BHAKTI KI SHAKTI
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🏹 मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम

श्री राम चालीसा

मर्यादा, पारिवारिक सुख, अजेय विजय व संकट मुक्ति

📅 शुभ दिन: मंगलवार, रविवार व नवमी 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

श्री रघुबीर भक्त हितकारी, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी। निसिदिन ध्यान धरै जो कोई, ता सम धन्य और नहिं होई॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय रघुपति राघव राजा राम। पतित पावन सीताराम॥

2

कौशल्या सुत दशरथ नंदन। जनम लियो प्रभु असुर निकंदन॥

3

विश्वामित्र मुनि जब आए। राम लखन दोउ संग सिधाए॥

4

ताड़का वध कीन्ह रघुराई। सुबाहु मारि यज्ञ करवाई॥

5

जनक जनकपुर में धनु तोड़ा। सीता जी संग नाता जोड़ा॥

6

परशुराम का मान मिटाया। अयोध्या नगर आनंद छाया॥

7

मातु कैकेयी वचन सुहाए। वनवास प्रभु राम सिधाए॥

8

गुह निषाद संग प्रीति बढ़ाई। चित्रकूट में कुटी बनाई॥

9

पंचवटी में बास कियो जब। शूर्पणखा नाक काटी तब॥

10

खर दूषण त्रिशिरा संहारे। रावण मन में क्रोध संवारे॥

11

कपट कुरंग मारीच नसाया। सीता हरन भयो दुख छाया॥

12

जटायु गीध को मुक्ति दीन्हा। शबरी के बेर प्रेम से लीन्हा॥

13

सुग्रीव संग मित्रता कीन्ही। बालि मारि पद सुग्रीवहिं दीन्ही॥

14

सीता खोजि पवनसुत लाए। लंका जारि प्रभु जस गाए॥

15

सेतु बांधि सिंधु तरि आए। रावण सहित असुर संहारे॥

16

विभीषण को लंकापति कीन्हा। सीता संग अयोध्या लीन्हा॥

17

राम राज बैठे त्रिलोका। हर्षित भए गए सब शोका॥

18

दहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि व्यापा॥

19

अल्पायु नहिं कोई नर होई। सब सुंदर सब ज्ञानी सोई॥

20

राम नाम जो नित उच्चारै। सो भव सागर पार उतारै॥

21

राम कृपा जापर हो जाई। ताके संकट सब मिटि जाई॥

22

दीन दयाल विरदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी॥

23

तुम रक्षक काहू को डर ना। सब सुख लहै तुम्हारी सरना॥

24

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥

25

जो यह पाठ करै चित लाई। राम लखन सीता मन भाई॥

26

रोग दोष सब मिटि जावंता। राम नाम जो नित सुमिरंता॥

27

पुत्र पौत्र धन धान्य बढावै। राम कृपा से सब कुछ पावै॥

28

भक्ति भाव से जो नर गावै। अंत काल वैकुण्ठ सिधावै॥

29

अयोध्या धाम की महिमा भारी। सरयू तट सोहत सुखकारी॥

30

राम नाम सम और न नामा। वेद पुराण कहैं अभिरामा॥

31

करहु कृपा रघुनंदन स्वामी। तुम हो घट घट अंतरयामी॥

32

शरण तुम्हारी आयो रघुराई। लाज राखि लीजै सुखदाई॥

33

सकल मनोरथ सिद्ध करावहु। काम क्रोध मद लोभ नशावहु॥

34

निर्मल मन प्रभु मोहि दीजै। अपनौ दास जानि सुख दीजै॥

35

राम चालीसा जो नित ध्यावै। सो जीवन में परम सुख पावै॥

36

दुःख दरिद्र नहिं निकटै आवै। मंगल मोद प्रमोद बढावै॥

37

कोटि जनम के पातक छूटैं। राम नाम से बंधन टूटैं॥

38

जै जै जै रघुबीर गोसाईं। कृपा करहु सब घट में आई॥

39

सदा रहो प्रभु हिय में वासा। पुरवहु दास की सब आसा॥

40

राम चालीसा पाठ समाप्त। राम कृपा ते सब सुख प्राप्त॥

॥ समापन दोहा ॥

राम नाम मनिम दीप धरु, जीह देहरी द्वार। तुलसी भीतर बाहिरहुँ, जौं चाहसि उजियार॥

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

प्रातःकाल स्नान कर पीले या श्वेत वस्त्र धारण करें। प्रभु श्री राम, माता सीता व लक्ष्मण जी की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाएं, पंचामृत व फल अर्पित कर पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

घर में शांति व सुख-समृद्धि, पारिवारिक कलह का निवारण, विपरीत परिस्थितियों में धैर्य व धर्म की विजय, तथा मानसिक संताप से मुक्ति।

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