📿
भगवान हनुमान
सुदर्शन संहिता / पराशर संहिता
ऋषि: अगस्त्य
छंद: अनुष्टुप्
हनुमान सहस्रनाम
Hanuman Sahasranama
भगवान हनुमान के 1000 पावन नामों का यह दिव्य सहस्रनाम सनातन धर्म का अमूल्य रत्न है। भयमुक्ति, शनि पीड़ा शमन, शारीरिक बल, साहस व विजय।
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॥ मूल सहस्रनाम पाठ व भावार्थ ॥
हनुमान सहस्रनाम मूल श्लोक व भावार्थ
मङ्गलाचरणम् एवं ध्यानम्
सहस्रनाम श्लोक
ॐ अस्य श्रीहनुमत्सहस्रनामस्तोत्रमहामन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः । अनुष्टुप् छन्दः । श्रीहनुमान् परमात्मा देवता । मारुतात्मज इति बीजम् । अञ्जनासूनुरिति शक्तिः । वायुपुत्र इति कीलकम् । श्रीहनुमत्प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ॥
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥
Om asya śrīhanumatsahasranāmastotramahāmantrasya śrīrāmacandra ṛṣiḥ | anuṣṭup chandaḥ | śrīhanumān paramātmā devatā ||
सरल भावार्थ:
श्री हनुमान सहस्रनाम स्तोत्रम् (रुद्रसंहिता एवं पराशर संहिता) (मङ्गलाचरणम् एवं ध्यानम्): पावन वेदोक्त व पौराणिक पाठ।
English Translation:
श्री हनुमान सहस्रनाम स्तोत्रम् (रुद्रसंहिता एवं पराशर संहिता) (मङ्गलाचरणम् एवं ध्यानम्): Sacred recitation of thousand divine names.
श्लोक १ — १०
सहस्रनाम श्लोक
ॐ हनुमाञ्छ्रीप्रदो वायुपुत्रो रुद्रोऽनघोजरः । अमृत्युर्वीरवीरोऽथ ग्रामवासाश्रयोऽनघः ॥ १ ॥
धनदो निर्विकल्पश्च कामदः परमार्थदः । कपीन्द्रो जानकीप्राणदाता शत्रुविमर्दनः ॥ २ ॥
लङ्कादाही महावीरो गन्धमादनसंस्थितः । सुग्रीवसचिवो धीरो रामदूतः प्रतापवान् ॥ ३ ॥
सिन्धुलङ्घनकारी च सीताशोकनिवारकः । अक्षहन्ता कालनेमिप्रमथी मारुतात्मजः ॥ ४ ॥
संजीवननगाभर्ता लक्ष्मणप्राणरक्षकः । द्रोणपर्वतहारी च रावणदर्पभञ्जनः ॥ ५ ॥
Om hanumāñchrīprado vāyuputro rudro'naghojaraḥ | amṛtyurvīravīro'tha grāmavāsāśrayo'naghaḥ || 1 ||
सरल भावार्थ:
श्री हनुमान सहस्रनाम स्तोत्रम् (रुद्रसंहिता एवं पराशर संहिता) (श्लोक १ — १०): पावन वेदोक्त व पौराणिक पाठ।
English Translation:
श्री हनुमान सहस्रनाम स्तोत्रम् (रुद्रसंहिता एवं पराशर संहिता) (श्लोक १ — १०): Sacred recitation of thousand divine names.
