine grace.

✨ Thematic Verse Journey & Spiritual Essence

✦ Sacred Invocations & Dhyana

Meditates upon the cosmic form, celestial weapons, and luminous aura of Goddess Chamunda Devi.

✦ Divine Feats & Lilas

Sings the heroic and compassionate deeds performed to protect righteousness (Dharma) and liberate devotees.

✦ Blessings & Fruits

Bestows peace, dispels fear, resolves worldly crises, and guides the practitioner toward spiritual bliss.

🌟 Daily Chanting Fruits & Spiritual Benefits (फलश्रुति)

Regular daily recitation with sincere devotion creates a positive energetic vibration, clears ancestral and planetary hurdles, and fills life with auspicious grace.

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

मंगलवार या शुक्रवार की संध्या को लाल आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें। माँ चामुंडा के समक्ष चमेली के तेल अथवा घी का दीपक प्रज्वलित करें। लाल पुष्प व रोली अर्पित कर रक्षा भावना के साथ चालीसा का पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

शत्रु भय, कोर्ट-कचहरी और तांत्रिक उपद्रवों का सर्वथा शमन होता है। अकारण भय व अवसाद दूर होकर आत्मबल और निर्भयता प्राप्त होती है। परिवार की घोर संकटों से रक्षा होती है।