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BHAKTI KI SHAKTI
🛡️ सद्गुरु / गुरुदेव गुरु गीता / स्कंद पुराण ऋषि: भगवान शिव छंद: त्रिष्टुप्

गुरु कवच

Guru Kavach

सद्गुरु / गुरुदेव का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। ज्ञान, आध्यात्मिक प्रगति, गुरु कृपा व अज्ञान के अंधकार का नाश।

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॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

गुरु कवच मूल श्लोक व भावार्थ

ईश्वर उवाच कवच श्लोक
॥ श्री ईश्वर उवाच ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक ईश्वर उवाच): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse ईश्वर उवाच): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
श्रृणु देवि! प्रवक्ष्यामि गुह्याद्गुह्यतरं महत् । लोकोपकारकं प्रश्नं न केनापि कृतं पुरा ॥ १॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
अद्य प्रभृति कस्यापि न ख्यातं कवचं मया । देशिकाः बहवः सन्ति मन्त्रसाधनतत्पराः ॥ २॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
न तेषां जायते सिद्धिः मन्त्रैर्वा चक्रपूजनैः । गुरोर्विधानं कवचमज्ञात्वा क्रियते जपः । वृथाश्रमो भवेत् तस्य न सिद्धिर्मन्त्रपूजनैः ॥ ३॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4 कवच श्लोक
गुरुपादं पुरस्कृत्य प्राप्यते कवचं शुभम् । तदा मन्त्रस्य यन्त्रस्य सिद्धिर्भवति तत्क्षणात् । सुगोप्यं तु प्रजप्तव्यं न वक्तव्यं वरानने ॥ ४॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
विनियोगः कवच श्लोक
॥ विनियोगः ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
विनियोगः कवच श्लोक
ॐ नमोऽस्य श्रीगुरुकवचनाममन्त्रस्य परमब्रह्म ऋषिः सर्ववेदानुज्ञो देवदेवो श्री आदिशिवः देवता नमो हसौं हंसः ह-स-क्ष-म-ल-व-र-यूं सोऽहं हंसः बीजंस-ह-क्ष-म-ल-व-र-यीं शक्तिः हंसः सोऽहं कीलकं समस्तश्रीगुरुमण्डलप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः । ॥ ऋष्यादिन्यासः ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
विनियोगः कवच श्लोक
श्रीपरमब्रह्मर्षये नमः शिरसि । सर्ववेदानुज्ञदेवदेव श्री आदिशिवदेवतायै नमः हृदि । नमः हसौं हंसः ह-स-क्ष-म-ल-व-र-यूं सोऽहं हंसः बीजाय नमः गुह्ये । स-ह-क्ष-म-ल-व-र-यीं शक्तये नमः नाभौ । हंसः सोऽहं कीलकाय नमः पादयोः । समस्तश्रीगुरुमण्डलप्रीत्यर्थे जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ । ॥ अथ षडङ्गन्यासः ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
करन्यासः कवच श्लोक
ॐ हसाम् । ॐ हसीम् । ॐ हसूम् । ॐ हसैम् । ॐ हसौम् । ॐ हसः । ॥ अथ करन्यासः ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक करन्यासः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse करन्यासः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
अंगन्यासः कवच श्लोक
ॐ हसां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । ॐ हसीं तर्जनीभ्यां नमः । ॐ हसूं मध्यमाभ्यां नमः । ॐ हसैं अनामिकाभ्यां नमः । ॐ हसौं कनिष्ठाभ्यां नमः । ॐ हसः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । ॥ अथ अङ्गन्यासः ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक अंगन्यासः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse अंगन्यासः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
ध्यानम् कवच श्लोक
ॐ हसां हृदयाय नमः । ॐ हसीं शिरसे स्वाहा । ॐ हसूं शिखायै वषट् । ॐ हसैं कवचाय हुं । ॐ हसौं नेत्रत्रयाय वौषट् । ॐ हसः अस्त्राय फट् । ॥ ध्यानम् ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक ध्यानम्): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse ध्यानम्): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5 कवच श्लोक
श्रीसिद्धमानवमुखा गुरवः स्वरूपं संसारदाहशमनं द्विभुजं त्रिनेत्रम् । वामाङ्गशक्तिसकलाभरणैर्विभूषं ध्यायेज्जपेत् सकलसिद्धिफलप्रदं च ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6 कवच श्लोक
॥ मानसपूजन ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7 कवच श्लोक
लं पृथिव्यात्मकं गन्धतन्मात्रप्रकृत्यात्मकं गन्धं सशक्तिकाय श्रीगुरवे समर्पयामि नमः । हं आकाशात्मकं शब्दतन्मात्रप्रकृत्यात्मकं पुष्पं सशक्तिकाय श्रीगुरवे समर्पयामि नमः । यं वाय्वात्मकं स्पर्शतन्मात्रप्रकृत्यात्मकं धूपं सशक्तिकाय श्रीगुरवे घ्रापयामि नमः । रं वह्न्यात्मकं रूपतन्मत्रप्रकृत्यात्मकं दीपं सशक्तिकाय श्रीगुरवे समर्पयामि नमः । वं अमृतात्मकं रसतन्मात्रप्रकृत्यात्मकं नैवेद्यं सशक्तिकाय श्रीगुरवे समर्पयामि नमः । सं सर्वात्मिकां ताम्बूलादिसर्वोपचार पूजांसशक्तिकाय श्रीगुरवे समर्पयामि नमः । ॥ कवचस्तोत्रम् ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
ॐ नमः प्रकाशानन्दनाथः तु शिखायां पातु मे सदा । परशिवानन्दनाथः शिरो मे रक्षयेत् सदा ॥ १॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
परशक्तिदिव्यानन्दनाथो भाले च रक्षतु । कामेश्वरानन्दनाथो मुखं रक्षतु सर्वधृक् ॥ २॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
दिव्यौघो मस्तकं देवि! पातु सर्वशिरः सदा । कण्ठादिनाभिपर्यन्तं सिद्धौघा गुरवः प्रिये ॥ ३॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4 कवच श्लोक
भोगानन्दनाथ गुरुः पातु दक्षिणबाहुकम् । समयानन्दनाथश्च सन्ततं हृदयेऽवतु ॥ ४॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5 कवच श्लोक
