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BHAKTI KI SHAKTI
🌿
🌿 माँ शीतला

श्री शीतला चालीसा

समस्त ताप, ज्वर, चेचक व दाह-विकारों का शमन करने वाली करुणामयी शीतला माता की स्तुति।

📅 शुभ दिन: शीतला सप्तमी, शीतला अष्टमी (बसौड़ा), मंगलवार, शुक्रवार 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

जय जय माता शीतला, तुमही धरे जो ध्यान।

होय विमल मति ताहि की, हरहु सकल अज्ञान॥

मार्जनी कलश कर माहिं धर, गर्दभ वाहन सोह।

शीतला माता कृपा करि, हरहु जगत का मोह॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय जय जय शीतला भवानी। तुम समान नहिं दयालु ज्ञानी॥

2

गर्दभ वाहन सोहे माता। भक्तन के सुख की तुम दाता॥

3

मार्जनी कलश कर माहीं सोहे। सूप शीश सब जन मन मोहे॥

4

शीतलता की देवी माता। ताप ज्वर सब दूर नशाता॥

5

चेचक अरु विस्फोटक हारी। संकट मोचन काज संवारी॥

6

बासी भोजन भोग लगावै। शीतला सप्तमी अष्टमी ध्यावै॥

7

शीतल जल से जो नहवावै। ताके तन की तपन बुझावै॥

8

दाह ज्वर सब दूर पलावे। माता जब निज हाथ फिरावे॥

9

बालक की तुम रक्षा करती। ममतामयी माँ संकट हरती॥

10

नीम पात अति प्रिय महरानी। औषध रूप तुम्हारी बानी॥

11

जो जन तोहिं सुमिरे चित लाई। ताके कष्ट निवारहु माई॥

12

नेत्र रोग सब दूर हटावै। काया कंचन सी बन जावै॥

13

फोड़े फुंसी सब मिटि जाहीं। शीतला माता कृपा कराहीं॥

14

महामारी जब जग में छावै। शीतला नामहिं शांति करावै॥

15

दीन दुखी के संकट हरनी। जय जय शीतला मंगल करनी॥

16

सुर नर मुनि सब शीश निवावैं। शीतला अष्टक नित्य सुनावैं॥

17

घर घर पूजित हो जगमाता। जन जन की तुम भाग्य विधाता॥

18

सूप झाड़ू कर में अति पावन। स्वच्छता की देवी मनभावन॥

19

स्वच्छ रहे जो निर्मल मन से। रोग दूर हो जावे तन से॥

20

भक्ति भाव से जो जन गावै। मनवांछित फल सो जन पावै॥

21

बांझन के तुम पुत्र खिलावती। कोढ़ी की सब काया सुधरती॥

22

निर्धन को धनवान बनावती। भटके जन को राह दिखावती॥

23

प्रेम सहित जो पाठ सुनावै। ताके सब संताप नशावै॥

24

प्रातःकाल उठि जो जन ध्यावै। माता का दर्शन फल पावै॥

25

चालीसा जो पढ़े पढ़ावै। सो नर परम सिद्धि को पावै॥

26

जय जय जय शीतला महरानी। कृपा करहु मात वरदानी॥

27

दास जानि मोहिं चरण लगाओ। रोग दोष सब दूर भगाओ॥

28

क्षमा करहु अपराध हमारे। आए हम सब द्वार तुम्हारे॥

29

सदा सहाय रहहु सुखदानी। जय जय शीतला कल्याणी॥

30

शीतल मति शीतल तन कीजै। भक्ति शक्ति का वर मोहिं दीजै॥

31

परिवार में शांति बरसाओ। सब कलह कलेश मिटाओ॥

32

आयु आरोग्य यश बल पावे। जो शीतला चालीसा गावे॥

33

चैत्र मास में जो व्रत राखे। अमृत रस सो रसना चाखे॥

34

ठंडा भोजन जो जन खावे। शीतला माता आशीष पावे॥

35

चारि पदारथ हाथहि आवै। शीतला चालीसा जो ध्यावै॥

36

जय जगदम्बा जय सुखदाता। संकट मोचन शीतला माता॥

37

नमो नमो हे मात भवानी। जयति जयति जननी कल्याणी॥

38

सकल सुमंगल काज संवारे। विपदा हरो कष्ट निवारे॥

39

प्रेम सहित बोलो जयकारा। शीतला मात करे उधारा॥

40

नमो नमो शीतला सुखदानी। जय जय जय माता वरदानी॥

॥ समापन दोहा ॥

शीतला चालीसा पढ़े, जो कोई नियम बनाय।

काया निर्मल सुख मिलै, सब संताप नशाय॥

📖
Vedic Exposition & Meaning · स्तोत्र भावार्थ व संपूर्ण सारांश

Divine Meaning & English Summary of Shri Sheetla Chalisa

This sacred 40-verse hymn is dedicated to Goddess Sheetla, praising their divine attributes, celestial pastimes, and protective boons. Composed in authentic Vedic tradition, it serves as a devotional bridge connecting the human soul to divine grace.

✨ Thematic Verse Journey & Spiritual Essence

✦ Sacred Invocations & Dhyana

Meditates upon the cosmic form, celestial weapons, and luminous aura of Goddess Sheetla.

✦ Divine Feats & Lilas

Sings the heroic and compassionate deeds performed to protect righteousness (Dharma) and liberate devotees.

✦ Blessings & Fruits

Bestows peace, dispels fear, resolves worldly crises, and guides the practitioner toward spiritual bliss.

🌟 Daily Chanting Fruits & Spiritual Benefits (फलश्रुति)

Regular daily recitation with sincere devotion creates a positive energetic vibration, clears ancestral and planetary hurdles, and fills life with auspicious grace.

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

शीतला सप्तमी/अष्टमी (बसौड़ा) अथवा मंगलवार को प्रातः शीतल जल से स्नान करें। माता शीतला के सम्मुख शीतल जल, नीम के पत्ते, दही, राबड़ी व बासी मीठे भात का भोग लगाएं। धूप-दीप न जलाकर केवल कपूर व शीतल जल से अर्घ्य देकर चालीसा का पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

चेचक, खसरा, ज्वर, त्वचा रोग, जलन और संक्रामक बीमारियों से रक्षा होती है। बच्चों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है तथा घर-परिवार में शीतलता, सुख और आरोग्य बना रहता है।