श्लोक ११ — २०
सहस्रनाम श्लोक
पञ्चवक्त्रो महाभीमो वज्रकायो महाद्युतिः । अञ्जनानन्दनो धीरो वज्रदंष्ट्रो नखायुधः ॥ ६ ॥
ब्रह्मतेजोमयो देवः सर्वव्याधिनिवारकः । भूतप्रेतपिशाचानां नाशकः सुखदायकः ॥ ७ ॥
बालसूर्यप्रभाकारी सूर्यशिष्यो महामतिः । नवव्याकरणवेत्ता च सर्वशास्त्रविशारदः ॥ ८ ॥
भक्तपालक एकान्तो रामनामरतो विभुः । सर्वसम्पत्प्रदाता च सर्वसिद्धिप्रदायकः ॥ ९ ॥
अञ्जनागर्भसम्भूतः केसरीनन्दनो बली । वज्रमुष्टिर्धरः शान्तो ज्ञानवैराग्यसागरः ॥ १० ॥
Pañcavaktro mahābhīmo vajrakāyo mahādyutiḥ | añjanānandano dhīro vajradaṃṣṭro nakhāyudhaḥ || 6 ||
सरल भावार्थ:
श्री हनुमान सहस्रनाम स्तोत्रम् (रुद्रसंहिता एवं पराशर संहिता) (श्लोक ११ — २०): पावन वेदोक्त व पौराणिक पाठ।
English Translation:
श्री हनुमान सहस्रनाम स्तोत्रम् (रुद्रसंहिता एवं पराशर संहिता) (श्लोक ११ — २०): Sacred recitation of thousand divine names.
फलश्रुतिः
सहस्रनाम श्लोक
यः पठेच्छृणुयान्नित्यं हनुमत्सहस्रनामकम् । न तस्य भयमुत्पन्नं भूतप्रेतादिकं क्वचित् ॥
कारागृहे भये घोरे शत्रुणां सङ्कटे तथा । पठनात् सर्वपापेभ्यो मुच्यते नात्र संशयः ॥
॥ इति श्रीरुद्रसंहितायां श्रीहनुमत्सहस्रनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
Yaḥ paṭhecchṛṇuyānnityaṃ hanumatsahasranāmakam | na tasya bhayamutpannaṃ bhūtapretādikaṃ kvacit ||
सरल भावार्थ:
श्री हनुमान सहस्रनाम स्तोत्रम् (रुद्रसंहिता एवं पराशर संहिता) (फलश्रुतिः): पावन वेदोक्त व पौराणिक पाठ।
English Translation:
श्री हनुमान सहस्रनाम स्तोत्रम् (रुद्रसंहिता एवं पराशर संहिता) (फलश्रुतिः): Sacred recitation of thousand divine names.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें तथा पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें।
- आसन पर बैठकर भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
- हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर संकल्प करें।
- हनुमान सहस्रनाम का शांत एवं लयबद्ध स्वर में एक-एक नाम का चिंतन करते हुए पाठ करें।
- पाठ के समापन पर आरती करें और क्षमा प्रार्थना के साथ प्रसाद अर्पित करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ:
- ✔ भयमुक्ति, शनि पीड़ा शमन, शारीरिक बल, साहस व विजय।
- ✔ हजार नामों के उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि-कंपन घर व अंतःकरण की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है।
- ✔ पारिवारिक कलह दूर होकर सुख, शांति, समृद्धि व स्वास्थ्य की वृद्धि होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हनुमान सहस्रनाम का पाठ करने से क्या फल प्राप्त होता है?
हनुमान सहस्रनाम का पाठ करने से भयमुक्ति, शनि पीड़ा शमन, शारीरिक बल, साहस व विजय। तथा इष्ट देव की अहैतुकी कृपा से जीवन के समस्त पाप और विघ्न नष्ट होते हैं।
हनुमान सहस्रनाम का पाठ करने का सबसे शुभ समय व विधि क्या है?
इसका पाठ सामान्यतः मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती के दिन प्रातःकाल स्नानादि के बाद, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शुद्ध घी का दीपक जलाकर करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
हनुमान सहस्रनाम का मूल स्रोत क्या है?
इस पावन सहस्रनाम का प्रामाणिक स्रोत सुदर्शन संहिता / पराशर संहिता है। इसके ऋषि अगस्त्य एवं आराध्य भगवान हनुमान हैं।