सहजानन्दनाथश्च कटिं नाभिं च रक्षतु । एष स्थानेषु सिद्धौघाः रक्षन्तु गुरवः सदा ॥ ५॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6 कवच श्लोक
अधरे मानवौघाश्च गुरवः कुलनायिके ! गगनानन्दनाथश्च गुल्फयोः पातु सर्वदा ॥ ६॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7 कवच श्लोक
नीलौघानन्दनाथश्च रक्षयेत् पादपृष्ठतः । स्वात्मानन्दनाथगुरुः पादाङ्गुलीश्च रक्षतु ॥ ७॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8 कवच श्लोक
कन्दोलानन्दनाथश्च रक्षेत् पादतले सदा । इत्येवं मानवौघाश्च न्यसेन्नाभ्यादिपादयोः ॥ ८॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9 कवच श्लोक
गुरुर्मे रक्षयेदुर्व्यां सलिले परमो गुरुः । परापरगुरुर्वह्नौ रक्षयेत् शिववल्लभे ॥ ९॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 10 कवच श्लोक
परमेष्ठीगुरुश्चैव रक्षयेत् वायुमण्डले । शिवादिगुरवः साक्षात् आकाशे रक्षयेत् सदा ॥ १०॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 10): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 10): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 11 कवच श्लोक
इन्द्रो गुरुः पातु पूर्वे आग्नेयां गुरुरग्नयः । दक्षे यमो गुरुः पातु नैऋत्यां निऋतिर्गुरुः ॥ ११॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 11): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 11): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 12 कवच श्लोक
वरुणो गुरुः पश्चिमे वायव्यां मारुतो गुरुः । उत्तरे धनदः पातु ऐशान्यामीश्वरो गुरुः ॥ १२॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 12): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 12): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 13 कवच श्लोक
ऊर्ध्वं पातु गुरुर्ब्रह्मा अनन्तो गुरुरप्यधः । एवं दशदिशः पान्तु इन्द्रादिगुरवः क्रमात् ॥ १३॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 13): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 13): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 14 कवच श्लोक
शिरसः पादपर्यन्तं पान्तु दिव्यौघसिद्धयः । मानवौघाश्च गुरवो व्यापकं पान्तु सर्वदा ॥ १४॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 14): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 14): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 15 कवच श्लोक
सर्वत्र गुरुरूपेण संरक्षेत् साधकोत्तमम् । आत्मानं गुरुरूपं च ध्यायेन् मन्त्रं सदा बुधः ॥ १५॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 15): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 15): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
फलश्रुतिः कवच श्लोक
॥ फलश्रुतिः ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक फलश्रुतिः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse फलश्रुतिः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 1 कवच श्लोक
इत्येवं गुरुकवचं ब्रह्मलोकेऽपि दुर्लभम् । तव प्रीत्या मया ख्यातं न कस्य कथितं प्रिये ॥ १॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2 कवच श्लोक
पूजाकाले पठेद् यस्तु जपकाले विशेषतः । त्रैलोक्यदुर्लभं देवि । भुक्तिमुक्तिफलप्रदम् ॥ २॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3 कवच श्लोक
सर्वमन्त्रफलं तस्य सर्वयन्त्रफलं तथा । सर्वतीर्थफलं देवि । यः पठेत् कवचं गुरोः ॥ ३॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4 कवच श्लोक
अष्टगन्धेन भूर्जे च लिख्यते चक्रसंयुतम् । कवचं गुरुपङ्क्तेस्तु भक्त्या च शुबवासरे ॥ ४॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5 कवच श्लोक
पूजयेत् धूपदीपाद्यैः सुधाभिः सितसंयुतैः । तर्पयेत् गुरुमन्त्रेण साधकः शुद्धचेतसा ॥ ५॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6 कवच श्लोक
धारयेत् कवचं देवि! इह भूतभयापहम् । पठेन्मन्त्री त्रिकालं हि स मुक्तो भवबन्धनात् । एवं कवचं परमं दिव्यसिद्धौघकलावान् ॥ ६॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति कवच श्लोक
॥ इति श्री गुरु कवच सम्पूर्णम् ॥
सरल भावार्थ: गुरु कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation: Guru Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: गुरुवार, गुरु पूर्णिमा

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर सद्गुरु / गुरुदेव का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. गुरु कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ ज्ञान, आध्यात्मिक प्रगति, गुरु कृपा व अज्ञान के अंधकार का नाश।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
गुरु कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से ज्ञान, आध्यात्मिक प्रगति, गुरु कृपा व अज्ञान के अंधकार का नाश। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
गुरु कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः गुरुवार, गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
गुरु कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत गुरु गीता / स्कंद पुराण है। इसके ऋषि भगवान शिव एवं देवता सद्गुरु / गुरुदेव हैं।

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