BHAKTI KI SHAKTI
🐍
🐍 नाग देवता

श्री नाग चालीसा

कालसर्प दोष निवारण, सर्प भय मुक्ति, भूमि लाभ और भगवान शिव की कृपा हेतु नाग देव की स्तुति।

📅 शुभ दिन: नाग पंचमी, सोमवार 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

श्रीमन्त नाग रूपाय, शिव कंठ सुशोभितम्।

नमामि देव देवाय, कालसर्प निवारकम्॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय नागदेवता भुजंगा। शिव गल सोहत अति रंगा॥

2

सांचे मन जब नाम लेवा। श्री तेजा तारा जगदेवा॥

3

महिमा अपरमपार तिहारी। मनवर दो मोहे इच्छाधारी॥

4

पाताल लोक निवासी स्वामी। सब जीव जन के अंतर्यामी॥

5

घाणा से श्री भैरव छुड़ायो। मां पदमा संग ब्याह रचाये॥

6

श्री विष्णु संग लगन लगाई। वासुकि शेष बन सैया सजाई॥

7

देव दानव जब मथन करायो। तब तुमकों ही रास बनायो॥

8

अमृत मंथन में श्रम कीन्हा। जग हित विष का भार सु लीन्हा॥

9

जब जब नाम करों उच्चारण। रूप अनेक करों प्रभु धारण॥

10

कालसर्प दोष सब टारे। संकट कष्ट विपद संहारे॥

11

रविवार श्री फल जो चढ़ावें। काल सर्प प्रभू दोष छुडावे॥

12

नाग पंचमी दूध पिलावै। मनवांछित फल सो नर पावै॥

13

जन जन मन फैलो अंधियारों। द्वार खड़ो मैं सेवक थारों॥

14

जब तक जीयूँ तुम्हरे गुण गाऊँ। तुम्हरों जस मैं सदा सुनाऊँ॥

15

दया करों पाताल निवासी। दर्शन दो मोहे अंखिया प्यासी॥

16

शेषनाग धरणी धरि राखे। तक्षक वासुकि महिमा भाखे॥

17

कर्कोटक पदम महापद्मा। शंखपाल नमो सुख धर्मा॥

18

अष्ट कुल नाग देवता जय जय। भक्तन के संकट सब क्षय॥

19

भूमि लाभ घर वास सुहावे। पितृ दोष सब दूर नशावे॥

20

विष बाधा नहिं कबहूँ व्यापे। भूत प्रेत भय थर थर कांपे॥

21

शिव के भूषण नाग विशाला। कंठ हार सोहे भुजंगाला॥

22

जो जन नाग चालीसा गावे। ताके सब दुख दूर पराये॥

23

पुत्र पौत्र सुख सम्पति पावे। घर आंगन में खुशियां छावे॥

24

नित उठि जो चालीस दिन ध्यावै। सुख सम्पत्ति वैभव सो पावै॥

25

अगर कपूर सुगंध उड़ावे। धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे॥

26

नाग देवता करहु प्रनामा। पूरण कीजै सब मन कामा॥

27

शरणागत की रक्षा कीजै। अभय दान निज जन को दीजै॥

28

दीन दयाल कृपा के सागर। हम मूरख तुम ज्ञान उजागर॥

29

भूल चूक सब क्षमा करावो। मनवांछित फल शीघ्र दिलावो॥

30

सदा सहाय रहहु सुखदाता। नाग देवता त्रिभुवन त्राता॥

31

रोग शोक भय संकट हारी। जय जय जय नागेश्वर भारी॥

32

जल थल नभ सब व्यापि तिहारी। महिमा गावत सुर नर नारी॥

33

काली दह महं लीला कीन्हीं। कृष्ण चरन रज मस्तक लीन्हीं॥

34

अभय भयौ प्रभु चरण सनेही। नाग देवता परम विदेही॥

35

मन क्रम वचन जो सुमिरन करई। ताके संकट तुरतहिं टरई॥

36

सांप बिच्छू भय पास न आवे। सो नर निर्भय जीवन पावे॥

37

चारों दिशा यश तुम्हरा छाया। अद्भुत है प्रभु तुम्हरी माया॥

38

प्रेम सहित जो पाठ सुनावे। शिव-नागेश्वर कृपा नित पावे॥

39

धूप दीप नैवेद्य संवारे। नाग देवता कष्ट संहारे॥

40

नाग चालीसा जो नित गाये। अंत समय शिव लोक सिधाये॥

॥ समापन दोहा ॥

शांत देव मन शांती दे, जय जय जय नाग रूप।

कालसर्प दोष निवारण, करहु सदा अनूप॥

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

नाग पंचमी या सोमवार को प्रातः स्नान कर तांबे या चांदी के नाग देवता की प्रतिमा पर कच्चा दूध, जल और अक्षत अर्पित करें। चन्दन, पुष्प और धूप-दीप दिखाकर चालीसा का पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

कुंडली में स्थित कालसर्प दोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभावों में कमी आती है। सर्प, बिच्छू व विषैले जंतुओं का भय समाप्त होता है। भूमि, भवन और पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझते हैं। पितृ दोष की शांति होती है और वंश वृद्धि में सहायता मिलती है।

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