अनुपम छवि श्री साईं की, ध्यान धरूं मन लाय। संकट मोचन कृपा निधान, सब दुख दूर पराय॥
जय जय जय श्री साईं देवा। सब जन करत तुम्हारी सेवा॥
शिरडी में प्रभु वास कियो जब। दीन दुखी जन तारे तब तब॥
द्वारकामाई आसन साजे। धुनी रमाए प्रभु विराजे॥
उदी तुम्हारी अमृत धारा। रोग शोक मिटावनहारा॥
सबका मालिक एक सिखाया। भेद भाव सब दूर भगाया॥
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई। सबहिं तुम्हारे भाई भाई॥
श्रद्धा और सबुरी बतलाई। जीवन की यह राह दिखाई॥
नीम तले प्रभु प्रगट भए जब। अचम्भा कीन्हो सब जन तब॥
चांद पाटिल की विपत्ति मिटाई। घोड़ी खोई तुरंत मिलाई॥
पानी से जब दीये जलाए। सब जन प्रभु की महिमा गाए॥
दीन मलीन अनाथ सहारा। साईं बाबा तुम हो रखवारा॥
भक्तों के संकट हर लीन्हे। मनवांछित फल सब को दीन्हे॥
काका साहब नाना चन्दोरकर। सेवा कीन्ही सब सुख पाकर॥
हेमाडपंत को आज्ञा दीन्हा। साईं सच्चरित लिखि लीन्हा॥
जो जन शिरडी धाम को जावै। साईं कृपा सो निश्चय पावै॥
समाधि पर जो माथा टेके। ताके संकट प्रभु सब देखे॥
गुरुवार को व्रत जो राखै। सो अमृत फल जीवन चाखै॥
आरती साईं की जो गावै। सुख सम्पति बहु वैभव पावै॥
अन्न दान जो भूखे को देई। साईं कृपा ताके संग होई॥
पशु पक्षी पर दया दिखावहु। साईं प्रेम हृदय बरसावहु॥
काम क्रोध मद लोभ नशावहु। सात्विक भाव हृदय उपजावहु॥
रोग कष्ट सब दूर भगावहु। आरोग्य बल विद्या दिलवावहु॥
संतान हीन को गोदी भरई। साईं कृपा ते सब दुख टरई॥
निर्धन को धनवान बनावहु। बिगड़े काज हमारे संवारो॥
दीन दयाल सुनो विनती हमारी। संकट हरहु हमारे भारी॥
तुम बिन कोई नहिं रखवाला। सुन लीजै विनती कृपाला॥
शिरडी के साईं महाराज। पूर्ण करो सब भक्तन काज॥
सदा रहौं मैं शरण तुम्हारी। रक्षा करहु हे साईं बलिहारी॥
जो यह पाठ करै चालीसा। होय प्रसन्न शिरडी के ईशा॥
नित्त नेम करि पाठ सुनावै। सो नर मनवांछित फल पावै॥
अद्भुत महिमा साईं तिहारी। वंदन करत सकल संसारी॥
कलयुग के तुम सिद्ध अवतारी। भक्त जनों के संकट हारी॥
उदी लगावै माथे जोई। ताके कष्ट न व्यापै कोई॥
मन मंदिर में बास करावहु। पाप ताप संताप नशावहु॥
जय जय जय शिरडी के साईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
प्रेम भक्ति रस अन्तर नाचे। साईं नाम जो सांचे बांचे॥
सकल मनोरथ पूरण कीजै। निज पद भक्ति प्रेम रस दीजै॥
आरोग्य बल विद्या दीजै। दास जानि अपना करि लीजै॥
साईं चालीसा पाठ समाप्ता। सब विधि मंगल होय प्रभाता॥
अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक। साईं बाबा सुख फल दायक॥
साईं चालीसा जो पढ़ै, श्रद्धा भाव लगाय। साईं कृपा से सहज ही, सब संकट मिट जाय॥