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🛡️ मां सिद्धिदात्री (नवम दुर्गा) मार्कण्डेय पुराण ऋषि: ब्रह्मा छंद: अनुष्टुप्

सिद्धिदात्री देवी कवच

Siddhidatri Devi Kavach

मां सिद्धिदात्री (नवम दुर्गा) का यह परम दिव्य कवच साधक के सभी अंगों और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र की रक्षा करता है। अणिमा, महिमा आदि अष्ट सिद्धियों व सर्व मनोकामनाओं की पूर्ति।

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॥ मूल कवच पाठ व भावार्थ ॥

सिद्धिदात्री देवी कवच मूल श्लोक व भावार्थ

श्लोक 1 कवच श्लोक
ॐ अस्य श्री सिद्धिदात्री देवी कवचस्य ब्रह्मा ऋषिः । अनुष्टुप् छन्दः । श्री मां सिद्धिदात्री (नवम दुर्गा) देवता । मम सर्वतो रक्षणार्थे जपे विनियोगः ॥
Oṃ asya śrī Siddhidatri Devi Kavachsya ब्रह्मा ṛṣiḥ | अनुष्टुप् chandaḥ | Śrī Maa Siddhidatri devatā | Mama sarvato rakṣaṇārthe jape viniyogaḥ ||
सरल भावार्थ: इस पावन सिद्धिदात्री देवी कवच के ऋषि ब्रह्मा हैं, छंद अनुष्टुप् है, तथा इष्ट देवता मां सिद्धिदात्री (नवम दुर्गा) हैं। सब ओर से रक्षा हेतु इस कवच का पाठ किया जाता है।
English Translation: Of this sacred Siddhidatri Devi Kavach, the seer is ब्रह्मा, the metre is अनुष्टुप्, and the presiding deity is Maa Siddhidatri. It is recited for absolute divine protection.
श्लोक 2 कवच श्लोक
ॐ मां सिद्धिदात्री (नवम दुर्गा) शिरः पातु भालं पातु महेश्वरी । नेत्रे पातु जगद्धात्री कर्णौ पातु सुरार्चिता ॥ नासां पातु महादेवी मुखं पातु सरस्वती । कण्ठं पातु वरारोहा हृदयं पातु वैष्णवी ॥
Oṃ Maa Siddhidatri śiraḥ pātu bhālaṃ pātu maheśvarī | Netre pātu jagaddhātrī karṇou pātu surārcitā || Nāsāṃ pātu mahādevī mukhaṃ pātu sarasvatī | Kaṇṭhaṃ pātu varārohā hṛdayaṃ pātu vaiṣṇavī ||
सरल भावार्थ: मां सिद्धिदात्री (नवम दुर्गा) मेरे मस्तक की रक्षा करें, ललाट की रक्षा करें, नेत्रों व कानों की रक्षा करें। नासिका, मुख, कंठ और हृदय की निरंतर रक्षा करें।
English Translation: May Maa Siddhidatri protect my head and forehead; may the divine protector safeguard my eyes, ears, speech, throat, and spiritual heart.
श्लोक 3 कवच श्लोक
य इदं धारयेन्मर्त्यः कवचं सर्वमङ्गलम् । न तस्य जायते क्वापि भयं विघ्नं पराभवः ॥ सर्वान्कामानवाप्नोति जीवन्मुक्तः स मानवः ॥
Ya idaṃ dhārayenmartyaḥ kavacaṃ sarvamaṅgalam | Na tasya jāyate kvāpi bhayaṃ vighnaṃ parābhavaḥ || Sarvānkāmānavāpnoti jīvanmuktaḥ sa mānavaḥ ||
सरल भावार्थ: जो मनुष्य इस सर्वमंगलकारी कवच का नित्य पाठ अथवा धारण करता है, उसे कहीं भी भय, विघ्न या पराजय का सामना नहीं करना पड़ता। वह समस्त कामनाएं प्राप्त करता है।
English Translation: Whosoever recites or wears this auspicious Kavach encounters no terror, obstacles, or defeat anywhere. He attains fulfillment of all desires.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: नवरात्रि नवमी

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र (श्वेत/पीत/रक्त) धारण करें।
  2. पूजा वेदी पर मां सिद्धिदात्री (नवम दुर्गा) का ध्यान कर शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  3. हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर आत्मरक्षा व सर्वकल्याण का संकल्प लें।
  4. सिद्धिदात्री देवी कवच का एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट व शांत स्वर में पाठ करें।
  5. पाठ के उपरांत आरती अथवा क्षमा प्रार्थना कर प्रसाद वितरित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं रक्षा लाभ:

  • ✔ अणिमा, महिमा आदि अष्ट सिद्धियों व सर्व मनोकामनाओं की पूर्ति।
  • ✔ आकस्मिक संकटों, दुर्घटनाओं, नजर दोष व नकारात्मक शक्तियों से पूर्ण रक्षा होती है।
  • ✔ मानसिक शांति, आत्मविश्वास व पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धिदात्री देवी कवच का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
सिद्धिदात्री देवी कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से अणिमा, महिमा आदि अष्ट सिद्धियों व सर्व मनोकामनाओं की पूर्ति। तथा साधक के चारों ओर एक अभेद्य दैवीय सुरक्षा चक्र निर्मित होता है।
सिद्धिदात्री देवी कवच का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः नवरात्रि नवमी के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ है।
सिद्धिदात्री देवी कवच का प्रामाणिक स्रोत क्या है?
इस पवित्र कवच का प्रामाणिक स्रोत मार्कण्डेय पुराण है। इसके ऋषि ब्रह्मा एवं देवता मां सिद्धिदात्री (नवम दुर्गा) हैं।

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