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BHAKTI KI SHAKTI
🛡️ मां तारा देवी बृहन्नील तंत्र ऋषि: अक्षोभ्य छंद: त्रिष्टुप्

माँ तारा कवच

Maa Tara Kavach

मां तारा देवी का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। घोर संकट से तारने वाली, वाक्-सिद्धि, ज्ञान व मोक्ष प्रदाता।

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॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

माँ तारा कवच मूल श्लोक व भावार्थ

श्लोक 1 कवच श्लोक
ॐ अस्य श्री माँ तारा कवचस्य अक्षोभ्य ऋषिः । त्रिष्टुप् छन्दः । श्री मां तारा देवी देवता । मम सर्वतो रक्षणार्थे जपे विनियोगः ॥
Oṃ asya śrī Maa Tara Kavachsya अक्षोभ्य ṛṣiḥ | त्रिष्टुप् chandaḥ | Śrī Maa Tara devatā | Mama sarvato rakṣaṇārthe jape viniyogaḥ ||
सरल भावार्थ: इस पावन माँ तारा कवच के ऋषि अक्षोभ्य हैं, छंद त्रिष्टुप् है, तथा इष्ट देवता मां तारा देवी हैं। सब ओर से रक्षा हेतु इस कवच का पाठ किया जाता है।
English Translation: Of this sacred Maa Tara Kavach, the seer is अक्षोभ्य, the metre is त्रिष्टुप्, and the presiding deity is Maa Tara. It is recited for absolute divine protection.
श्लोक 2 कवच श्लोक
ॐ मां तारा देवी शिरः पातु भालं पातु महेश्वरी । नेत्रे पातु जगद्धात्री कर्णौ पातु सुरार्चिता ॥ नासां पातु महादेवी मुखं पातु सरस्वती । कण्ठं पातु वरारोहा हृदयं पातु वैष्णवी ॥
Oṃ Maa Tara śiraḥ pātu bhālaṃ pātu maheśvarī | Netre pātu jagaddhātrī karṇou pātu surārcitā || Nāsāṃ pātu mahādevī mukhaṃ pātu sarasvatī | Kaṇṭhaṃ pātu varārohā hṛdayaṃ pātu vaiṣṇavī ||
सरल भावार्थ: मां तारा देवी मेरे मस्तक की रक्षा करें, ललाट की रक्षा करें, नेत्रों व कानों की रक्षा करें। नासिका, मुख, कंठ और हृदय की निरंतर रक्षा करें।
English Translation: May Maa Tara protect my head and forehead; may the divine protector safeguard my eyes, ears, speech, throat, and spiritual heart.
श्लोक 3 कवच श्लोक
य इदं धारयेन्मर्त्यः कवचं सर्वमङ्गलम् । न तस्य जायते क्वापि भयं विघ्नं पराभवः ॥ सर्वान्कामानवाप्नोति जीवन्मुक्तः स मानवः ॥
Ya idaṃ dhārayenmartyaḥ kavacaṃ sarvamaṅgalam | Na tasya jāyate kvāpi bhayaṃ vighnaṃ parābhavaḥ || Sarvānkāmānavāpnoti jīvanmuktaḥ sa mānavaḥ ||
सरल भावार्थ: जो मनुष्य इस सर्वमंगलकारी कवच का नित्य पाठ अथवा धारण करता है, उसे कहीं भी भय, विघ्न या पराजय का सामना नहीं करना पड़ता। वह समस्त कामनाएं प्राप्त करता है।
English Translation: Whosoever recites or wears this auspicious Kavach encounters no terror, obstacles, or defeat anywhere. He attains fulfillment of all desires.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: शुक्रवार, अष्टमी

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर मां तारा देवी का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. माँ तारा कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ घोर संकट से तारने वाली, वाक्-सिद्धि, ज्ञान व मोक्ष प्रदाता।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माँ तारा कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
माँ तारा कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से घोर संकट से तारने वाली, वाक्-सिद्धि, ज्ञान व मोक्ष प्रदाता। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
माँ तारा कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः शुक्रवार, अष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
माँ तारा कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत बृहन्नील तंत्र है। इसके ऋषि अक्षोभ्य एवं देवता मां तारा देवी हैं।

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