BHAKTI KI SHAKTI
🪷
🪷 भगवान श्री हरि विष्णु

श्री विष्णु चालीसा

संसार के पालनहार की कृपा, मोक्ष, सुख-शांति व पाप मुक्ति

📅 शुभ दिन: गुरुवार एवं सभी एकादशी तिथियां 📜 40 सिद्ध चौपाइयां
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॥ दोहा ॥

जय जय श्री जगपति जगदीशा, जगत नियंता लोक अधिशा। क्षीर सिन्धु वासी कमलासन, जय जय नारायण दुःख नाशन॥

॥ चौपाई (1 से 40) ॥
1

जय जय विष्णु भगवान कृपाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

2

चतुर्भुज रूप मनोहर साजा। शंख चक्र गदा पद्म विराजा॥

3

पीताम्बर तन सोहत नीके। मुकुट भाल छवि जन मन जी के॥

4

गरुड़ वाहन सोहत सुखकारी। जय जय जय सुर मुनि हितकारी॥

5

मत्स्य रूप धरि वेद उबारे। कूर्म रूप धरि मन्दिर संवारे॥

6

वाराह रूप धरि पृथ्वी उठाई। नृसिंह रूप धरि प्रह्लाद बचाई॥

7

वामन रूप धरि बलि छलि लीन्हा। परशुराम रूप क्षत्रिय वधि कीन्हा॥

8

राम रूप धरि रावण मारा। कृष्ण रूप धरि कंस पछारा॥

9

बुद्ध रूप धरि दया सिखाई। कल्कि रूप धरि अधर्म मिटाई॥

10

दस अवतार प्रभु तिहारे। जग के सकल क्लेश निवारे॥

11

शेष शय्या पर शयन कराहीं। लक्ष्मी चरण कमल सहलाहीं॥

12

नाभि कमल तें ब्रह्मा उपजे। सकल सृष्टि की रचना रचे॥

13

दीन बंधु तुम करुणा सागर। सकल कला विद्या के आगर॥

14

जो जन तुमरो ध्यान लगावै। सो नर मनवांछित फल पावै॥

15

एकादशी व्रत जो कोई करई। ताके घर धन धान्य भरई॥

16

बृहस्पतिवार को पूजा ठाने। विष्णु कृपा को सो पहिचाने॥

17

पीत वस्त्र और चंदन प्यारा। तुलसी दल प्रभु को प्राण पियारा॥

18

सत्यनारायण कथा जो गावै। सुख सम्पति बहु वैभव पावै॥

19

पाप ताप सब दूर भगावहु। ज्ञान भक्ति हिय माहिं जगावहु॥

20

रोग शोक सब संकट टारो। बिगड़े काज हमारे संवारो॥

21

शरणागत की रक्षा कीजै। निज पद भक्ति प्रेम रस दीजै॥

22

वैकुण्ठ धाम है वास तिहारा। सुर मुनि गावैं यश उजियारा॥

23

गंगा यमुना सरस्वती गावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥

24

काम क्रोध मद लोभ मिटावहु। मन मंदिर में आन समावहु॥

25

दीन मलीन अनाथ पुकारे। आय हरहु प्रभु कष्ट हमारे॥

26

अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। सब सुख सम्पति तुम ही विधाता॥

27

जो यह पाठ करै चालीसा। होय प्रसन्न जगत के ईशा॥

28

प्रातः समय उठि जो नर गावै। सो भव सागर पार लगावै॥

29

पुत्र हीन को पुत्र दिवावै। निर्धन को धनवान बनावै॥

30

अचल अखंडित भक्ति पावै। अंत काल वैकुण्ठ सिधावै॥

31

विष्णु सहस्त्र नाम जो गावै। सो हरि पद में मुक्ति पावै॥

32

नमो नमो जय नारायण देवा। सुर नर मुनि सब करहिं सेवा॥

33

दया दृष्टि निज हम पर राखो। मधुर वचन अमृत रस भाखो॥

34

अपराध क्षमा कीजै प्रभु मोरे। हम सब बालक सेवक तोरे॥

35

मंगल मूरति मारुति वंदा। जय जय जय श्री कृष्ण मुकुंदा॥

36

सकल मनोरथ सिद्ध करावहु। घर में सुख शांति बसावहु॥

37

विष्णु चालीसा पाठ समाप्ता। सब विधि मंगल होय प्रभाता॥

38

जय जगदीश्वर जय जग त्राता। जय लक्ष्मी पति विश्व विधाता॥

39

कृपा करहु हे कमला कांता। हरहु भक्त के सकल संतापा॥

40

विष्णु चरण में शीश झुकाऊं। जनम जनम प्रभु गुण मैं गाऊं॥

॥ समापन दोहा ॥

नारायण नारायण रटहु, मिटै सकल कलेश। सुख सम्पति पावै सदा, आनन्द रहै हमेश॥

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चालीसा पाठ विधि एवं नियम

गुरुवार अथवा एकादशी के दिन पीले वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, पीला चंदन, तुलसी दल और बेसन के लड्डू या केले का भोग लगाएं। घी का दीपक जलाकर विष्णु चालीसा का पाठ करें।

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चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति, घर में सुख-शांति व समृद्धि, पितृ दोष व गृह क्लेश का निवारण तथा अंत समय में वैकुंठ की प्राप्ति।

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