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महायक्षिणी देवी
उड्डामरेश्वर तंत्र
ऋषि: ईश्वर
छंद: अनुष्टुप्
महायक्षिणी कवच
Mahayakshini Kavach
महायक्षिणी देवी का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। अकूत धन, गड़ा धन, गुप्त विद्या व आर्थिक विपन्नता का नाश।
फॉन्ट आकार:
॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥
महायक्षिणी कवच मूल श्लोक व भावार्थ
श्लोक संख्या 1
कवच श्लोक
॥ श्री उन्मत्त-भैरव उवाच ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 1): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 1): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 2
कवच श्लोक
श्रृणु कल्याणि ! मद्-वाक्यं, कवचं देव-दुर्लभं ।
यक्षिणी-नायिकानां तु,संक्षेपात् सिद्धि-दायकं ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 2): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 2): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 3
कवच श्लोक
हे कल्याणि ! देवताओं को दुर्लभ, संक्षेप (शीघ्र) में सिद्धि देने वाले,
यक्षिणी आदि नायिकाओं के कवच को सुनो –
ज्ञान-मात्रेण देवशि ! सिद्धिमाप्नोति निश्चितं ।
यक्षिणि स्वयमायाति,
॥ कवच-ज्ञान-मात्रतः ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 3): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 3): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 4
कवच श्लोक
हे देवशि ! इस कवच के ज्ञान-मात्र से यक्षिणी स्वयं आ जाती है और निश्चय
ही सिद्धि मिलती है। सर्वत्र दुर्लभं देवि ! डामरेषु प्रकाशितं । पठनात् धारणान्मर्त्यो,
॥ यक्षिणी-वशमानयेत् ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 4): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 4): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
विनियोगः
कवच श्लोक
हे देवि ! यह कवच सभी शास्त्रों में दुर्लभ है, केवल डामर-तन्त्रों में
प्रकाशित किया गया है । इसके पाठ और लिखकर धारण करने से यक्षिणी वश में होती है ।
विनियोग :-
ॐ अस्य श्रीयक्षिणी-कवचस्य श्रीगर्ग ऋषिः, गायत्री छन्दः,
श्री अमुकी यक्षिणी देवता, साक्षात् सिद्धि-समृद्धयर्थे पाठे विनियोगः ।
ऋष्यादिन्यासः-
श्रीगर्ग ऋषये नमः शिरसि,
गायत्री छन्दसे नमः मुखे,
श्री अमुकी यक्षिणी देवतायै नमः हृदि,
साक्षात् सिद्धि-समृद्धयर्थे पाठे
विनियोगाय नमः सर्वांगे।
॥ मूल पाठ ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक विनियोगः): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse विनियोगः): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 5
कवच श्लोक
शिरो मे यक्षिणी पातु, ललाटं यक्ष-कन्यका ।
मुखं श्री धनदा पातु, कर्णौ मे कुल-नायिका ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 5): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 5): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 6
कवच श्लोक
चक्षुषी वरदा पातु, नासिकां भक्त-वत्सला ।
केशाग्रं पिंगला पातु, धनदा श्रीमहेश्वरी ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 6): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 6): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 7
कवच श्लोक
स्कन्धौ कुलालपा पातु, गलं मे कमलानना ।
किरातिनी सदा पातु, भुज-युग्मं जटेश्वरी ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 7): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 7): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 8
कवच श्लोक
विकृतास्या सदा पातु, महा-वज्र-प्रिया मम ।
अस्त्र-हस्ता पातु नित्यं, पृष्ठमुदर-देशकम् ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 8): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 8): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 9
कवच श्लोक
भेरुण्डा माकरी देवी, हृदयं पातु सर्वदा ।
अलंकारान्विता पातु, मे नितम्ब-स्थलं दया ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 9): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 9): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 10
कवच श्लोक
धार्मिका गुह्यदेशं मे, पाद-युग्मं सुरांगना ।
शून्यागारे सदा पातु, मन्त्र-माता-स्वरुपिणी ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 10): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 10): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 11
कवच श्लोक
निष्कलंका सदा पातु, चाम्बुवत्यखिलं तनुं ।
प्रान्तरे धनदा पातु, निज-बीज-प्रकाशिनी ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 11): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 11): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 12
कवच श्लोक
लक्ष्मी-बीजात्मिका पातु, खड्ग-हस्ता श्मशानके ।
शून्यागारे नदी-तीरे, महा-यक्षेश-कन्यका ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 12): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 12): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 13
कवच श्लोक
पातु मां वरदाख्या मे, सर्वांगं पातु मोहिनी ।
महा-संकट-मध्ये तु, संग्रामे रिपु-सञ्चये ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 13): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 13): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 14
कवच श्लोक
क्रोध-रुपा सदा पातु, महा-देव निषेविका ।
सर्वत्र सर्वदा पातु, भवानी कुल-दायिका ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 14): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 14): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 15
कवच श्लोक
इत्येतत् कवचं देवि ! महा-यक्षिणी-प्रीतिवं ।
अस्यापि स्मरणादेव, राजत्वं लभतेऽचिरात् ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 15): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 15): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 16
कवच श्लोक
पञ्च-वर्ष-सहस्राणि, स्थिरो भवति भू-तले ।
वेद-ज्ञानी सर्व-शास्त्र-वेत्ता भवति निश्चितम् ।
अरण्ये सिद्धिमाप्नोति, महा-कवच-पाठतः ।
यक्षिणी कुल-विद्या च, समायाति सु-सिद्धदा ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 16): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 16): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 17
कवच श्लोक
अणिमा-लघिमा-प्राप्तिः सुख-सिद्धि-फलं लभेत् ।
पठित्वा धारयित्वा च, निर्जनेऽरण्यमन्तरे ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 17): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 17): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 18
कवच श्लोक
स्थित्वा जपेल्लक्ष-मन्त्र मिष्ट-सिद्धिं लभेन्निशि ।
भार्या भवति सा देवी, महा-कवच-पाठतः ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 18): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 18): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
श्लोक संख्या 19
कवच श्लोक
ग्रहणादेव सिद्धिः स्यान्, नात्र कार्या विचारणा ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक 19): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse 19): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
समाप्ति
कवच श्लोक
॥ इति वृहद् भूत डामरे महातन्त्रे श्रीमदुन्मत्त भैरवी-भैरव सम्वादे यक्षिणी कवच संपूर्ण ॥
सरल भावार्थ:
महायक्षिणी कवच (श्लोक समाप्ति): पावन रक्षा मन्त्र व दिव्य सुरक्षा कवच।
English Translation:
Mahayakshini Kavach (Verse समाप्ति): Sacred protective armor verse invoking divine shielding.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
शुक्रवार
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
- पूजा वेदी पर महायक्षिणी देवी का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
- महायक्षिणी कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
- पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:
- ✔ अकूत धन, गड़ा धन, गुप्त विद्या व आर्थिक विपन्नता का नाश।
- ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
- ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महायक्षिणी कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
महायक्षिणी कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से अकूत धन, गड़ा धन, गुप्त विद्या व आर्थिक विपन्नता का नाश। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
महायक्षिणी कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः शुक्रवार के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
महायक्षिणी कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत उड्डामरेश्वर तंत्र है। इसके ऋषि ईश्वर एवं देवता महायक्षिणी देवी हैं।