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श्रीकृष्ण / ब्रह्माण्ड नायक
ब्रह्मवैवर्त पुराण
ऋषि: भगवान नारायण
छंद: गायत्री
कृष्ण ब्रह्माण्ड कवच
Krishna Brahmanda Kavach
श्रीकृष्ण / ब्रह्माण्ड नायक का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। समस्त ब्रह्मांडीय शक्तियों से रक्षा, संतान सुख व परम मोक्ष।
फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥
कृष्ण ब्रह्माण्ड कवच मूल श्लोक व भावार्थ
श्लोक 1
कवच श्लोक
ॐ अस्य श्री कृष्ण ब्रह्माण्ड कवचस्य भगवान नारायण ऋषिः । गायत्री छन्दः । श्री श्रीकृष्ण / ब्रह्माण्ड नायक देवता । मम सर्वतो रक्षणार्थे जपे विनियोगः ॥
Oṃ asya śrī Krishna Brahmanda Kavachsya भगवान नारायण ṛṣiḥ | गायत्री chandaḥ | Śrī Lord Krishna devatā | Mama sarvato rakṣaṇārthe jape viniyogaḥ ||
सरल भावार्थ:
इस पावन कृष्ण ब्रह्माण्ड कवच के ऋषि भगवान नारायण हैं, छंद गायत्री है, तथा इष्ट देवता श्रीकृष्ण / ब्रह्माण्ड नायक हैं। सब ओर से रक्षा हेतु इस कवच का पाठ किया जाता है।
English Translation:
Of this sacred Krishna Brahmanda Kavach, the seer is भगवान नारायण, the metre is गायत्री, and the presiding deity is Lord Krishna. It is recited for absolute divine protection.
श्लोक 2
कवच श्लोक
ॐ श्रीकृष्ण / ब्रह्माण्ड नायक शिरः पातु भालं पातु महेश्वरी ।
नेत्रे पातु जगद्धात्री कर्णौ पातु सुरार्चिता ॥
नासां पातु महादेवी मुखं पातु सरस्वती ।
कण्ठं पातु वरारोहा हृदयं पातु वैष्णवी ॥
Oṃ Lord Krishna śiraḥ pātu bhālaṃ pātu maheśvarī |
Netre pātu jagaddhātrī karṇou pātu surārcitā ||
Nāsāṃ pātu mahādevī mukhaṃ pātu sarasvatī |
Kaṇṭhaṃ pātu varārohā hṛdayaṃ pātu vaiṣṇavī ||
सरल भावार्थ:
श्रीकृष्ण / ब्रह्माण्ड नायक मेरे मस्तक की रक्षा करें, ललाट की रक्षा करें, नेत्रों व कानों की रक्षा करें। नासिका, मुख, कंठ और हृदय की निरंतर रक्षा करें।
English Translation:
May Lord Krishna protect my head and forehead; may the divine protector safeguard my eyes, ears, speech, throat, and spiritual heart.
श्लोक 3
कवच श्लोक
य इदं धारयेन्मर्त्यः कवचं सर्वमङ्गलम् ।
न तस्य जायते क्वापि भयं विघ्नं पराभवः ॥
सर्वान्कामानवाप्नोति जीवन्मुक्तः स मानवः ॥
Ya idaṃ dhārayenmartyaḥ kavacaṃ sarvamaṅgalam |
Na tasya jāyate kvāpi bhayaṃ vighnaṃ parābhavaḥ ||
Sarvānkāmānavāpnoti jīvanmuktaḥ sa mānavaḥ ||
सरल भावार्थ:
जो मनुष्य इस सर्वमंगलकारी कवच का नित्य पाठ अथवा धारण करता है, उसे कहीं भी भय, विघ्न या पराजय का सामना नहीं करना पड़ता। वह समस्त कामनाएं प्राप्त करता है।
English Translation:
Whosoever recites or wears this auspicious Kavach encounters no terror, obstacles, or defeat anywhere. He attains fulfillment of all desires.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
बुधवार, अष्टमी (जन्माष्टमी)
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
- पूजा वेदी पर श्रीकृष्ण / ब्रह्माण्ड नायक का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
- कृष्ण ब्रह्माण्ड कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
- पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:
- ✔ समस्त ब्रह्मांडीय शक्तियों से रक्षा, संतान सुख व परम मोक्ष।
- ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
- ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृष्ण ब्रह्माण्ड कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
कृष्ण ब्रह्माण्ड कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से समस्त ब्रह्मांडीय शक्तियों से रक्षा, संतान सुख व परम मोक्ष। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
कृष्ण ब्रह्माण्ड कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः बुधवार, अष्टमी (जन्माष्टमी) के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
कृष्ण ब्रह्माण्ड कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत ब्रह्मवैवर्त पुराण है। इसके ऋषि भगवान नारायण एवं देवता श्रीकृष्ण / ब्रह्माण्ड नायक हैं।