शीश नवाइ गुरु चरण में, बन्दौं खाटू श्याम। कृपा दृष्टि मोहि पर करो, पूरण कीजै काम॥
जय जय श्री खाटू के राजा। सकल काज संवारन साजा॥
दीन दयाल कृपा के सागर। हारे का सहारा सुख आगर॥
भीमसेन के पौत्र कहलाए। घटोत्कच के सुत तुम आए॥
बर्बरीक अति बलवान सुजाना। तीन बाण धारी भगवाना॥
महाभारत में जब प्रण ठाना। हारे का साथ दूँगा माना॥
कृष्ण परीक्षा जब तुम लीन्हा। पीपल पत्ता वेध दिखाइ दीन्हा॥
दान मांगि प्रभु शीश कटायो। धर्म हेतु सब शीश चढ़ायो॥
शीश दान तें श्याम कहाए। कृष्ण रूप तव अंग समाए॥
कलयुग में तुम देव महान। पूजत जग में सकल जहान॥
खाटू नगर में धाम तुम्हारा। राजस्थान में तीर्थ उजियारा॥
श्याम कुण्ड की महिमा भारी। स्नान करत सब पाप दुख हारी॥
फाल्गुन मेला लखि मन मोहै। निशान चढ़ाय भक्त सब सोहै॥
जो जन खाटू धाम को जावै। मनवांछित फल सो नर पावै॥
हारे का तुम हो रखवाला। संकट मोचन दीन दयाला॥
व्यापार में लाभ करावहु। घर में सुख शांति बसावहु॥
ऋण संकट से मोहि उबारो। बिगड़े काज हमारे संवारो॥
संतान हीन को गोदी भरई। श्याम कृपा ते सब दुख टरई॥
रोगी को आरोग्य दिलावहु। निर्धन को धनवान बनावहु॥
दीन मलीन अनाथ पुकारे। आय हरहु प्रभु कष्ट हमारे॥
तुम बिन कोई नहिं रखवाला। सुन लीजै विनती कृपाला॥
नीले घोड़े के असवारा। जय जय जय मोरछड़ी वालारा॥
मोरछड़ी जब शीश फिरावै। भूत पिशाच निकट नहिं आवै॥
श्याम नाम जो नित उच्चारै। सो भव सागर पार उतारै॥
एकादशी को व्रत जो राखै। सो अमृत रस जीवन चाखै॥
कीर्तन में जो नाचे गावै। श्याम कृपा सो निश्चय पावै॥
अहंकार मद लोभ नशावहु। सात्विक भाव हृदय उपजावहु॥
प्रेम भक्ति रस अन्तर नाचे। श्याम नाम जो सांचे बांचे॥
सकल मनोरथ पूरण कीजै। निज पद भक्ति प्रेम रस दीजै॥
जो यह पाठ करै चालीसा। होय प्रसन्न कलयुग के ईशा॥
नित्त नेम करि पाठ सुनावै। सो नर मनवांछित फल पावै॥
अद्भुत महिमा श्याम तिहारी। वंदन करत सकल संसारी॥
खाटू वाले श्याम बिहारी। सुन लीजै विनती हमारी॥
लाज राखि लीजै सुखदाई। शरण तुम्हारी आयो भाई॥
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवै। मंगल मोद प्रमोद बढावै॥
जय जय जय श्री खाटू राजा। पूर्ण करो सब भक्तन काजा॥
सदा रहो मम शीश सहाई। जय जय श्याम कन्हैया नाई॥
आरती करौं तुम्हारी स्वामी। तुम हो घट घट अंतरयामी॥
भक्ति भाव से जो नर ध्यावै। सो निश्चय ही पार लगावै॥
खाटू श्याम चालीसा गाई। तापर श्याम होय सहाई॥
जय श्री श्याम जय श्री श्याम। पूरण कीजै सबके काम॥
खाटू श्याम चालीसा जो, पाठ करै चित लाय। हारे का सहारा मिले, सब दुख दूर पराय॥